Ebola outbreak: अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के पूर्वी हिस्से में इबोला संक्रमण एक बार फिर तेजी से फैल रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 26 मई तक देश में 121 कंफर्म केस और 17 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। वहीं संदिग्ध मामलों की संख्या बढ़कर 1,077 तक पहुंच गई है, जबकि संदिग्ध मौतों का आंकड़ा 238 बताया गया है। इटुरी प्रांत में अकेले 16 नए कंफर्म केस सामने आए हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एडहानोम घेब्रेयेसस ने चेतावनी दी है कि पूर्वी कांगो इस समय युद्ध और बीमारी के “खतरनाक टकराव” का सामना कर रहा है। लगातार हिंसा और विस्थापन के कारण संक्रमण को रोकना और मरीजों को अलग करना बेहद मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि जब तक गोलीबारी जारी है, तब तक समुदायों का भरोसा जीतना और संक्रमित लोगों को आइसोलेट करना लगभग असंभव है।
पूर्वी कांगो में फैली अस्थिरता ने स्वास्थ्य व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। संपर्क ट्रेसिंग कमजोर हो गई है, लैब रिपोर्ट आने में देरी हो रही है और सुरक्षा उपकरणों की कमी बनी हुई है। साथ ही आइसोलेशन सेंटर स्थापित करने में भी लगातार बाधाएं आ रही हैं।
कांगो सरकार ने अमेरिका में विकसित एक प्रयोगात्मक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी उपचार तक पहुंच की आधिकारिक मांग की है। यह दवा इबोला के ज़ैरे, सूडान और बुंडिबुग्यो स्ट्रेन पर असर दिखा चुकी है। स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार इसे संभवतः क्लीनिकल ट्रायल के जरिए मरीजों पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस बार फैल रहा इबोला का बुंडिबुग्यो स्ट्रेन खास चिंता का विषय है क्योंकि इसके लिए अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन या इलाज उपलब्ध नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि देरी से पहचान होने के कारण वायरस तेजी से फैल रहा है और अब यह पड़ोसी युगांडा तक भी पहुंच सकता है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक यह प्रकोप अब इटुरी, नॉर्थ किवु और साउथ किवु प्रांतों के 13 स्वास्थ्य क्षेत्रों तक फैल चुका है। नॉर्थ किवु के ओइचा और कलुंगुता क्षेत्रों में भी नए केस सामने आए हैं।
इस बीच राहत की एक छोटी खबर यह है कि वर्तमान प्रकोप का पहला मरीज ठीक होकर अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार यह एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
संक्रमण को रोकने के लिए सीमाओं और चेकपॉइंट्स पर निगरानी बढ़ा दी गई है। 26 मई को ही 15,500 से अधिक यात्रियों की स्क्रीनिंग की गई। वहीं केन्या ने भी अपने प्रवेश बिंदुओं पर 55,000 से अधिक यात्रियों की जांच की है और संदिग्ध मामलों की टेस्टिंग की गई, जिनमें सभी नकारात्मक पाए गए हैं।