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ट्रंप को तगड़ा झटका! अमेरिकी कोर्ट ने रद्द किया 10% वैश्विक शुल्क, भारत के साथ व्यापार समझौते पर संकट

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अमेरिकी अदालत ने ट्रंप के 10% वैश्विक शुल्क को रद्द कर दिया है, जिससे भारत और अमेरिका के बीच होने वाले द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर अनिश्चितता बढ़ गई है

Last Updated- May 08, 2026 | 9:51 PM IST
US President Donald Trump on US Iran War
अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप | फाइल फोटो

अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय ने राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 122 के तहत लगाया गया 10 प्रतिशत वैश्विक शुल्क बुधवार को रद्द कर दिया। यह फैसला 20 फरवरी को टैरिफ लागू होने के 50 दिनों से भी कम समय में आया है। इस फैसले से अमेरिका के शुल्क को लेकर अनिश्चितता और बढ़ सकती है, जिससे भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के निष्कर्ष पर असर पड़ सकता है।

उच्चतम न्यायालय में जवाबी शुल्क को लेकर जंग हारने के बाद ट्रंप प्रशासन ने धारा 122 का इस्तेमाल किया था, जिसमें भुगतान संतुलन की कठिनाइयों से निपटने के लिए राष्ट्रपति को अधिकतम 150 दिन तक 15 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया है, जिसके लिए कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत नहीं होती है।

बहरहाल बुधवार को 3 न्यायधीशों के पीठ ने 2-1 के फैसले से छोटे व्यवसायों के एक समूह और मुख्य रूप से डेमोक्रेट के नेतृत्व वाले दो दर्जन राज्यों के अनुरोध को स्वीकार कर टैरिफ रद्द कर दिया।  फिलहाल अदालत ने मुकदमा दायर करने वाली उन 2 कंपनियों और वाशिंगटन राज्य के खिलाफ टैरिफ लागू करने से प्रशासन को तुरंत रोक दिया है।  

गुरुवार के अदालती फैसले में कहा गया कि ट्रंप द्वारा फरवरी के आदेश में उल्लिखित व्यापार घाटे के प्रकार के लिए यह कानून उपयुक्त कदम नहीं था। ट्रंप प्रशासन ने तर्क दिया था कि 1.2 लाख करोड़ डॉलर के वार्षिक अमेरिकी वस्तु व्यापार घाटे और सकल घरेलू उत्पाद के 4 प्रतिशत चालू खाते के घाटे के रूप में एक गंभीर भुगतान संतुलन घाटा हो गया है।

ट्रंप ने व्यापार अदालत के फैसले को ‘दो कट्टरपंथी वामपंथी न्यायाधीशों’ का नतीजा बताया। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘इसलिए, अदालत के फैसलों से मुझे कोई आश्चर्य नहीं होता।’ उन्होंने कहा, ‘हमें एक फैसला मिलता है और हम इसे दूसरे तरीके से करते हैं।’

दो छोटे कारोबारियों, खिलौना कंपनी बेसिक फन! और मसाला आयातक बर्लैप ऐंड बैरल ने तर्क दिया था कि नए टैरिफ अमेरिका के उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले को दरकिनार करने की कवायद थी, जिसमें रिपब्लिकन राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम के तहत 2025 में लगाए गए शुल्क को रद्द कर दिया गया था।

अमेरिका का न्याय विभाग ट्रेड कोर्ट के ताजा फैसले को यूएस कोल्ट ऑफ अपील में चुनौती दे सकता है, जिसने  शुल्क को लेकर पिछले मुकदमें के दौरान ट्रंप प्रशासन के खिलाफ फैसला सुनाया था। दिल्ली के थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारत को अमेरिका के अधिक स्थिर और कानूनी रूप से विश्वसनीय व्यापार प्रणाली विकसित करने तक बीटीए पर अंतिम फैसले को लेकर इंतजार करना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘अमेरिकी शुल्क नीति को लेकर लगातार अनिश्चितता, ट्रंप प्रशासन के शुल्क के फैसलों को अदालत द्वारा बार बार रद्द किए जाने से भारत के किसी भी दीर्घकालीन व्यापार प्रतिबद्धता को उचित ठहराना मुश्किल हो जाएगा।  इस समय अमेरिका भी अपने मानक मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) के तहत शुल्क कम करने को तैयार नहीं है, जबकि वह भारत से अधिकांश क्षेत्रों में शुल्क कम या समाप्त करने की अपेक्षा कर रहा है। ऐसी परिस्थितियों में किसी भी व्यापार समझौते के एकतरफा होने का जोखिम है, जिसमें भारत को बिना किसी सार्थक टैरिफ लाभ के बदले स्थायी बाजार पहुंच रियायतें देनी होंगी।’

भारत के मुख्य व्यापार वार्ताकार दर्पण जैन के नेतृत्व में वाशिंगटन की 4 दिवसीय यात्रा के बाद वाणिज्य विभाग ने एक बयान में कहा कि दोनों पक्षों ने एक अंतरिम व्यापार समझौते के विवरण को अंतिम रूप देने और एक व्यापक बीटीए पर बातचीत को आगे बढ़ाने में प्रगति की है।

‘रचनात्मक और सकारात्मक भावना से बैठकें हुईं। इसमें सार्थक और दूरगामी हितों पर चर्चा हुई, जिससे प्रमुख मुद्दों पर प्रगति संभव हुई। दोनों पक्षों ने इस गति को बनाए रखने के लिए  काम करने सहमति व्यक्त की।’

(साथ में एजेंसियां)

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First Published - May 8, 2026 | 9:42 PM IST

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