भारती एयरटेल और टाटा टेलीसर्विसेज ने समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) के अपने बकाया भुगतान के तौर पर दूरसंचार विभाग को संयुक्त रूप से 13,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि चुका दी है। यह भुगतान चार साल की मोहलत के बाद समय सीमा से एक दिन पहले किया गया है।
घटनाक्रम से वाकिफ सूत्रों ने बताया कि सोमवार को भारती एयरटेल ने दूरसंचार विभाग को एजीआर के बकाये के 9,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया है। देश की दूसरी सबसे बड़ी दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनी ने दूरसंचार विभाग से बकाये के फिर से आकलन और गणना का आग्रह किया था। इसमें गणना और अंकगणितीय त्रुटियां तथा छूट की गलतियां शामिल थीं। वोडाफोन आइडिया (वी) की तर्ज पर ही यह आग्रह किया गया था, लेकिन उसे कोई राहत नहीं दी गई।
केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि सरकार वी को राहत प्रदान कर रही है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसा करने का निर्देश दिया था। सरकार एकल आधार पर इस कंपनी की सबसे बड़ी शेयरधारक भी है। अलबत्ता भारती एयरटेल के अनुरोधों पर मंत्री ने कहा कि कंपनी को एजीआर बकाये पर कोई भी राहत पाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा।
एयरटेल का एजीआर बकाया 40,000 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। कंपनी पहले ही लगभग 18,000 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है। साल 2025 की उसकी वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार बकाया राशि 38,604 करोड़ रुपये थी। लेकिन शेष बकाया भुगतान न करने पर सरकार द्वारा मूलधन पर ब्याज, जुर्माना और जुर्माने पर ब्याज लगाए जाने के कारण बकाया राशि लगातार बढ़ रही है।
सोमवार को 9,200 करोड़ रुपये के भुगतान के साथ बकाया राशि अब 30,000 करोड़ रुपये से कुछ ही अधिक रह जाएगी। पता चला है कि टाटा टेलीसर्विसेज ने भी एजीआर बकाये के 4,170 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।