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चंबल में रेत माफिया पर SC का हंटर! अब संपत्ति कुर्क, GPS-CCTV से होगी सख्त निगरानी

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सुप्रीम कोर्ट ने चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन रोकने के लिए सख्त कदम उठाते हुए राज्यों को कड़ी कार्रवाई और निगरानी के निर्देश दिए।

Last Updated- April 18, 2026 | 8:55 AM IST
Supreme Court
Representative image

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैले और गंभीर रूप से लुप्तप्राय घड़ियालों के आवास राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अनियंत्रित और अवैध रेत खनन से निपटने के उपायों की व्यापक रूपरेखा जारी की है।

चंबल इलाके में अनियंत्रित खनन के मामले को स्वतः संज्ञान में लेते हुए न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता के पीठ ने ये दिशानिर्देश जारी किए। प्रशासनिक निष्क्रियता पर अपने  पिछले आलोचनात्मक रुख को दोहराते हुए अदालत ने कहा कि अवैध खनन रोकने में राज्य के अधिकारियों की विफलता साफ है। अदालत ने कहा कि खनन सिंडिकेट से निपटने के लिए एक पर्याप्त कानूनी ढांचा होने के बावजूद प्रवर्तन एजेंसियां कार्रवाई करने में अनिच्छुक दिखाई दे रही थीं।

पीठ ने अवैध खनन में शामिल लोगों की संपत्ति कुर्क करने और निवारक निरोध कानूनों के उपयोग सहित सख्त कार्रवाई करने को कहा है। अदालत ने तीनों राज्यों को अदालत के निर्देशों के अनुरूप उठाए गए ठोस कदमों की रूपरेखा बताते हुए एक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अदालत ने चेतावनी दी कि लगातार चूक से चंबल क्षेत्र में रेत खनन पर पूर्ण प्रतिबंध और अभयारण्य को सुरक्षित करने के लिए अर्धसैनिक बलों की तैनाती सहित कड़े कदमों की दिशा में कदम उठाने पड़ सकते हैं।

अदालत द्वारा अनिवार्य किए गए प्रमुख उपायों में पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचाने के लिए केंद्र की अधिकार प्राप्त समिति के परामर्श के बाद तय मानकों जैसे खनन मार्गों और संवेदनशील नदी तटों पर उच्च-रिजॉल्यूशन, वाई-फाई-सक्षम सीसीटीवी कैमरे लगाने के आदेश शामिल हैं। इनसे प्राप्त वीडियो की तत्काल निगरानी जिला स्तर पर पुलिस प्रमुखों और मंडल वन अधिकारियों द्वारा की जानी है, जिसमें अवैध गतिविधि का पता चलने पर तत्काल प्रवर्तन कार्रवाई की जा सके। अदालत ने मुरैना (मध्य प्रदेश) और ग्वालियर में खनन कार्यों में लगे सभी वाहनों और मशीनरी की अनिवार्य जीपीएस ट्रैकिंग के लिए एक प्रायोगिक परियोजना का भी निर्देश दिया। इन कानूनों का अनुपालन न होने पर उपकरणों की तत्काल जब्ती होगी और शीर्ष अदालत के आदेश पर ही इसे छोड़ा जाएगा।  इसके अलावा राज्यों को निगरानी डेटा को एकीकृत और विश्लेषण करने के लिए प्रभावित जिलों में समर्पित नियंत्रण कक्ष स्थापित करने की व्यवहार्यता की जांच करने और त्वरित प्रवर्तन के लिए अंतर-विभागीय समन्वय ढांचे तैयार करने के लिए कहा गया है।

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First Published - April 18, 2026 | 8:55 AM IST

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