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Brookfield का बड़ा दांव: भारत में निवेश 4 गुना बढ़ाकर 100 अरब डॉलर करने की योजना, फोकस में इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल सेक्टर

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पिछले 15 वर्षों में ब्रुकफील्ड भारत के सबसे बड़े विदेशी निवेशकों में से एक के रूप में उभरी है।

Last Updated- May 22, 2025 | 11:38 PM IST
Brookfield

ब्रुकफील्ड ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी भारत में अगले पांच वर्षों में अपना निवेश मौजूदा 30 अरब डॉलर से बढ़ाकर 100 अरब डॉलर करने की योजना बना रही है। ब्रुकफील्ड ऐसेट मैनेजमेंट के प्रेसिडेंट कोनोर टेस्की ने आज कहा कि यह उसकी वैश्विक प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों को दोगुना करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। न्यूयॉर्क की यह कंपनी नवीकरणीय ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, निजी इक्विटी, रियल एस्टेट और ऋण में 1 लाख करोड़ डॉलर से अधिक की परिसंप​त्ति की देखरेख करती है। कंपनी को उम्मीद है कि उसकी प्रबंधन के अधीन कुल परिसंप​त्तियां (एयूएम) 2 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएंगी।

टेस्की ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि अगले 5 वर्षों में हमारा वैश्विक कारोबार दोगुने से भी अधिक हो जाएगा।’ उन्होंने कहा, ‘भारत जैसे उच्च वृद्धि वाले क्षेत्रों में अनुकूल परिस्थितियां और अपार अवसर हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि भारत में हमारा निवेश निकट भविष्य में 100 अरब डॉलर का हो जाएगा।’

पिछले 15 वर्षों में ब्रुकफील्ड भारत के सबसे बड़े विदेशी निवेशकों में से एक के रूप में उभरी है। इसने बुनियादी ढांचे और रियल एस्टेट में 12-12 अरब डॉलर, अक्षय ऊर्जा में 3 अरब डॉलर का निवेश किया ​है और अपनी निजी इक्विटी और विशेष निवेश इकाई के माध्यम से 3.6 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश किया है।

ब्रुकफील्ड के भारत पोर्टफोलियो में देश की सबसे लंबी निजी तौर पर संचालित क्रॉस-कंट्री गैस पाइपलाइन कृष्णा गोदावरी बेसिन शामिल है। कंपनी ने इसे रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी परिवार से हासिल किया था। ब्रुकफील्ड ने रिलायंस जियो के टावर कारोबार में बहुलांश हिस्सेदारी का भी अधिग्रहण किया है जिसके बाद वह भारत में लगभग 2.57 लाख टावरों के साथ दुनिया की दूसरे सबसे बड़े दूरसंचार टावर प्लेटफॉर्म संचालक बन गई है।

ब्रुकफील्ड ​ने भारत में हाइपरस्केल डेटा सेंटर विकसित करने के लिए डिजिटल रियल्टी ट्रस्ट और रिलायंस के साथ साझेदारी की है। कंपनी की योजना चेन्नई और मुंबई में 160 मेगावाट क्षमता का डेटा सेंटर बनाना है।

टेस्की ने कहा, ‘हमारा वैश्विक ध्यान 3 दीर्घकालिक संरचनात्मक रुझान- डीकार्बोनाइजेशन, डिजिटलाइजेशन और डीग्लोबलाइजेशन से जुड़ा है।’
भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और व्यापार तनावों के बावजूद टेस्की ने कहा कि ब्रुकफील्ड अपने विविध वैश्विक पोर्टफोलियो और क्षेत्र विस्तार के कारण अपेक्षाकृत सुरक्षित बना हुआ है। उन्होंने कहा कि ब्रुकफील्ड की रणनीति उन क्षेत्रों में परिचालन विशेषज्ञता के साथ-साथ बड़े पैमाने पर पूंजी लगाने की है ज​हां ये तीनों विषय हैं।

टेस्की ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव से भारत को काफी फायदा मिला है। उन्होंने कहा, ‘ब्रुकफील्ड में हम उच्च गुणवत्ता वाली वास्तविक संपत्तियों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। हम आम तौर पर ऐसे बुनियादी ढांचे में निवेश करते हैं जो वस्तुओं की आवाजाही या प्रसंस्करण में मदद करती है।’

उदाहरण के लिए डिजिटल क्षेत्र में ब्रुकफील्ड डेटा सेंटर, दूरसंचार टावर और फाइबर नेटवर्क क्षेत्र की प्रमुख निवेशक है। कमोडिटी और ऊर्जा क्षेत्रों में इसने मिडस्ट्रीम इन्फ्रास्ट्रक्चर, बिजली उत्पादन और पारेषण में निवेश किया है। टेस्की ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि घरेलू मांग और वै​श्विक व्यापार में एकीकरण के कारण भारत में इस तरह के बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास जारी रहेगा।’

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First Published - May 22, 2025 | 10:47 PM IST

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