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एआई रेगुलेशन में जोखिम आधारित मॉडल अपनाएगा TRAI, कम जोखिम वाले उपयोग पर होगा स्व-विनियमन

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TRAI के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने कहा कि कम जोखिम वाले एप्लिकेशन, जो उपयोगकर्ताओं को प्रभावित करते हैं, उन्हें स्व-विनियमन के तहत रखा जाना चाहिए

Last Updated- January 21, 2026 | 10:39 PM IST
artificial intelligence

भारत के दूरसंचार नियामक ने आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के नियमन के लिए जोखिम आधारित दृष्टिकोण अपनाने की बात कही है, जिसमें सिर्फ ज्यादा जो​खिम वाले मामले ही नियामकीय दायरे में लाए जाने चाहिए।

इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने कहा कि कम जोखिम वाले एप्लिकेशन, जो उपयोगकर्ताओं को प्रभावित करते हैं, उन्हें स्व-विनियमन के तहत रखा जाना चाहिए।

उन्होंने इस बात की जरूरत बताई कि एआई के उपयोग के माध्यम से उपभोक्ताओं के लिए सबसे तत्काल लाभ धोखाधड़ी और अवांछित संचार के खिलाफ नेटवर्क को सुरक्षित करना था। लाहोटी ने बताया कि एआई अब पता लगाने वाले सिस्टम के लिए एक ‘बुनियादी क्षमता’ थी जो उपयोगकर्ताओं को दखल वाले संदेशों से बचाती है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय बाजार ने 5जी, 6जी और आईओटी जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों को टेस्ट करने के लिए ‘रेगुलेटरी सैंडबॉक्स’ के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया है।

लाहोटी ने कहा, ‘रेगुलेटरी सैंडबॉक्स एक नियंत्रित माहौल में नई नियामकीय प्रौद्योगिकी का टेस्ट करता है।’ उन्होंने अप्रैल 2024 में पहली बार की गईं सिफारिशों का जिक्र किया, ताकि स्टार्टअप और प्रदाताओं को पूरे बाजार में पेश करने से पहले बिजनेस मॉडल को प्रमा​णित करने में मदद मिल सके।

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First Published - January 21, 2026 | 10:35 PM IST

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