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नीट पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा: NTA ने अतीत से नहीं सीखा सबक, केंद्र और CBI से मांगा जवाब

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सुप्रीम कोर्ट ने नीट पेपर लीक मामले में एनटीए की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताते हुए केंद्र और सीबीआई से नई परीक्षा प्रणाली के गठन पर जवाब मांगा है

Last Updated- May 25, 2026 | 10:54 PM IST
supreme court of india
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि यह दुखद है कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने पूर्व के मामलों से कोई सबक नहीं सीखा है। अदालत ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा आयोजित करने के लिए परीक्षा एजेंसी की जगह एक मजबूत और स्वायत्त निकाय स्थापित करने संबंधी याचिकाओं पर केंद्र सरकार, एनटीए और सीबीआई से जवाब तलब किया है। यही नहीं, उसने 2024 के नीट पेपर लीक मामले में सवोच्च अदालत द्वारा गठित उच्च अ​धिकार प्राप्त समिति की सिफारिशों को लागू करने पर भी ​स्थिति रिपोर्ट मांगी है।

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे के पीठ ने निर्देश दिया कि याचिकाओं की प्रति अन्य पक्षों के अलावा सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को भी दी जाए। न्यायालय ने नीट परीक्षा आयोजित करने के लिए जिम्मेदार एनटीए को 2024 में अदालत द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुपालन पर गुरुवार तक हलफनामा दाखिल करने को कहा। पीठ ने कहा, ‘यह दुखद है कि उन्होंने सबक नहीं सीखा है। यह मामला पहले भी इस अदालत में आया था। एक समिति, एक निगरानी समिति गठित की गई थी, जिसने कुछ सिफारिशें की थीं और उन्हें स्वीकार कर लिया गया था। हम चाहते हैं कि एनटीए समिति द्वारा सुझाई गई सिफारिशों के अनुपालन के लिए उठाए गए कदमों पर हलफनामा दाखिल करे।’

 शीर्ष अदालत ने फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (एफएआईएमए) द्वारा वकील तन्वी दुबे के माध्यम से दायर याचिका पर नोटिस जारी करते हुए कहा कि वह इस विषय से संबंधित सभी मामलों को एक साथ नत्थी कर रहा है।

न्यायालय ने केंद्र द्वारा नियुक्त भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख के. राधाकृष्णन के नेतृत्व वाली समिति को एनटीए के कामकाज में सुधार करने और उसके निर्देशों के अनुपालन के लिए उठाए गए कदमों का विस्तृत विवरण देने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने सभी पक्षों को तीन दिन के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा और मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को निर्धारित कर दी। फेडरेशन ने बार-बार पेपर लीक होने के कारण 22 लाख से अधिक छात्रों के मौलिक अधिकारों पर हमला होने का हवाला देते हुए शीर्ष अदालत से सीधे हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया और एनटीए के पुनर्गठन या उसके स्थान पर राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) के संचालन के लिए एक मजबूत और स्वायत्त प्रणाली की स्थापना की मांग की है। 

याचिका में यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि जब तक पुन: परीक्षा की देखरेख के लिए औपचारिक रूप से एक नई समिति का गठन नहीं हो जाता तब तक एक उच्चस्तरीय निगरानी समिति नियुक्त की जाए। 

याचिका में कहा गया है कि समिति में अध्यक्ष के रूप में उच्चतम न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और फॉरेंसिक वैज्ञानिक शामिल होने चाहिए, ताकि आगे कोई और डेटा लीक न हो। चिकित्सा शिक्षा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एनटीए द्वारा 3 मई को आयोजित नीट-यूजी की परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के बीच इसे 12 मई को रद्द कर दिया गया था, जिसकी जांच अब सीबीआई कर रही है। 

इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों एवं प्रशासकों को पत्र लिखकर 21 जून को होने वाली नीट-स्नातक की पुन: परीक्षा के सुगम और निष्पक्ष आयोजन के लिए सहयोग मांगा है। शिक्षा मंत्रालय ने बयान में कहा कि मौजूदा भीषण गर्मी की स्थिति को देखते हुए प्रधान ने उनसे परीक्षा केंद्रों पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। 

अरावली को परिभा​षित करने के लिए विशेषज्ञों की राय लें

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि अरावली पहाड़ियों और पर्वतमाला को परिभाषित करने के लिए गठित की जाने वाली विशेषज्ञ समिति को संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से परामर्श करना चाहिए ताकि आम जनता की राय सुनी जा सके।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली के पीठ ने यह भी कहा कि समिति में अधिक सदस्य नहीं हो सकते, क्योंकि इससे प्रबंधन मुश्किल हो जाता है। पीठ ने कहा, ‘हम 30 लोगों की समिति नहीं बना सकते, क्योंकि इससे प्रबंधन मुश्किल हो जाएगा। समिति को विशेषज्ञों से परामर्श लेना चाहिए और इसमें पांच-सात सदस्य हो सकते हैं। हम इसे आदेश में दर्ज कर लेंगे।’

इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने पर्यावरण मंत्रालय और अन्य हितधारकों से उस समिति के लिए विशेषज्ञों के नाम सुझाने को कहा था, जो दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला कही जाने वाली अरावली पहाड़ियों को परिभाषित करेगी। 

उच्चतम न्यायालय ने अपने 20 नवंबर के फैसले में दिए गए उन निर्देशों को पिछले साल 29 दिसंबर को स्थगित रखने का आदेश दिया था, जिसमें अरावली पहाड़ियों और पर्वतमाला की एक समान परिभाषा को स्वीकार किया गया था। 

इसने कहा था कि कुछ महत्त्वपूर्ण मुद्दों को स्पष्ट करना होगा, जिनमें यह भी शामिल है कि क्या 100 मीटर की ऊंचाई और पहाड़ियों के बीच 500 मीटर का अंतर पर्यावरण संरक्षण के दायरे को सीमित कर देगा।

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First Published - May 25, 2026 | 10:54 PM IST

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