भारत और नीदरलैंड ने 17 मुद्दों पर आपसी सहयोग करने के लिए आपसी सहमति जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय नीदरलैंड यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर, महत्त्वपूर्ण खनिज, नवीकरणीय ऊर्जा एवं स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा सह-उत्पादन, आवाजाही, बागवानी एवं डेरी सहित कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने से जुड़े समझौते हुए।
नीदरलैंड यूरोप में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक देशों में में एक है जिसका भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार 27.8 अरब डॉलर (वर्ष 2024-25) का है। यह 55.6 अरब डॉलर के संचयी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के साथ भारत का चौथा सबसे बड़ा निवेशक है। प्रधानमंत्री की नीदरलैंड की यात्रा के अंत में जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि नीदरलैंड अपने विश्व-स्तरीय लॉजिस्टिक तंत्र के साथ रॉटरडैम बंदरगाह सहित भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोप में कदम रखने का रणनीतिक अवसर देता है। बयान में कहा गया है कि भारत डच कंपनियों के लिए एक विशाल और गतिशील बाजार प्रदान करता है और इसके पास एक विशाल और कुशल प्रतिभाओं का भंडार है।
गुजरात के धोलेरा में सेमीकंडक्टर फैब को सहयोग देने के लिए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और एएसएमएल के बीच हुए समझौते पर हस्ताक्षर एक महत्त्वपूर्ण प्रगति मानी जा रही है। मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन ने गुजरात में भारत के पहले उच्च तकनीक (फ्रंट-एंड) सेमीकंडक्टर फैब के लिए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और एएसएमएल की साझेदारी का स्वागत किया। एएसएमएल उच्च परिशुद्धता लिथोग्राफी उपकरणों के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में एक है जो सेमीकंडक्टर चिप के निर्माण के लिए बेहद जरूरी होता है। प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा का दूसरा पड़ाव नीदरलैंड था।
वह रविवार शाम स्वीडन के गोथनबर्ग पहुंचे जो वहां का प्रमुख विनिर्माण केंद्र है। मोदी स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन से बातचीत करेंगे और यूरोपीय उद्योग गोलमेज सम्मेलन को संबोधित करेंगे।
भारत और नीदरलैंड के बीच हुए समझौतों में संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक ले जाना शामिल है। दोनों पक्ष राजनीतिक, व्यापार एवं निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग, महत्त्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकी, ऊर्जा परिवर्तन आदि सहित सभी क्षेत्रों में नियमित और सुनियोजित सहयोग के माध्यम से घनिष्ठ संबंधों को बढ़ावा देने के लिए एक रणनीतिक साझेदारी की कार्य योजना पर सहमत हुए।
मोदी और जेटेन ने संयुक्त व्यापार एवं निवेश समिति और त्वरित समाधान तंत्र की स्थापना का स्वागत किया जो भारत-यूरोप मुक्त व्यापार समझौते की मदद से द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा देंगे। दोनों नेताओं ने रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति एवं व्यापार नेटवर्क पर इसके प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से निर्बाध नौवहन और वैश्विक व्यापार प्रवाह की जरूरत पर जोर दिया।
दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान, नौवहन की स्वतंत्रता और ‘दबाव और संघर्ष रहित एक स्वतंत्र, खुले और शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र का आह्वान किया। उभरती प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दोनों पक्षों ने इंडो-डच सेमीकंडक्टर ऑनलाइन स्कूल के लिए डच सेमीकंडक्टर कॉम्पिटेंस सेंटर को भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) से जोड़ने की पहल का स्वागत किया।
आइंडहोवेन यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नॉलजी और यूनिवर्सिटी ऑफ ट्वेंटे तथा छह प्रमुख भारतीय तकनीकी संस्थानों (जिनमें बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान और दिल्ली, गांधीनगर, मुंबई और चेन्नई के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान शामिल हैं) के बीच सेमीकंडक्टर और संबंधित प्रौद्योगिकियों में ब्रेन ब्रिज के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसमें एनएक्सपी, एएसएमएल, टाटा और सीजी सेमी की भागीदारी होगी।
नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में दोनों नेताओं ने हरित हाइड्रोजन के विकास पर भारत-नीदरलैंड कार्य योजना (रोडमैप) का शुभारंभ किया। नीदरलैंड हरित परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा में क्षमता निर्माण के लिए नीति आयोग के साथ सहयोग करेगा जबकि ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय (आरयूजी) और 19 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) के बीच शैक्षणिक सहयोग होगा।
गुजरात के कल्पसर परियोजना के लिए डच विशेषज्ञता सहित जल पर रणनीतिक साझेदारी के समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। एक बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने जल, कृषि और स्वास्थ्य (डब्ल्यूएएच) में सहयोग के महत्त्व पर जोर दिया।
भारत को एक रणनीतिक ‘हरित और डिजिटल समुद्री गलियारे’ के विकास, चिकित्सा उपकरणों, भारत में कृषि से संबंधित क्षेत्रों में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने, बेंगलुरु में पशुपालन उत्कृष्टता केंद्र (सीईएएच) में डेरी प्रशिक्षण के लिए एक भारत-डच उत्कृष्टता केंद्र और पश्चिम त्रिपुरा में फूलों के लिए एक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने में नीदरलैंड की विशेषज्ञता हासिल होगी। दोनों प्रधानमंत्रियों ने एक समारोह में भी भाग लिया जहां लीडेन विश्वविद्यालय ने चोल काल की तांबे की प्लेटें भारतीय अधिकारियों को लौटाईं।
दोनों देशों ने रक्षा उद्योग और अनुसंधान केंद्रों, भारतीय रक्षा निर्माता संघ (एसआईडीएण) और नीदरलैंड्स रक्षा और सुरक्षा उद्योग (एनआईडीवी) के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक रक्षा औद्योगिक कार्य योजना पर काम करने, संयुक्त त्रि-सेवा वार्ता की योजना बनाने और प्लेटफार्मों और उपकरणों के बीच प्रौद्योगिकी सहयोग के रास्ते तलाशने का निर्णय लिया।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने शीर्ष डच उद्योगपतियों को संबोधित किया। यह संबोधन सीईओ गोलमेज सम्मेलन में हुआ जिसमें नीदरलैंड के 16 शीर्ष सीईओ शामिल हुए। वार्ता समाप्त होने के बाद हेग में विदेश मंत्रालय (एमईए) के एक संवाददाता सम्मेलन में नीदरलैंड के पत्रकारों ने प्रधानमंत्री जेटेन के उन कथित बयानों पर प्रतिक्रिया मांगी जिनमें उन्होंने कहा था कि नीदरलैंड और यूरोपीय संघ प्रेस की स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों (जिनमें मुस्लिम समुदाय और छोटे समुदाय शामिल हैं) को लेकर चिंतित हैं।
यह भी पूछा गया कि क्या दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच हुई चर्चा में इस मुद्दे पर बात हुई थी। इस पर विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने कहा कि उन्होंने डच प्रधानमंत्री का बयान नहीं देखा है। उन्होंने कहा कि ऐसे सवाल पूछने वाले व्यक्ति के पास विषय-वस्तु की गहरी समझ की कमी दर्शाते हैं।