भारत के असंगठित गैर कृषि क्षेत्र में एक साल में 75 लाख श्रमिक शामिल हुए हैं, जिसमें निर्माण व कॉरपोरेट एंटरप्राइज शामिल नहीं हैं। इस क्षेत्र में 2025 में 12.81 करोड़ लोगों को रोजगार मिला, जबकि इसके पहले के साल में 12.06 करोड़ लोगों को रोजगार मिला था।
बुधवार को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी असंगठित क्षेत्र उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण (एएसयूएसई) 2025 की परिचालन और आर्थिक विशेषताओं के अनुसार विभिन्न राज्यों के कुछ क्षेत्रों में विकास अब भी असमान बना हुआ है।
रिपोर्ट से पता चलता है कि 2025 में उत्तर प्रदेश की इस क्षेत्र के प्रतिष्ठानों में हिस्सेदारी 13.8 प्रतिशत और इस क्षेत्र में काम करने वालों की हिस्सेदारी 14.5 प्रतिशत थी, जो सबसे अधिक है। पश्चिम बंगाल 13.2 प्रतिशत प्रतिष्ठानों और 104 प्रतिशत श्रमिकों के साथ दूसरे स्थान पर है। वहीं महाराष्ट्र 8.3 प्रतिशत प्रतिष्ठानों व 9.1 प्रतिशत श्रमिकों के साथ तीसरे स्थान पर है।
गैर कृषि असंगठित क्षेत्र के कुल प्रतिष्ठानों में इन 3 राज्यों की हिस्सेदारी मोटे तौर पर 35 प्रतिशत है। लेकिन रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि आकार के मुताबिक ताकत नहीं है। महाराष्ट्र और तमिलनाडु अपने प्रतिष्ठान की संख्या की तुलना में मूल्य में अधिक योगदान करते हैं। महाराष्ट्र का सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) में हिस्सेदारी 11.2 प्रतिशत थी, जबकि तमिलनाडु की हिस्सेदारी 8.2 प्रतिशत थी।
देश के सकल मूल्यवर्धन में 11.7 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ उत्तर प्रदेश सबसे अधिक योगदान करने वालाराज्य बना हुआ है। वहीं शहरी इलाकों के जीवीए में महाराष्ट्र की सबसे अधिक हिस्सेदारी है, उसके बाद उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु का स्थान है।
अगर राज्यों के बीच डिजिटल विभाजन की स्थिति देखें तो एक और महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष निकलता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उद्यमशीलता की गतिविधियों में इंटरनेट का उपयोग अखिल भारतीय स्तर पर तेजी से बढ़ा है और दिल्ली, हरियाणा और असम जैसे राज्यों में डिजिटल स्वीकार्यता की दर सबसे ज्यादा है।
इंटरनेट की स्वीकार्यता के मामले में 71.1 प्रतिशत के साथ दिल्ली पहले स्थान पर है। उत्तर प्रदेश (18.7 प्रतिशत), पश्चिम बंगाल (25.7 प्रतिशत) निचले स्तर पर हैं। डिजिटल रूप से जुड़े और नहीं जुड़े राज्यों के बीच का अंतर से उत्पादकता के अंतर का भी पता चलता है। दिल्ली, हरियाणा और तमिलनाडु की राष्ट्रीय स्तर पर प्रति प्रतिष्ठान और प्रति श्रमिक जीवीए सबसे अधिक है।