राष्ट्रीय कंपनी कानून अपील पंचाट (एनसीएलएटी) ने कर्ज में डूबी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की समाधान योजना की मंजूरी को चुनौती देने वाली वेदांत लिमिटेड की याचिका आज खारिज कर दी।
चेयरपर्सन अशोक भूषण और तकनीकी सदस्य बरुण मित्रा की अगुआई वाले पीठ ने लेनदारों की समिति (सीओसी) के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें वेदांत के प्रस्ताव को अस्वीकार करने में कोई गलती नहीं पाई गई। लेनदारों की समिति दिवालियापन कर्जदाताओं का ऐसा संगठन होता है, जो किसी संकटग्रस्त कंपनी की दिवालिया प्रक्रिया के दौरान सर्वोच्च निर्णय लेता है।
आईसीआईसीआई बैंक की याचिका पर राष्ट्रीय कंपनी कानून पंचाट (एनसीएलटी) के इलाहाबाद पीठ के 3 जून, 2024 के आदेश के बाद जेएएल दिवालिया प्रक्रिया में गई थी। कंपनी पर 57,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की स्वीकृत देनदारियां थीं। राष्ट्रीय परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनी लिमिटेड (एनएआरसीएल) प्रमुख ऋणदाता के तौर पर सामने आई। लेनदारों की समिति में 85 प्रतिशत से ज्यादा मतदान हिस्सेदारी पर इसी का नियंत्रण था।
ऋणदाताओं की इस संस्था में बैंकों, वित्तीय संस्थानों और मकान खरीदारों सहित 27 सदस्य शामिल थे। प्राप्त 28 दिलचस्पियों में से 25 को छांटा गया और अंततः छह कंपनियों ने समाधान योजनाएं पेश कीं। इनमें अदाणी एंटरप्राइजेज, वेदांत, डालमिया सीमेंट (भारत) लिमिटेड, जिंदल पावर लिमिटेड, पीएनसी इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड और जेपी इन्फ्राटेक लिमिटेड शामिल थीं।
अदाणी एंटरप्राइजेज और वेदांत मुख्य दावेदार बनकर उभरीं। एक स्वतंत्र मूल्यांकन के बाद अदाणी के प्रस्ताव को ज्यादा अंक मिले, खासकर शुरुआती वसूली और कुल वित्तीय मूल्य के मामले में। नवंबर 2025 में अपनी 23वीं बैठक में सीओसी ने 93.81 प्रतिशत मत हिस्सेदारी के साथ अदाणी की योजना को मंजूरी दे दी।
चुनौती प्रक्रिया पूरी होने के बाद वेदांत ने 8 नवंबर 2025 को अपनी योजना में एक अतिरिक्त प्रस्ताव जमा किया। सीओसी ने इस संशोधित प्रस्ताव पर विचार करने से इनकार कर दिया और इसके लिए बोली प्रक्रिया के नियमों का हवाला दिया, जिनके तहत प्रक्रिया पूरी होने के बाद वित्तीय प्रस्तावों में बदलाव करने की मनाही थी।
वेदांत ने इस फैसले की आलोचना की और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया। वेदांत ने यह भी तर्क दिया कि उसकी 16,070 करोड़ रुपये की संशोधित बोली अदाणी की 14,543 करोड़ रुपये की बोली के मुकाबले कर्ज देने वालों के लिए ज्यादा बेहतर फायदेमंद थी। सीओसी ने इसके जवाब में कहा कि यह अतिरिक्त प्रस्ताव वेदांत ने तब पेश किया, जब उसे पता चला कि उसकी शुरुआती पेशकश सफल बोली लगाने वाले की पेशकश से पीछे रह गई है।