बांग्लादेश 26 मार्च को अपना 56वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। हालांकि विश्व बैंक ने जुलाई 2015 में इस देश को निम्न-आय से निम्न-मध्यम-आय की श्रेणी में रखा था, लेकिन पिछले 2-3 वर्षों से यह कम विकास दर, उच्च मुद्रास्फीति और स्थिर निर्यात वृद्धि का सामना कर रहा है। भारत के इस पड़ोसी देश में समय-समय पर राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने वाली घटनाएं भी मुश्किलें पैदा कर रही हैं। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) प्रमुख तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार के सामने ऐसे समय कई चुनौतियां हैं जब देश अपनी आजादी का जश्न मनाने की तैयारी कर रहा है।
वित्त वर्ष 16 से 19 तक बांग्लादेश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई। इसके बाद कोविड महामारी आ गई और उस दौरान अर्थव्यवस्था डगमगा गई तथा जीडीपी में गिरावट दर्ज की गई। विकास दर में सुधार तो हुआ, लेकिन वित्त वर्ष 22 के बाद से इसमें भी लगातार गिरावट आ रही है और वित्त वर्ष 25 में यह 3.5 फीसदी पर आ गई। इसके अलावा, प्रति व्यक्ति आय भी वित्त वर्ष 22 में 2793 डॉलर से घटकर वित्त वर्ष 24 में 2738 डॉलर रह गई, जबकि वित्त वर्ष 25 में यह 2769 तक बढ़ी।
वित्त वर्ष 16 में मुद्रास्फीति दर 5.92 फीसदी थी, जो वित्त वर्ष 21 तक 6 फीसदी से नीचे रही। इसके बाद वित्त वर्ष 22 में यह 6.15 फीसदी हुई। हालांकि, पिछले तीन वर्षों में कीमतें बढ़ी हैं और मुद्रास्फीति का स्तर वित्त वर्ष 25 में 10 फीसदी से अधिक तक पहुंच गया। बांग्लादेश का व्यापार घाटा वित्त वर्ष 16 में 15.78 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 22 में 50.62 अरब डॉलर हो गया, इससे पहले वित्त वर्ष 24 में 27.3 अरब डॉलर तक गिर गया था। हालांकि, वित्त वर्ष 25 में निर्यात में गिरावट के कारण व्यापार घाटा दोबारा बढ़कर वित्त वर्ष 25 में 38.19 अरब डॉलर हो गया।