facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

भारत-न्यूजीलैंड के बीच सोमवार को होगा FTA साइन, व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य

Advertisement

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच 27 अप्रैल को होने वाला FTA समझौता व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर खोलते हुए दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को मजबूत करेगा।

Last Updated- April 26, 2026 | 11:21 AM IST
India New Zealand FTA
Representative image

FTA Talks: भारत और न्यूजीलैंड के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत के बाद दोनों देश 27 अप्रैल को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं। इस समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करना है।

यह समझौता पिछले साल 22 दिसंबर को बातचीत पूरी होने के करीब चार महीने बाद साइन किया जा रहा है। इस मौके पर भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के ट्रेड और इन्वेस्टमेंट मंत्री टॉड मैक्ले मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम का आयोजन भारत मंडपम में किया जाएगा।

इस समझौते से भारतीय कंपनियों को न्यूजीलैंड के बाजार में बिना शुल्क के पहुंच मिलेगी। साथ ही अगले 15 साल में करीब 20 अरब डॉलर का निवेश आने की उम्मीद है। भारतीय पेशेवरों के लिए अस्थायी रोजगार वीजा की सुविधा भी बढ़ेगी। इसके अलावा दवाइयों और मेडिकल डिवाइस के निर्यात को भी आसान बनाया जाएगा।

दूसरी तरफ न्यूजीलैंड के करीब 95 प्रतिशत उत्पादों पर भारत टैरिफ कम या खत्म करेगा। इनमें ऊन, कोयला, लकड़ी, वाइन, एवोकाडो और ब्लूबेरी जैसे सामान शामिल हैं। हालांकि भारत ने अपने किसानों और घरेलू उद्योग को ध्यान में रखते हुए डेयरी, प्याज, चीनी, मसाले, खाद्य तेल और रबर जैसे उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है।

इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में करीब 20 अरब डॉलर का निवेश करेगा। यह निवेश मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, सेवाओं, इनोवेशन और रोजगार सृजन जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा।

दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में आपसी व्यापार को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक हालात और पश्चिम एशिया के तनाव के कारण व्यापार प्रभावित हो रहा है। इससे भारत को ओशिनिया क्षेत्र में अपने निर्यात को बढ़ाने का मौका मिलेगा। इससे पहले भारत ऑस्ट्रेलिया के साथ भी इसी तरह का समझौता कर चुका है।

समझौते के तहत न्यूजीलैंड को कई उत्पादों पर शुल्क में राहत मिलेगी। इसमें कीवी फल और सेब के लिए कोटा आधारित टैरिफ कटौती शामिल है। इसके अलावा भेड़ का मांस, ