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TRAI के 1600 नंबर फरमान से ऋण वसूली को लेकर बैंक और NBFC की बढ़ी चिंता

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स्पैम (अनचाहे संदेश) और वित्तीय धोखाधड़ी रोकने के लिए ट्राई ने कर्जदाता संस्थानों को 1600 नंबर सीरीज से वॉयस कॉल करने की हिदायत दी है

Last Updated- January 23, 2026 | 9:51 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

(एनबीएफसी) को ‘1600’ नंबर सीरीज का इस्तेमाल करने का फरमान उनके लिए चिंता का सबब बनता जा रहा है। स्पैम (अनचाहे संदेश) और वित्तीय धोखाधड़ी रोकने के लिए ट्राई ने कर्जदाता संस्थानों को 1600 नंबर सीरीज से वॉयस कॉल करने की हिदायत दी है।

मगर समस्या यह है कि एक खास नंबर सीरीज देखकर कर्ज भुगतान में आनाकानी करने वाले ग्राहक ऐसी कॉल रिसीव नहीं कर सकते हैं। इससे बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों को ऋण वसूली के लिए अपनी अधिक टीम तैनात करनी होगी और व्हाट्सऐप जैसे माध्यमों का सहारा लेना होगा। इसके अलावा कर्जदाता संस्थानों को ग्राहकों में पढ़ाई-लिखाई के स्तर को भी जेहन में रखना होगा।  सूत्रों ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि ट्राई का निर्देश उपभोक्ता संरक्षण से जुड़ा है मगर यह डिजिटल माध्यम से ऋण वसूली प्रक्रिया में खलल डाल सकता है।

इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने कहा कि बकाया रकम के आधार पर वित्तीय संस्थानों के लिए ऋण वसूली पर लागत 10 से 15 प्रतिशत के बीच बढ़ सकती है। इसके अलावा क्षेत्रों में काम करने वाले बैंक प्रतिनिधियों की तैनाती बढ़ जाएगी क्योंकि कर्जधारकों तक पहुंच के लिए मानव संसाधन का इस्तेमाल अधिक करना होगा।

ऋण वसूली कारोबार से जुड़ी वित्त-तकनीक कंपनी डीपीडीजीरो के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अनंत श्रॉफ ने कहा, ‘जब 1600 सीरीज पूरी तरह शुरू हो जाएगा तो क्षेत्रीय संपर्क तंत्र पर निर्भरता काफी बढ़ जाएगी। हालांकि, 1600 सीरीज का इस्तेमाल अच्छा कदम है क्योंकि इससे वित्तीय धोखाधड़ी में काफी कमी आएगी मगर ऋण वसूली के लिहाज से चुनौती बढ़ जाएगी। इसका कारण यह है कि इन दिनों डिजिटल क्रांति से इन पर निर्भरता काफी बढ़ गई है।’

हालांकि, ट्राई के निर्देश का असर अभी पूरी तरह नहीं दिखा है क्योंकि वाणिज्यिक बैंकों के लिए इसे लागू करने की समयसीमा 1 जनवरी थी मगर  बड़े और अन्य एनबीएफसी के लिए यह क्रमशः 1 फरवरी और 1 मार्च है। निश्चित रूप से ट्राई का निर्देश वित्तीय संस्थानों की तरफ से आने वाली कॉल को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए आया है। इन दिनों वित्तीय फर्जीवाड़े के बढ़ते मामलों को देखते हुए ग्राहक 1600 सीरीज से कॉल देखकर आश्वस्त हो सकते हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार ट्राई का निर्देश ऐसे समय में आया है जब बड़े स्तर पर धोखाधड़ी होने लगे हैं और बैंकों और ग्राहकों दोनों को तगड़ा नुकसान हो रहा है। वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में बैंकिंग तंत्र को धोखाधड़ी के कारण 21,515 करोड़ रुपये का चूना लगा गया जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 30 प्रतिशत अधिक है। यह अलग बात है कि धोखाधड़ी के मामले 2.8 गुना कम होकर 5,092 रह गए हैं। इनकी तुलना में वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही में यह रकम 16,569 करोड़ रुपये थी जबकि मामलों की संख्या 18,386 के साथ अधिक थी।

पूरे वित्त वर्ष 2025 के लिए धोखाधड़ी की चपेट में आई रकम 34,771 करोड़ रुपये थी और ऐसे मामलों की संख्या 23,879 थी। कंपनियां एवं कर्जदाता फिलहाल ट्राई के निर्देश को पूरी तरह समझने में भिड़े हैं। वे यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि ट्राई का यह आदेश ऋण वसूली पर लागू होता है या नहीं क्योंकि जरूरी नहीं कि इसे लेनदेन का हिस्सा ही समझा जाए।

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First Published - January 23, 2026 | 9:51 PM IST

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