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EU ले सकता है बड़ा फैसला! होर्मुज की ओर भेज सकता है रेड सी नेवल मिशन

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यूरोपीय यूनियन का यह मिशन ‘एस्पाइड्स’ नाम से जाना जाता है। इसे साल 2024 में तब शुरू किया गया था जब हूती विद्रोहियों ने रेड सी में जहाजों पर हमले शुरू किए थे।

Last Updated- March 16, 2026 | 4:29 PM IST
EU naval mission
Representational Image

यूरोपीय यूनियन (EU) की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने सदस्य देशों से कहा है कि रेड सी में चल रहे यूरोपीय नौसैनिक मिशन को होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल करने पर विचार किया जा सकता है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को ईयू के विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले कल्लास ने कहा कि अगर क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करनी है तो पहले से मौजूद मिशन का उपयोग करना सबसे आसान तरीका हो सकता है।

यूरोपीय यूनियन का यह मिशन ‘एस्पाइड्स’ नाम से जाना जाता है। इसे साल 2024 में तब शुरू किया गया था जब हूती विद्रोहियों ने रेड सी में जहाजों पर हमले शुरू किए थे। अब अधिकारी इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या इस मिशन को होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर मोड़ा जा सकता है। यह समुद्री मार्ग अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद से लगभग बंद हो गया है।

ऊर्जा आपूर्ति पर असर से यूरोप चिंतित

होर्मुज में बाधा के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल बढ़ गई है। इससे तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। यूरोपीय देशों को चिंता है कि इससे महंगाई बढ़ सकती है, आर्थिक वृद्धि धीमी हो सकती है और खाद्य आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है। दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है। कल्लास ने कहा कि यूरोपीय देश एक और विकल्प पर भी विचार कर रहे हैं, जिसे उन्होंने “इच्छुक देशों का गठबंधन” कहा।

Also Read: होर्मुज के लिए ट्रंप ने मांगी मदद, ब्रिटेन-जापान-ऑस्ट्रेलिया ने भेजने से मना किए युद्धपोत

ट्रंप ने सहयोगियों पर बनाया दबाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप भी अन्य देशों पर होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने में मदद करने के लिए दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई देश इस समुद्री मार्ग पर निर्भर हैं, इसलिए उन्हें भी इसकी सुरक्षा में योगदान देना चाहिए। ट्रंप ने नाटो सहयोगियों को भी चेतावनी दी कि अगर वे अमेरिका की मदद नहीं करते हैं तो गठबंधन का भविष्य कमजोर हो सकता है।

यूरोपीय देशों की अलग-अलग राय

कुछ यूरोपीय देशों ने इस प्रस्ताव पर सावधानी बरतने की बात कही है। लक्जमबर्ग के विदेश मंत्री जेवियर बेटेल ने कहा कि नाटो का इस्तेमाल तभी किया जाता है जब किसी सदस्य देश पर हमला होता है और अभी ऐसी स्थिति नहीं है। जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वेडेफुल ने भी कहा कि वह होर्मुज में एस्पाइड्स मिशन को बढ़ाने को लेकर संशय में हैं और जर्मनी इस विवाद में शामिल नहीं होगा। इटली भी फिलहाल इस मिशन को होर्मुज जलडमरूमध्य में भेजने के पक्ष में नहीं है, हालांकि उसके एक जहाज पहले से एस्पाइड्स मिशन में तैनात है।

यूरोपीय यूनियन को उम्मीद है कि सदस्य देश या तो मौजूदा एस्पाइड्स मिशन को मजबूत करेंगे या क्षेत्र में अन्य सुरक्षा प्रयासों में योगदान देंगे। फ्रांस ने पहले ही इस मिशन को मजबूत करने के लिए दो अतिरिक्त जहाज भेज दिए हैं।

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First Published - March 16, 2026 | 4:29 PM IST

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