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NEET-UG री-एग्जाम से पहले Telegram पर एक हफ्ते की रोक, ऐप स्टोर से भी हटाया गया

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NTA के अनुरोध पर इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगा दी

Last Updated- June 16, 2026 | 10:51 PM IST
Telegram Ban India
फोटो: कैनवा

सरकार ने 21 जून को दोबारा होने वाली राष्ट्रीय पात्रता-सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) से पहले मेसेजिंग ऐप टेलीग्राम को आज तत्काल ब्लॉक करने का आदेश दिया। 22 जून तक टेलीग्राम पर रोक यह सुनिश्चित करने के लिए लगाई गई है कि परीक्षा बिना किसी गड़बड़ी के हो।

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के अनुरोध पर इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगा दी। आईटी अधिनियम की धारा 69ए सरकार को किसी ऐप, वेबसाइट या किसी भी इंटरनेट सेवा तक पहुंच को ब्लॉक करने की आपातकालीन शक्तियां प्रदान करती है।

आईटी मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि सरकार के बार-बार अनुरोध किए जाने और मेसेजिंग मध्यस्थ को सार्वजनिक तथा निजी समूहों को प्रतिबंधित करने की चेतावनी के बाद टेलीग्राम को प्रतिबं​धित किया गया है। असल में कुछ सार्वजनिक और निजी समूहों (प​ब्लिक और प्राइवेट ग्रुप) के जरिये नीट परीक्षा समेत कई परीक्षाओं के प्रश्न-पत्र लगातार लीक हो रहे थे।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि टेलीग्राम ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा 2026 नीट प्रश्न पत्र लीक करने के आरोप में पकड़े गए व्यक्तियों के मेसेजिंग खातों का विवरण साझा करने से भी इनकार कर दिया था।

अधिकारी ने कहा, ‘हालांकि यह समस्या का अल्पकालिक समाधान है। हमने कंपनी (टेलीग्राम) के प्रतिनिधि से कहा है कि यदि यह समस्या बनी रहती है तो उन्हें कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें पूर्ण प्रतिबंध भी शामिल है।’

टेलीग्राम के संस्थापक पॉवल डुरोव ने कहा कि मेसेजिंग ऐप पर प्रतिबंध लगाने का सरकार का फैसला भारत में 15 करोड़ से ज्यादा उपयोगकर्ताओं को दंडित करना है, न कि उन अंदर के लोगों को जिन्होंने परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक किया।

डुरोव ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘भारत के आईटी मंत्रालय ने एक हफ्ते के लिए टेलीग्राम पर पाबंदी लगा दी क्योंकि कुछ उपयोगकर्ताओं ने लीक हुए परीक्षा के प्रश्न पत्र साझा किए थे। इससे भारत में टेलीग्राम के 15 करोड़ से ज्यादा आम उपयोगकर्ताओं को सजा मिली है, न कि उन लोगों को जिन्होंने प्रश्न पत्र लीक किया था। और इस प्रतिबंध से कुछ भी नहीं रुका। लीक बस दूसरे ऐप पर चली गई।’

भारत में टेलीग्राम की उपलब्धता पर रोक लगाने के आदेश दूरसंचार कंपनियों के साथ-साथ इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को भी भेजे गए हैं, जिनसे 11 अन्य आईपी ऐड्रेस के अलावा दो यूआरएल  टेलीग्रामडॉटओआरजी और टीडॉटमी को ब्लॉक करने के लिए कहा गया है। टेलीग्राम के भारत में करोड़ों उपयोगकर्ताओं में प्रीमियम या भुगतान वाले खाते भी शामिल हैं जिन्हें बेहतर सेवाएं प्रदान की जाती हैं। उपयोगकर्ताओं की संख्या के हिसाब से भारत टेलीग्राम के शीर्ष 5 बाजारों में से एक है।

मंत्रालय द्वारा नोटिस जारी किए जाने से अवगत अधिकारियों ने कहा कि दिन में ही इसकी तामील करा दी गई और ब्लॉक के बाद टेलीग्राम ऐप उपयोग के लिए अनुपलब्ध था।

सूत्रों के मुताबिक दूरसंचार कंपनियों के अलावा ऐपल और गूगल को भी अपने-अपने ऐप स्टोर से टेलीग्राम हटाने के लिए नोटिस भेजे गए थे ताकि जब तक प्रतिबंध लागू रहे तब तक भारत में इस ऐप को डाउनलोड ही न किया जा सके।

इस बारे में जानकारी के लिए टेलीग्राम, रिलायंस जियो, भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया, ऐपल और गूगल को ईमेल किया गया मगर खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं आया।

