गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) का बहीखाता वित्त वर्ष 2027-28 के अंत में 92.9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। ब्रिकवर्क रेटिंग्स ने अपनी एक रिपोर्ट में यह अनुमान लगाते हुए कहा है कि वित्त वर्ष 2026 और वित्त वर्ष 2028 के बीच एनबीएफसी का बहीखाता 16 प्रतिशत बढ़ जाएगा। मगर रिपोर्ट में कहा गया है कि बिना रेहन के कर्ज और ग्रामीण कर्ज में आगे चलकर परेशानी भी बढ़ सकती है।
वित्त वर्ष 2025 में इस क्षेत्र में कुल 61.1 लाख करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां थीं और 2027-28 तक बहीखाते में सालाना 15 प्रतिशत वृद्धि होते रहने का अनुमान है। रेटिंग एजेंसी ने कहा, ‘एनबीएफसी के बहीखाते को अब तक खुदरा, सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) तथा सेवा क्षेत्र में ऋण की अधिक मांग से काफी मदद मिली है।’
ब्रिकवर्क रेटिंग्स के निदेशक (रेटिंग्स) हेमंत सागरे ने कहा,‘भारत के एनबीएफसी क्षेत्र के लिए नजरिया स्थिर बना हुआ है क्योंकि इसमें ऋण आवंटन में सधी मगर मजबूत वृद्धि हो रही है, संपत्ति की गुणवत्ता सुधर रही है और डिजिटल एकीकरण लगातार बढ़ रहा है। निकट भविष्य की बात करें तो वित्त वर्ष 27 शुरू होते समय इस क्षेत्र में मुनाफा तो बढ़ रहा है मगर असुरक्षित एवं ग्रामीण ऋण दिक्कत में फंस रहा है।’
रिपोर्ट में कहा गया है कि दीर्घ अवधि में एनपीए की आशंका इस बात पर निर्भर करेगी कि कर्ज कितने अनुशासित तरीके से दिया जा रहा है, संचालन कितना मजबूत है, रेहन के बदले कितनी उधारी दी जा रही है और कितनी पैनी नजर रखी जा रही है। मगर थोक में रकम पाने पर लगातार निर्भरता, उधारी की लागत में बढ़ोतरी और नियामकीय सख्ती के कारण एनबीएफसी क्षेत्र के लिए चुनौतियां बढ़ रही हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि रेहन वाले यानी सुरक्षित ऋण तो मजबूत हैं मगर असुरक्षित खुदरा तथा सूक्ष्म वित्त श्रेणियों में कर्ज फंस सकता है। वित्त वर्ष 2025 में प्रोविजन कवरेज घटकर 66.6 प्रतिशत रह गया, जो वित्त वर्ष 2024 में 69.1 प्रतिशत था। इसकी वजह परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार होना और पिछले दो वर्षों में सुरक्षित पूंजी भंडार (बफर) बढ़ना है।