facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

केंद्र सरकार के खातों में गड़बड़ी! CAG ने पकड़ी 12,754 करोड़ की बड़ी गलती

Advertisement

54,000 करोड़ से ज्यादा के उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित, पारदर्शिता पर सवाल

Last Updated- April 03, 2026 | 9:45 AM IST
CAG
Representational Image

CAG Report: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने गुरुवार को संसद में पेश की गई वित्त वर्ष 2024-25 की केंद्र सरकार के खातों पर अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 2024-25 में केंद्र सरकार के खातों में 12,754.47 करोड़ रुपये का गलत वर्गीकरण पाया गया है। साथ ही सीएजी ने कहा है कि 31 मार्च, 2025 तक 54,282.32 करोड़ रुपये की राशि के 33,973 उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) लंबित थे।

सीएजी ने कहा कि गलत वर्गीकरण से ‘खातों में पारदर्शिता प्रभावित होती है।’ साथ ही यह मुख्य रूप से गलत उद्देश्य मद के तहत व्यय को दर्ज करने से संबंधित है। इसके अलावा, कई मामलों में प्राप्तियों और व्यय को ‘लघु मद 800 अन्य व्यय’ और ‘लघु मद 800 अन्य प्राप्तियां’जैसे मद के तहत भी दर्ज किया गया था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन मदों में 50 प्रतिशत से अधिक व्यय और प्राप्तियों को दर्ज किया गया था। प्राप्ति के गलत वर्गीकरण से 4,011.91 करोड़ रुपये की राशि प्रभावित हुई। प्राथमिक रूप से सीबीडीटी जैसे कर राजस्व मदों, शुल्क, जुर्माना और जब्ती जैसी गैर कर राजस्व प्राप्तियों को गलत तरीके से लघु मद 800 (अन्य प्राप्तियां) के तहत जमा किया गया था, जबकि समर्पित लघु मद मौजूद था।

व्यय के गलत वर्गीकरण से कुल 8,742.56 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जो मुख्य रूप से गलत उद्देश्य मदों (8,723.83 करोड़ रुपये) के कारण हुआ। इनमें राजस्व प्रकृति के खर्चों को पूंजीगत प्रमुख मदों में, पूंजीगत व्यय को राजस्व व्यय के रूप में और सब्सिडी को पूंजीगत संपत्तियों के लिए अनुदान के रूप में दर्ज करना शामिल था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025 में ब्याज भुगतान पर सबसे अधिक राजस्व व्यय हुआ, जो कुल का 29.2 प्रतिशत था। ऋण चुकाने पर उस वर्ष भारत की समेकित निधि से सबसे बड़ी निकासी हुई।   इसमें यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025 में राजस्व व्यय में से प्रतिबद्धता वाले व्यय का अनुपात बढ़ गया है, जिससे विवेकाधीन व्यय के लिए कम गुंजाइश बची है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 31 मार्च, 2025 तक 33,973 उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित थे, जिनकी कुल राशि 54,282.32 करोड़ रुपये थी। इनमें से 13,926 उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) 38,287.52 करोड़ रुपये के थे, जो पिछले 3 वर्षों से संबंधित थे। वहीं सबसे पुराना लंबित प्रमाण पत्र 1985-86 में स्वीकृत अनुदानों से संबंधित था।

सीएजी ने सिफारिश की है, ‘यूसी की प्राप्ति यह पुष्टि करने का एकमात्र साधन है कि धन का उपयोग उसी मद में हुआ है, जिसके लिए उसका आवंटन किया गया है। ऐसे में विभागों को अनुदान प्राप्त मिलने वाले निकायों द्वारा यूसी समय पर जमा किया जाना सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत प्रणाली स्थापित करने की जरूरत है।’

बजट बनाने में भी कमियां स्पष्ट थीं। संसद ने वित्त वर्ष 2025 के लिए 1,47,54,642.48 करोड़ रुपये को मंजूरी दी थी, लेकिन वास्तविक खर्च 1,42,63,339.67 करोड़ रुपये रहा, जो 4,91,302.81 करोड़ रुपये कम है। फिर भी खराब प्रावधानों के कारण 11 अनुदानों के तहत 16 उपशीर्षों में 25 करोड़ रुपये या उससे अधिक की अधिकता देखी गई, जबकि 19 अनुदानों में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई और 7 में 3 साल से अधिक समय से लगातार कम खर्च हुआ।

सीएजी ने कहा कि विशिष्ट मकसद के लिए एकत्र किया गया धन हमेशा समय पर इच्छित गंतव्य तक नहीं पहुंच रहा था। यह पाया गया कि वित्त वर्ष 2025 में 4 नामित आरक्षित निधियों में 9,222 करोड़ रुपये कम हस्तांतरण हुआ, जबकि उस वर्ष सेस, अधिभार और लेवी के रूप में 3,89,220 करोड़ रुपये एकत्र किए गए थे।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025 के अंत में कंपंसेटरी अफॉरेस्टेसन फंड्स के तहत संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 10,380.36 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित था।  सीएजी ने सिफारिश की है कि इस तरह के संग्रह को नियमों के अनुसार कड़ाई से हस्तांतरित किया जाना चाहिए और समय पर उसका मिलान किया जाना चाहिए।

Advertisement
First Published - April 3, 2026 | 9:28 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement