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रूस  के नेतृत्व में अगले माह भारत आएगा यूरेशियन इकनॉमिक फोरम (EAEU) प्रतिनिधिमंडल

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ईएईयू में रूस, कजाखिस्तान, बेलारूस, आर्मीनिया व किर्गिस्तान शामिल हैं। इस ब्लॉक में रूस सबसे बड़ा देश है और भारत का सबसे व्यापारिक साझेदार है

Last Updated- August 27, 2025 | 10:38 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर

रूस के नेतृत्व में यूरेशियन इकनॉमिक फोरम (ईएईयू) का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर चर्चा करने के लिए अगले महीने नई दिल्ली का दौरा करेगा। बातचीत शुरू करने की रूपरेखा को अंतिम रूप दिए जाने की घोषणा के कुछ ही सप्ताह बाद यह प्रतिनिधिमंडल भारत आ रहा है। इस मामले से अवगत एक व्यक्ति ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि दोनों पक्षों का लक्ष्य अगले 18 महीनों में एफटीए पर बातचीत पूरी करना है। उन्होंने कहा कि बातचीत की गति के आधार पर इसके पहले भी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।

ईएईयू में रूस, कजाखिस्तान, बेलारूस, आर्मीनिया व किर्गिस्तान शामिल हैं। इस ब्लॉक में रूस सबसे बड़ा देश है और भारत का सबसे व्यापारिक साझेदार है। ईएईयू देशों के साथ भारत के कुल कारोबार में रूस की हिस्सेदारी 92 प्रतिशत से ज्यादा है।  रूस के नेतृत्व वाले समूह के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते का उल्लेखनीय आर्थिक और रणनीतिक महत्त्व है। खासकर ऐसे समय में, जब भारत के निर्यातकों को अमेरिका के 50 प्रतिशत शुल्क का सामना करना पड़ रहा है। 

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भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार देश अमेरिका के साथ समझौता न होने पाने के बाद मुक्त व्यापार समझौते पर जल्द से जल्द हस्ताक्षर करने की कवायद को अन्य प्रमुख निर्यात बाजारों तक विविधीकरण के कदम के रूप में देखा जा रहा है।  इसके अलावा भूराजनीतिक तनाव भी चल रहे हैं। अमेरिका का मानना है कि भारत द्वारा रूस के तेल की खरीद से यूक्रेन के साथ टकराव में उसे आर्थिक मदद मिल रही है। इसका हवाला देते हुए अमेरिका दबाव बढ़ाने के लिए स्टील पर अतिरिक्त शुल्क लगा रहा है, जिससे रूस के तेल आयात रोकने के लिए भारत पर दबाव बन सके।

ईएईयू के साथ व्यापार समझौते पर पिछले 2 साल से ज्यादा समय से चर्चा चल रही है।  पिछले सप्ताह ही भारत और ईएईयू समूह ने एक उच्च स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल की रूस यात्रा के दौरान वार्ता शुरू करने के लिए वार्ता की विषय वस्तु (टीओआर) पर हस्ताक्षर किए। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि व्यापार समझौते से भारत को रूस के साथ हो रहे उच्च व्यापार घाटे को कम करने में मदद मिलेगी। भारत उन गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करने का प्रयास कर रहा है, जिनका सामना भारतीय निर्यातक रूसी बाजार में कृषि और समुद्री उत्पादों जैसे क्षेत्रों में करते हैं।

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दो सरकारी अधिकारियों ने कहा, ‘मुक्त व्यापार समझौते से रूस के साथ व्यापार घाटा खत्म होगा, क्योंकि वहां के बाजार में ज्यादा पहुंच मिल सकेगी। बाजार तक पहुंच से जुड़ी समस्याओं के कारण कई वस्तु का निर्यात रूस को नहीं हो पा रहा है। एफटीए इस तरह की समस्याओं का समाधान करेगा।’ एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘हम निर्यात के परंपरागत क्षेत्रों जैसे फुटवीयर और चमड़े से बने सामान, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग के सामान पर शुल्क से छूट की भी उम्मीद कर रहे हैं।’

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First Published - August 27, 2025 | 10:35 PM IST

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