अप्रैल के मध्य में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे मुंग की भारत यात्रा के दौरान पोत तैयार करने के क्षेत्र में सहयोग गहरा करने की बात केंद्र में रहेगी। दरअसल भारत और दक्षिण कोरिया दोनों ने पश्चिम एशिया में चल रही लड़ाई से सबक लिए हैं जिसने वाणिज्यिक परिवहन की अहमियत को केंद्र में ला दिया है। दोनों देश सेमीकंडक्टर और स्माल मॉडुलर रिएक्टर (एसएमआर) के क्षेत्र में भी सहयोग मजबूत कर सकते हैं।
ली अगस्त 2025 में अमेरिका गए थे जो दक्षिण कोरिया का एक अहम सहयोगी देश है। इसके अलावा जून 2025 में राष्ट्रपति बनने के बाद से वह केवल पड़ोसी जापान और चीन देशों की यात्रा पर ही गए हैं। ऐसे में उनका भारत आगमन दोनों देशों के रिश्तों के महत्त्व को रेखांकित करता है।
मात्रा के आधार पर भारत के कुल व्यापार का करीब 95 फीसदी और मूल्य के आधार पर करीब 70 फीसदी हिस्सा समुद्री मार्ग से होता है। मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 का लक्ष्य है कि भारत को 2047 तक दुनिया के शीर्ष 20 जहाज निर्माता देशों में शामिल किया जाए। इसके लिए बंदरगाहों, पोत निर्माण और अंतरर्देशीय जल मार्गां में 3-3.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। इसे हाल ही में घोषित 69,725 करोड़ रुपये के पैकेज का समर्थन हासिल है। इसका उद्देश्य पोत निर्माण को बढ़ावा देना है।
मैरिटाइम अमृत काल विजन 2047, भारत के समुद्री पुनरुत्थान के लिए एक दीर्घकालिक रोडमैप है, जिसमें लगभग 80 लाख करोड़ रुपये का निवेश शामिल है। इसका लक्ष्य 2047 तक शीर्ष पांच स्थान हासिल करना है। एक अधिकारी ने बताया कि सरकार ने अपने वाणिज्यिक बेड़े को 1,550 से बढ़ाकर 2,500 जहाज करने का इरादा घोषित किया है ताकि आत्मनिर्भरता को मजबूत किया जा सके। इस प्रयास में, भारत दक्षिण कोरिया को एक मजबूत साझेदार मानता है, क्योंकि दक्षिण कोरिया के पास उन्नत पोत निर्माण तकनीक और ‘उच्च गुणवत्ता विनिर्देशों वाले विश्वसनीय और समय पर पोत निर्माण’ का अनुभव है। भारत अपने तटीय राज्यों में एकीकृत पोत निर्माण क्लस्टरों के विकास को भी तेजी से आगे बढ़ा रहा है।
एक अधिकारी ने बताया कि दक्षिण कोरिया पोत निर्माण में प्रिसीजन इंजीनियरिंग, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) विशेषज्ञता और अत्यधिक कुशल उत्पादन प्रणालियों के क्षेत्र में योग्यता रखता है और ये भारत के लिए मददगार साबित हो सकता है। फिलहाल भारत पोत निर्माण में जिन दक्षिण कोरियाई कंपनियों के साथ काम कर रहा है उनमें हनह्वा ओशन और एचडी हुंडै शामिल हैं। गत जुलाई में एचडी हुंडै ने सरकारी कंपनी कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के साथ पोत निर्माण में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने वाले एक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह पहला मौका है जब किसी कोरियाई पोत निर्माण कंपनी ने किसी भारतीय कंपनी के साथ साझेदारी की है।
इसके तहत भारत को न केवल महत्त्वपूर्ण कौशल मिलेगा बल्कि नए पोत निर्माण क्लस्टरों की स्थापना, पोत निर्माण के लिए आपूर्ति श्रृंखला तंत्र का निर्माण और वैश्विक ऑर्डर बुक में भारत की भागीदारी का भी विस्तार होगा। इसके बदले भारत एक बड़ा पोत निर्माण बाजार, कुशल श्रमिक और लागत प्रतिस्पर्धा मुहैया कराएगा। एक संयुक्त प्रौद्योगिकी केंद्र स्थापित करने पर चर्चा हो रही है। सरकार उन चुनौतियों को आसान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है जिनका सामना विदेशी पोत निर्माताओं को भारतीय बाजार में प्रवेश करते समय करना पड़ सकता है।