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आय सर्वेक्षण में लोगों की झिझक बड़ी चुनौती, विदेशी मॉडल्स से सीखने की तैयारी में भारत 

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चिंता यह है कि जब उत्तरदाताओं को भुगतान किया जाता है तो वे साक्षात्कारकर्ता को वह बताने के लिए बाध्य महसूस कर सकते हैं जो उन्हें लगता है कि साक्षात्कारकर्ता सुनना चाहता है

Last Updated- May 26, 2026 | 11:10 PM IST
Money

भारत के राष्ट्रीय घरेलू आय सर्वेक्षण (एनएचआईएस) 2026 के पायलट सर्वेक्षण में 95 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने आय संबंधी सवालों को संवेदनशील पाया है, वहीं सांख्यिकी मशीनरी सर्वेक्षण डिजाइन ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों के सर्वेक्षणों के अनुभवों से प्रेरणा ले रहा है। इन देशों के अनुभव भारत के लिए परखा हुआ लेकिन चुनौतीपूर्ण खाका पेश करता है।

अमेरिकी जनगणना ब्यूरो का मानना है कि पैसे से उत्तरदाताओं की हिचकिचाहट को कम किया जा सकता है। आय और कार्यक्रम भागीदारी सर्वेक्षण (एसआईपीपी) में पाया गया कि जिन परिवारों को साक्षात्कार से पहले बिना शर्त नकद राशि दी गई थी, उन्होंने आय संबंधी प्रश्नों के उत्तर कम खाली छोड़े और निवेश से होने वाली आय की उनकी रिपोर्टिंग कहीं अधिक सटीक थी।

भारत सरकार के पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद् प्रणब सेन ने कहा, ‘प्रतिक्रिया के लिए पूर्व-प्रोत्साहन का मॉडल बहुत ही संदिग्ध है। इस पर बहुत बहस हुई है।’ चिंता यह है कि जब उत्तरदाताओं को भुगतान किया जाता है तो वे साक्षात्कारकर्ता को वह बताने के लिए बाध्य महसूस कर सकते हैं जो उन्हें लगता है कि साक्षात्कारकर्ता सुनना चाहता है। यह ऐसा जोखिम है जिसे उन्होंने काल्पनिक और साबित करना असंभव बताया। उन्होंने कहा, ‘यह मुख्य कारणों में से एक है कि हमने कभी पैसे की पेशकश क्यों नहीं की। हम इसे [एनएचआईएस] राष्ट्रीय हित के रूप में बेचते हैं।’

ऑस्ट्रेलिया की आय और आवास सर्वेक्षण को ऑस्ट्रेलिया का सांख्यिकी ब्यूरो करवाता है। इसमें विभिन्न तरीकों का उपयोग करता है। वर्ष 2019-20 के बाद से परिवार स्वयं ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। हालांकि कुछ परिवारों ने आमने-सामने या टेलीफोन साक्षात्कार को प्राथमिकता दी है।

एबीएस मौजूदा रिकॉर्ड पर आश्रित है। इन रिकार्डों में कर, पेरोल और कल्याण डेटा शामिल हैं। वह परिवारों से सीधे सवाल पूछता है, ताकि डेटा को दोबारा एकत्र करने के बजाय उसका पुन: उपयोग किया जा सके। हालांकि इस आत्मनिर्भरता की अपनी सीमाएं हैं : जब एजेंसी ने अपने 2023-24 के दौर में प्रशासनिक स्रोतों पर बहुत अधिक निर्भरता दिखाई और उत्तरदाताओं को कठिन प्रश्न छोड़ने की अनुमति दी तो आंकड़ों की गुणवत्ता गिर गई और एबीएस ने परिणामों को प्रकाशित करने से इनकार करने का दुर्लभ कदम उठाया।

कनाडा इन सबसे आगे है। इसने ज्यादातर पूछना बंद कर दिया है। यह परिवारों से यह पूछने के बजाय कि वे कितना कमाते हैं, कनाडाई आय सर्वेक्षण सीधे राजस्व एजेंसी द्वारा रखे गए कर रिकॉर्ड से आय प्राप्त करता है। इसमें अब दायर रिटर्न और संबंधित कर पर्चियां दोनों शामिल हैं।

दक्षिण अफ्रीका इन सभी में सबसे अधिक श्रम-गहन मार्ग अपनाता है। इसकी सांख्यिकी एजेंसी स्टेट्स एसए एकल बैठक के बजाय एक महीने के लिए एक परिवार के दैनिक जीवन की आय और व्यय सर्वेक्षण करवाती है।

यह देखना बाकी है कि भारत के सांख्यिकीविद् वास्तव में इनमें से किसी से अपनाते हैं और वे भारतीय संदर्भ में इसे कितनी अच्छी तरह दोहरा पाएंगे।

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First Published - May 26, 2026 | 11:06 PM IST

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