नेपाल में कुछ महीने पहले जेन ज़ी के सरकार विरोधी प्रदर्शनों का चेहरा बन कर उभरे बालेंद्र शाह 27 मार्च को देश के प्रधानमंत्री बनाए गए हैं। हालांकि विरोध प्रदर्शनों की तात्कालिक वजह सोशल मीडिया कंपनियों पर सरकार का प्रतिबंध लगाने का फैसला था, लेकिन बेरोजगारी, बाहर से आने वाले पैसे पर अत्यधिक निर्भरता और दूसरे देशों को लगातार पलायन जैसे आर्थिक मुद्दों पर भी युवा मुखर होते गए। बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली नई सरकार को इन समस्याओं का समाधान करना होगा।
विश्व बैंक के अनुसार 2024 में व्यक्तिगत तौर पर बाहर से भेजा जाने वाला धन नेपाल के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 26.2 फीसदी था जो 2017 के बाद सबसे अधिक है। इसके अलावा 2022-23 में नेपाल के 76.8 फीसदी परिवारों को विदेश से पैसा प्राप्त हुआ, जो 2010-11 में लगभग 55.8 फीसदी से अधिक है। यह विदेश से आने वाला पैसा संबंधित परिवारों की कुल आय का एक-तिहाई था। विशेष यह कि 2022-23 में विदेशों से आने वाले कुल पैसे में भारत से भेजी जाने वाली रकम की हिस्सेदारी 21 फीसदी से अधिक थी।
हाल के वर्षों में नेपाल की आबादी के करीब 2.5 फीसदी लोगों को विदेश में काम करने का परमिट मिला, जो 2009-10 के बाद सबसे अधिक है। वर्ष 2021 में नेपाल की लगभग 8 फीसदी आबादी बाहर रहती थी, जो 2001 में 3.2 फीसदी (जनगणना के दौरान अनुपस्थित आबादी का आंकड़ा) से अधिक है। वित्त वर्ष 2022-23 में नेपाल में युवा बेरोजगारी दर 22.7 फीसदी थी, जो राष्ट्रीय बेरोजगारी दर 12.6 फीसदी से लगभग दोगुनी थी। ऐसे हालात तब हैं जब युवाओं में श्रम बल भागीदारी दर केवल 26.5 फीसदी और राष्ट्रीय स्तर पर यह 37.1 फीसदी दर्ज की गई।