हाल के वर्षों में देश में पहली बार ऋण लेने वाली महिलाओं की संख्या घटी है, जबकि कुल मिलाकर महिलाओं को ऋण का विस्तार हुआ है। यह जानकारी नीति आयोग के महिला उद्यमिता मंच और माइक्रोसेव कंसल्टिंग ट्रांसयूनियन सिबिल की बुधवार को आई रिपोर्ट में दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त देयता समूहों के माध्यम से अपना पहला सूक्ष्म ऋण लेने वाली महिलाओं के रूप में परिभाषित नई महिला कर्जदारों की हिस्सेदारी वर्ष 2022 और 2023 में 28 प्रतिशत से घटकर 2024 में 27 प्रतिशत तथा 2025 में और भी कम होकर 24 प्रतिशत रह गई है। इसी अवधि में पहले से कर्ज लेने वालों की हिस्सेदारी 72 प्रतिशत से बढ़कर 76 प्रतिशत हो गई। यह आंकड़ा बार-बार कर्ज लेने वालों को दिए गए ऋणों का उच्च अनुपात दर्शाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘कुल दिए गए ऋणों में पहली बार कर्ज लेने वाली महिलाओं की हिस्सेदारी 2023 से लगातार घट रही है। इसका कारण सख्त नियम और कर्जदाताओं का अपने पुराने ग्राहकों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना है। एक तरफ बार-बार कर्ज लेने वालों को ऋण देने से पोर्टफोलियो को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है, दूसरी ओर यह सूक्ष्म वित्त के विस्तार से बचाता है।’
सूक्ष्म वित्त खंड में पिछले 18 महीनों के दौरान चुनौतीपूर्ण स्थिति रही है, जिसमें कर्जदारों के अत्यधिक ऋण और एनपीए में वृद्धि के कारण ऋण आपूर्ति में संकुचन देखा गया है।