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सुप्रीम कोर्ट को मिले 5 नए न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता वी एस मोहना बनीं शीर्ष अदालत की दूसरी महिला जज

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सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति के बाद जजों की कुल संख्या 37 हो गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता वी एस मोहना शीर्ष अदालत की दूसरी महिला जज बनी हैं

Last Updated- June 02, 2026 | 10:36 PM IST
Supreme Court of India
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

उच्चतम न्यायालय को मंगलवार को पांच नए न्यायाधीश मिल गए। इन नई नियुक्तियों के साथ देश के शीर्ष न्यायालय में न्यायाधीशों की कुल संख्या 37 (मुख्य न्यायाधीश सहित) हो गई है। अब न्यायालय में केवल एक पद रिक्त रह गया है। ये नियुक्तियां केंद्र सरकार के उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 के तहत सर्वोच्च न्यायालय में स्वीकृत संख्या 34 न्यायाधीशों से बढ़ाकर 38 (भारत के मुख्य न्यायाधीश सहित) करने के निर्णय के बाद हुई हैं। नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से पहले शीर्ष न्यायालय में 34 न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या थी।

हालांकि, इनमें दो पद रिक्त थे यानी कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या केवल 32 थी। यह इजाफा न्यायालय में लंबित 93,000 से अधिक मामलों की सुनवाई पूरी करने और संविधान पीठों की अधिक बार सुनिश्चित करने के मकसद से की गई हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश शील नागू, बंबई उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेव, जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली और वरिष्ठ अधिवक्ता वी एस मोहना को पद की शपथ दिलाई।

मोहना अब सर्वोच्च न्यायालय की पीठ में दूसरी महिला न्यायाधीश होंगी। इससे पहले न्यायालय में केवल एक महिला न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना थीं।

न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा के बाद मोहना बार एसोसिएशन से सीधे सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत होने वाली दूसरी महिला बन गई हैं। उनसे पहले 2018 में न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा को यह सम्मान मिला था। हालांकि, यह पहली बार नहीं है कि पांच न्यायाधीशों ने एक साथ शपथ ली हो। इससे पहले 31 अगस्त, 2021 को भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन्ना ने तीन महिलाओं सहित नौ न्यायाधीशों को पद की शपथ दिलाई थी।

वर्ष 2026 से पहले पांच न्यायाधीशों की एक साथ नियुक्ति का अंतिम बड़ा समारोह 6 फरवरी, 2023 को भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ द्वारा संपन्न किया गया था। शपथ ग्रहण समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश और बार एसोसिएशन के सदस्य उपस्थित थे।

ये नियुक्तियां मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित पहली नियुक्तियां हैं। उनके कार्यकाल के दौरान लंबित मामलों पर जल्द सुनवाई पूरी करना प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक रहा है। सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने 27 मई को चार उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों और मोहना की पदोन्नति की सिफारिश की थी।

केंद्र सरकार की मंजूरी और राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति वारंट जारी होने के बाद 1 जून को औपचारिक रूप से नियुक्तियों की अधिसूचना जारी की गई। ये नियुक्तियां ऐसे समय में हुई हैं जब सर्वोच्च न्यायालय में अगले कुछ महीनों में कई न्यायाधीश सेवानिवृत्त होने वाले हैं। न्यायमूर्ति पंकज मिथल 6 जून को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उनके बाद न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी 28 जून को, न्यायमूर्ति संजय करोल 28 अगस्त को और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा 29 नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे।

माना जा रहा है कि इन नई नियुक्तियों से मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत के कार्यकाल के दौरान न्यायालय की मजबूती बनाए रखने में सहायक होंगी। वर्तमान मुख्य न्यायाधीश का कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होगा।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी, न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश के कॉलेजियम द्वारा की गई सिफारिशों को पीठ में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और नारी-पुरष अनुपात बेहतर बनाने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।

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First Published - June 2, 2026 | 10:36 PM IST

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