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भारत में महिला श्रम की भागीदारी G-20 देशों में सबसे कम, ज्यादातर महिलाएं कृषि और कम उत्पादकता वाले स्वरोजगार में

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रिपोर्ट में कहा गया है कि महिला श्रम बल भागीदारी करीब 42 प्रतिशत है और इन आंकड़ों के साथ भारत जी-20 में निचले स्थान पर और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में चौथे स्थान पर है

Last Updated- March 09, 2026 | 10:56 PM IST
Women Workers

ऐक्सिस बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में महिला श्रम बल भागीदारी दर (एफएलएफपीआर) 20 देशों के समूह (जी-20) में सबसे कम है। भारत में काम करने वाली महिलाओं का एक बड़ा हिस्सा कृषि में या अवैतनिक या कम उत्पादकता वाले स्वरोजगार में लगा हुआ है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि महिला श्रम बल भागीदारी करीब 42 प्रतिशत है और इन आंकड़ों के साथ भारत जी-20 में निचले स्थान पर और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में चौथे स्थान पर है।

‘द मिसिंग हाफ : विमेन ऐंड इंडियाज ग्रोथ चैलेंज’ नामक रिपोर्ट में कहा गया है कि काम करने वाली लगभग 61 प्रतिशत महिलाएं कृषि क्षेत्र में हैं, जिसका देश के सकल घरेलू उत्पाद में योगदान तुलनात्मक रूप से कम है।

ऐक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री नीलकंठ मिश्र ने कहा कि देश को अधिक महिलाओं को कार्यबल में लाने के लिए कई बाधाओं को दूर करना होगा। मिश्र ने कहा, ‘हमें श्रम की मांग बढ़ानी चाहिए, बुनियादी ढांचे में सुधार करना चाहिए, पुराने कानूनी बाधाओं को दूर करना चाहिए और लापता आधी आबादी को कार्यबल में लाने के लिए बच्चों के देखभाल की सुविधाओं और कार्यस्थल लचीलेपन पर काम करना चाहिए।’

रिपोर्ट में रोजगार के अधिक सृजन, बच्चों के बेहतर देखभाल की सुविधा, बेहतर सुरक्षा और गतिशीलता और लचीले या अंशकालिक काम का समर्थन करने वाली नीतियों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है। इसमें महिलाओं के आवास के करीब गैर-कृषि रोजगार पैदा करने और व्यावसायिक और कौशल प्रशिक्षण का विस्तार करने के महत्त्व पर भी जोर दिया गया है, क्योंकि लगभग तीन-चौथाई भारतीय महिलाओं को व्यावसायिक या तकनीकी प्रशिक्षण नहीं मिला है।

महिलाओं के घर में कामकाज करने व परिवार की देखभाल करने के काम को जीडीपी या श्रमबल भागीदारी में नहीं गिना जाता है। ऐसे में आधिकारिक आंकड़ों में महिलाओं के काम का एक बड़ा हिस्सा अदृश्य रहता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय महिलाएं अपने दिन का लगभग 20 प्रतिशत वक्त अवैतनिक घरेलू और देखभाल के काम में लगाती हैं और इस तरह के काम पर खर्च किया गया प्रत्येक अतिरिक्त घंटा महिलाओं के रोजगार की संभावना को कम करता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि रोजगार में शामिल महिलाओं में भी ज्यादातर कम उत्पादकता वाले क्षेत्रों में लगी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 61 प्रतिशत कामकाजी महिलाएं कृषि कार्य में लगी हुई हैं और यह संख्या उभरते बाजारों और चीन की तुलना में तीन गुना है। भारत के कुल उत्पादन में कृषि की हिस्सेदारी तुलनात्मक रूप से कम है और भारत के कुल कामगारों का करीब 45 प्रतिशत इस सेक्टर में जीडीपी का 15 प्रतिशत उत्पादन कर रहा है।

तमाम महिलाएं स्वरोजगार कर रही हैं। दो तिहाई महिला कर्मचारी कम उत्पादकता वाले रोजगार में लगी हुई हैं। वहीं आधे से ज्यादा स्वरोजगार प्लेटफॉर्म जैसे पशुपालन या परिवार के उद्यमों में काम कर रही हैं, जिनका उन्हें कोई भुगतान नहीं मिलता है। यहां तक कि जिन्हें वेतन मिलता है, उनमें से करीब 60 प्रतिशत महिलाएं अनौपचारिक क्षेत्र में काम कर रही हैं, जिनके साथ नौकरियों के लिए कोई लिखित समझौता नहीं होता है और उन्हें सामाजिक सुरक्षा के लाभ नहीं मिलते हैं।

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First Published - March 9, 2026 | 10:49 PM IST

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