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चौथी तिमाही में सुस्त पड़ सकती है आ​र्थिक वृद्धि की रफ्तार, उच्च आवृत्ति संकेतकों में नरमी

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पश्चिम एशिया में चल रहे संकट से मार्च में आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान आने और वृद्धि पर दबाव से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि पर असर पड़ सकता है

Last Updated- May 31, 2026 | 10:38 PM IST
GDP

उच्च आवृत्ति वाले संकेतकों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में देश की आर्थिक वृद्धि में तीसरी तिमाही की तुलना में कमी आने की आशंका है। पश्चिम एशिया में चल रहे संकट से मार्च में आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान आने और वृद्धि पर दबाव से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि पर असर पड़ सकता है।

राष्ट्रीय सां​ख्यिकी कार्यालय वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही और पूरे वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि के अनंतिम अनुमान 5 जून को जारी कर सकता है। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के दौरान 10 उच्च आवृत्ति वाले संकेतकों में से 8 में पिछली तिमाही की तुलना में गिरावट देखी गई जो आर्थिक गतिविधियों में व्यापक स्तर पर नरमी का संकेत है।

वित्त वर्ष 2026 की चौथी​ तिमाही के दौरान वस्तु निर्यात में भी गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही औद्योगिक उत्पादन, यात्री वाहनों की बिक्री, घरेलू विमानन यात्री यातायात और विनिर्माण तथा सेवा परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) में तीसरी तिमाही के मुकाबले नरमी आई। हालांकि मजबूत ऋण वृद्धि और उपभोग ने नरमी के प्रभाव को कुछ हद तक कम किया है। इस दौरान बैंक ऋण वृद्धि में तेजी आई, ईंधन की खपत बढ़ी और ग्रामीण बाजारों में मांग मजबूत बनी रही।

अपेक्षाकृत कमजोर संकेतक रुझान को देखते हुए अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में दर्ज की गई 7.8 फीसदी की तुलना में चौथी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर में थोड़ी कमी आएगी लेकिन यह 7.2 फीसदी (औसत अनुमान) के आसापास रह सकती है। चौथी तिमाही के जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.7 फीसदी से 7.4 फीसदी के बीच हैं।

रेटिंग एजेंसी इक्रा ने विनिर्माण में धीमी वृद्धि, वस्तु निर्यात में गिरावट और पश्चिम एशिया संकट की वजह से मार्जिन पर शुरुआती दबावों का हवाला देते हुए चौथी तिमाही में 7 फीसदी वृद्धि दर का अनुमान लगाया है। इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि वृद्धि दर में नरमी आने के बावजूद यह काफी मजबूत बनी हुई है। सेवा, खनन और बिजली क्षेत्र के संकेतक बेहतर हुए हैं मगर औद्योगिक सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) में कमी आई है।

अपने दूसरे अग्रिम अनुमान में राष्ट्रीय सां​ख्यिकी कार्यालय ने वित्त वर्ष 2026 की वृद्धि दर 7.6 फीसदी आंकी है जिसका अर्थ है कि चौथी तिमाही में लगभग 7.3 फीसदी की वृद्धि होगी।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता ने अग्रिम अनुमान के अनुरूप चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि 7.4 फीसदी और पूरे वर्ष के लिए वृद्धि 7.6 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है।

सेनगुप्ता ने कहा कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि या आपूर्ति की कमी का कोई बड़ा प्रभाव न पड़ने के कारण चौथी तिमाही में कंपनियों के मार्जिन में सुधार हुआ। हालांकि होटल और परिवहन सेवाओं में कुछ नरमी देखी गई। उन्होंने कहा कि चौथी तिमाही के लिए सकल मूल्य वर्धन जीडीपी से अधिक हो सकता है क्योंकि सब्सिडी घटाने के बाद शुद्ध कर संग्रह में कमी आ सकती है। इसलिए अनुदान की अतिरिक्त मांग के कारण सब्सिडी में वृद्धि हुई है।

डीबीएस बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में 7.3 फीसदी की वृद्धि का अनुमान लगाया है और कहा कि चौथी तिमाही में वृद्धि मजबूत बनी रही और मांग पक्ष के संकेतकों द्वारा इसे काफी हद तक समर्थन मिला जो वर्ष के अंत तक काफी हद तक बरकरार रहे।

राव ने कहा, ‘उच्च आवृत्ति वाले संकेतकों के विश्लेषण से पता चलता है कि चौथी तिमाही में कुछ क्षेत्रों में नरमी आई। विशेष रूप से निवेश के क्षेत्र में क्योंकि नई परियोजनाओं की घोषणाओं में कमी देखी गई। हालांकि मुख्य औद्योगिक क्षेत्र की स्थिति स्थिर बनी हुई है।’ उन्होंने बताया कि कि बुनियदी ढांचा उद्योग और मुख्य पीएमआई सूचकांक विस्तार के दायरे में बने रहे।

बैंक ऑफ बड़ौदा ने 7.2 से 7.3 फीसदी की वृद्धि का अनुमान लगाया है। उसका तर्क है कि वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही संघर्ष के प्रभावों से काफी हद तक अप्रभावित रही और इसे एफएमसीजी, कंज्यूमर ड्यूरबेल्स और रियल एस्टेट कंपनियों के मजबूत प्रदर्शन से दम मिला।

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First Published - May 31, 2026 | 10:38 PM IST

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