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चंबल अभयारण्य में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा: अब लापरवाह अधिकारियों की तय होगी जिम्मेदारी

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सुप्रीम कोर्ट ने चंबल अभयारण्य में अवैध खनन रोकने में विफल रहने पर राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने के संकेत दिए हैं

Last Updated- March 20, 2026 | 11:25 PM IST
Supreme Court
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को ऐसे संकेत दिए हैं कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में वन्यजीवों के रहने वाली जगहों को हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। अदालत ने कहा कि अवैध रेत खनन को रोकने में प्रशासन की लापरवाही के कारण यह नुकसान हो रहा है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। यह मामला अवैध खनन और उससे घड़ियाल जैसे संकटग्रस्त जलीय जीवों पर पड़ने वाले असर से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि संबंधित राज्यों और विभागों से जवाब मिलने के बाद मामले की विस्तार से जांच की जाएगी।

फिलहाल अदालत ने स्पष्ट किया कि संरक्षित क्षेत्रों को नुकसान पहुंचाने पर वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई होगी। अदालत ने कहा कि वन, खनन, जल संसाधन और पुलिस विभाग के अधिकारी यदि अवैध खनन रोकने में असफल रहते हैं तब उन्हें भी जिम्मेदार माना जा सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि सभी पक्षों के जवाब मिलने के बाद आगे के निर्देश जारी किए जाएंगे।

इसके साथ ही अदालत के कार्यालय को निर्देश दिया गया कि वह तीन राज्यों के मुख्य सचिवों, पुलिस महानिदेशकों, खनन, वन और जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को इस मामले में पक्षकार बनाए।

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First Published - March 20, 2026 | 11:02 PM IST

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