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होर्मुज संकट के बीच ईरान से तेल आपूर्ति समझौते कर सकता है भारत: Moody’s

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मूडीज के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट संकट के चलते भारत समेत बड़े तेल आयातक देश ईरान के साथ विशेष ट्रांजिट कॉरिडोर पर बातचीत कर सकते हैं।

Last Updated- May 17, 2026 | 2:40 PM IST
Strait of Hormuz crisis
Representational Image

भारत समेत तेल आयात करने वाले अन्य देश ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ईरान के साथ द्विपक्षीय बातचीत कर सकते हैं। इसमें कोऑर्डिनेटेड ट्रांजिट कॉरिडोर के जरिए तेल आपूर्ति की व्यवस्था शामिल हो सकती है। हालांकि 2026 में प्री-वार समुद्री आवाजाही फिर शुरू होने की संभावना कम है। ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज रेटिंग्स ने अपनी हालिया रिपोर्ट में यह बात कही है।

भूराजनीतिक जोखिमों पर जारी अपनी वैश्विक रिपोर्ट में मूडीज ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच जल्द और स्थायी समझौते की संभावना बहुत कम है, इसलिए होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खुलने की उम्मीद भी फिलहाल नहीं है। समुद्री ट्रांजिट धीरे-धीरे सुधरेगा, लेकिन यह सामान्य रूप से रास्ता खुलने के बजाय द्विपक्षीय समझौतों के जरिए होगा। इससे मौजूदा लगभग शून्य स्तर से ऊर्जा आपूर्ति में कुछ सुधार हो सकता है, लेकिन यह प्रक्रिया धीमी, अस्पष्ट और बाधित होने वाली रहेगी।

चीन, भारत, जापान और कोरिया करेंगे बातचीत!

मूडीज ने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि चीन, भारत, जापान और कोरिया जैसे तेल आयातक देश ईरान के साथ द्विपक्षीय स्तर पर ट्रांजिट व्यवस्था पर बातचीत करेंगे। यह संभवतः लारक द्वीप और ओमान के समुद्री क्षेत्र के पास उभर रहे समन्वित ट्रांजिट कॉरिडोर के जरिए हो सकता है। हालांकि 2026 में युद्ध-पूर्व स्तर की आवाजाही लौटने की संभावना नहीं है।”

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रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, अगर अगले छह महीनों में होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित आवाजाही फिर शुरू भी हो जाती है, तब भी वैश्विक तेल बाजार में आपूर्ति की कमी बनी रहेगी। इससे ऊर्जा कीमतें ऊंची और अस्थिर रहेंगी और इसका असर लागत, मांग और कर्ज लेने वालों की वित्तीय स्थिति पर पड़ेगा।

ब्रेंट की महंगाई ग्रो​थ पर करेगी चोट

मूडीज ने 12 मई की अपनी रिपोर्ट में कहा, “हम अब इस साल के अधिकांश समय में ब्रेंट क्रूड की कीमत 90-110 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहने की उम्मीद करते हैं। इसमें काफी उतार-चढ़ाव रहेगा और नए घटनाक्रम के आधार पर कीमतें कभी-कभी इस दायरे से बाहर भी जा सकती हैं।” अगर ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक 90-110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर रहता है तो कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर में 0.2 से 0.8 प्रतिशत अंक तक की कमी आ सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया कि भारत सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है, क्योंकि उसका लगभग 46 प्रतिशत कच्चा तेल आयात पश्चिम एशिया से आता है। इसके अलावा रुपया कमजोर होने, चालू खाते और राजकोषीय प्रबंधन पर दबाव भी भारत के लिए जोखिम बढ़ाता है। मूडीज ने अपने मई वैश्विक मैक्रो आउटलुक में 2026 कैलेंडर वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 0.8 प्रतिशत अंक घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया है।

पश्चिम एशिया संघर्ष, जो अमेरिका और इजरायल के ईरान पर संयुक्त हवाई हमलों से शुरू हुआ था, अब तीसरे महीने में पहुंच चुका है। इस हमले के बाद होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया, जो दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले लगभग पांचवें हिस्से के कच्चे तेल और एलएनजी परिवहन का प्रमुख रास्ता है।

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होर्मुज से समुद्री आवाजाही 90% से ज्यादा घटी

संघर्ष से पहले की तुलना में होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री आवाजाही 90 प्रतिशत से अधिक घट चुकी है। जोखिम बढ़ने, ऊंचे बीमा खर्च और समुद्र में बारूदी सुरंगों की मौजूदगी के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 90 डॉलर से 120 डॉलर प्रति बैरल के बीच उतार-चढ़ाव कर चुकी हैं।

मूडीज ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री आपूर्ति में बाधा अब अस्थायी झटका नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक संरचनात्मक समस्या बन गई है और यह बाधा शरद ऋतु तक जारी रह सकती है। मूडीज ने चेतावनी दी कि लगातार ऊंची ऊर्जा कीमतें और ऊर्जा उत्पादों की कमी से खुदरा और मुख्य महंगाई दोनों बढ़ेंगी।

रिपोर्ट में कहा गया कि इससे दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मौद्रिक नीति का रास्ता और मुश्किल हो जाएगा। ऊर्जा-आधारित उद्योगों की लागत बढ़ेगी, लोगों की खरीद क्षमता घटेगी और कर्ज लेने वालों के लिए वित्तीय स्थितियां और सख्त होंगी। मूडीज ने 2026 में भारत की महंगाई दर औसतन 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जो उसके पहले के अनुमान से 1 प्रतिशत अधिक है।

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First Published - May 17, 2026 | 2:02 PM IST

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