एनटीए ने कहा कि पूरे भारत में 22 जून तक टेलीग्राम के इस्तेमाल पर रोक लगाने और 30 जून तक इसके मेसेज-एडिटिंग सुविधा को बंद करने के केंद्र के निर्देश, एजेंसी और उच्च शिक्षा विभाग की सिफारिशों के बाद जारी किए गए। इस अस्थायी रोक में परीक्षा का दिन और उसके अगले दिन शामिल हैं जबकि संदेश को संपादित करने पर रोक का मकसद प्रश्न पत्र लीक के झूठे सबूत गढ़ने से रोकना है।

एजेंसी ने एक बयान में कहा, ‘एनटीए भारत में टेलीग्राम के संबंध में आज जारी किए गए निर्देशों का स्वागत करता है। ये निर्देश सोच-समझकर और एक निश्चित समयसीमा के भीतर लागू किए गए हैं।’

एनटीए ने कहा कि यह कार्रवाई उन धोखाधड़ी करने वाले गिरोहों के खिलाफ की गई है जो दोबारा परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों को निशाना बनाने के लिए टेलीग्राम का संगठित रूप से इस्तेमाल कर रहे थे। एजेंसी ने कहा कि गृह मंत्रालय के तहत आने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) ने एनटीए, राज्य पुलिस बलों और आईटी मंत्रालय के साथ मिलकर उन टेलीग्राम चैनलों, ग्रुपों और बॉट को हटाने का काम किया है जो कथित तौर पर परीक्षा के प्रश्न पत्र तक धोखाधड़ी से पहुंच दिलाने का प्रचार कर रहे थे।

एनटीए ने कहा कि टेलीग्राम पर पाबंदी तब लगाई गई जब समस्या के बड़े दायरे को देखते हुए एक-एक करके चैनल हटाने की कोशिशें नाकाफी साबित हुईं। एजेंसी ने इन उपायों को अंतिम विकल्प बताया और कहा कि इन्हें इस तरह से तय किया गया था कि अभ्य​र्थियों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कम से कम जरूरी पाबंदियां ही लगाई जाएं।

एजेंसी ने आरोप लगाया कि ‘पेपर लीक्ड नीट’, ‘री-नीट 2026’ और इसी तरह के नामों से खुलेआम चल रहे कई टेलीग्राम चैनलों ने छात्रों और उनके परिवारों से परीक्षा का प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने का दावा करते हुए पैसों की मांग की थी। एनटीए ने दोहराया कि कोई भी प्रश्न पत्र उपलब्ध नहीं था और उसने ऐसे सभी दावों को धोखाधड़ी बताया।

इसमें यह भी कहा गया है कि हाल की परीक्षाओं में टेलीग्राम की संदेश-संपादन सुविधा का दुरुपयोग किया गया था। एनटीए के अनुसार एडमिन मूल टाइमस्टैम्प को बनाए रखते हुए पुराने संदेशों को संपादित कर सकते हैं और संलग्न फाइलों को बदल सकते हैं, जिससे यह आभास होता है कि परीक्षा से पहले प्रश्न पत्र साझा किए गए थे। संपादन को अक्षम करने का निर्देश परीक्षा के बाद हेरफेर को रोकने का प्रयास है।

एनटीए ने कहा, ‘हाल ही में हुई कई परीक्षाओं के मामले में, इस तरीके का इस्तेमाल करके परीक्षा के बाद ‘पेपर लीक’ होने के झूठे सबूत गढ़े गए हैं। इसमें चैनल का एडमिन परीक्षा होने के बाद किसी पुराने, सामान्य संदेश में असली प्रश्न-पत्र डाल देता है और फिर उस चैट को इस ‘सबूत’ के तौर पर फैलाया जाता है कि परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र लीक हो गया था। आईटी मंत्रालय का यह निर्देश परीक्षा के बाद झूठ फैलाने वाले इस तरह की धोखाधड़ी वाले हथकंडे का रास्ता बंद करता है।’

एजेंसी ने टेलीग्राम चैनलों के जरिये परीक्षा से जुड़ी कथित धोखाधड़ी के मामले में राज्य अधिकारियों की कार्रवाई का जिक्र किया, जिसमें बिहार पुलिस का परामर्श और अहमदाबाद सिटी साइबर क्राइम ब्रांच की गिरफ्तारियां शामिल हैं।

टेलीग्राम पर लगाए गए एक हफ्ते की पाबंदी की विशेषज्ञों ने कड़ी आलोचना की। उन्होंने बताया कि आईटी कानून की धारा 69ए और इसके तहत बने 2009 के ब्लॉक करने के नियमों के अनुसार सरकार किसी कंप्यूटर संसाधन पर मौजूद खास ‘जानकारी’ तक पहुंच को ब्लॉक कर सकती है।

इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने एक्स पर कहा कि इन अधिकारों के तहत मध्य​स्थ पर पूरी तरह से पाबंदी नहीं लगाई जा सकती और न ही किसी कंपनी को यह आदेश दिया जा सकता है कि वह किसी देश के लिए अपने उत्पाद से कोई सुविधा हटाकर उसे फिर से डिजाइन करे।

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First Published - June 16, 2026 | 10:43 PM IST

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