भारत को ऊर्जा आपूर्ति के झटकों से निपटने के लिए व्यापक ऊर्जा भंडारण नीति बनाने की जरूरत है। एसऐंडबी ग्लोबल ने बुधवार को कहा कि भारत ऊर्जा आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर है और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण हुई आपूर्ति की समस्या को देखते हुए भंडारण नीति की जरूरत रेखांकित हुई है।
देश को प्रमुख औद्योगिक अंतिम उपयोगकर्ताओं के लिए बैटरी ऊर्जा और उत्पाद के स्तर पर भंडारण के लिए सहायक नीतियों की आवश्यकता है। एसऐंडपी के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में वर्तमान में 2 गीगावॉट से कम बैटरी भंडारण है और एलपीजी के लिए लगभग 22 दिनों का, विमान ईंधन (एटीएफ) के लिए 60 दिनों का, कच्चे तेल के लिए 74 दिनों का भंडारण है।
वहीं प्राकृतिक गैस के लिए कोई रणनीतिक भंडार नहीं है। चल रहे युद्ध ने ऊर्जा को लेकर पश्चिम एशिया पर भारत की निर्भरता को उजागर किया है। भारत की इन देशों से निकटता, बुनियादी ढांचे की प्रतिस्पर्धात्मकता और कांट्रैक्ट की विरासत के कारण निर्भरता बहुत अधिक है। एसऐंडपी ने कहा है कि वैकल्पिक स्रोतों से झटके कम हो सकते हैं, लेकिन आर्थिक और लॉजिस्टिक कुशलता को देखते हुए ये खाड़ी देशों के आपूर्तिकर्ताओं की जगह नहीं ले सकते।