Crude Oil Prices: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव में राहत की उम्मीद ने वैश्विक तेल बाजार को बड़ा झटका दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के इस दावे के बाद कि ईरान के साथ समझौता लगभग तय हो चुका है, Crude Oil की कीमतों में जोरदार गिरावट देखने को मिली। समझौते की खबर आते ही तेल बाजार में बिकवाली बढ़ गई। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत करीब 4.74 फीसदी गिरकर 80.86 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। वहीं, ब्रेंट क्रूड भी लगभग 4 फीसदी टूटकर 83.85 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। पिछले कुछ महीनों में तेल की कीमतों में यह सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जा रही है।
डॉनल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कई पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो चुका है। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया और कहा कि इससे पूरे क्षेत्र में स्थिरता आएगी। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बिना किसी रुकावट के खोलने की मंजूरी दे दी गई है और समुद्री प्रतिबंधों को भी हटा लिया जाएगा। अपने अंदाज में उन्होंने कहा, “दुनिया के जहाज अपने इंजन चालू करें और तेल को बहने दें।”
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है। पिछले कई सालों से यह इलाका ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव का केंद्र रहा है। ऐसे में अगर यह रास्ता पूरी तरह सुरक्षित और खुला रहता है, तो वैश्विक तेल सप्लाई में सुधार होगा और बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ेगी। यही वजह है कि समझौते की खबर के बाद तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई।
इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने भी संकेत दिए हैं कि इस समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो यह पश्चिम एशिया की राजनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार, दोनों के लिए एक बड़ा घटनाक्रम माना जाएगा।
Crude Oil की कीमतों में गिरावट और क्षेत्रीय तनाव कम होने की उम्मीद का असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर भी देखने को मिला। अमेरिका में डॉव फ्यूचर्स करीब 400 अंक चढ़ गए, जबकि नैस्डैक फ्यूचर्स में 485 अंकों की बढ़त दर्ज की गई। एसएंडपी 500 फ्यूचर्स भी मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे। इससे पहले वॉल स्ट्रीट में भी लगातार दूसरे दिन तेजी रही थी और प्रमुख अमेरिकी सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए थे।
अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद ने एशियाई बाजारों का भी माहौल बेहतर कर दिया। जापान का निक्केई इंडेक्स 5 फीसदी से ज्यादा उछल गया और लगातार तीसरे दिन बढ़त के साथ बंद हुआ। वहीं, दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स भी करीब 5.75 फीसदी चढ़ा। निवेशकों को उम्मीद है कि अगर क्षेत्रीय तनाव कम होता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार को भी इसका फायदा मिलेगा।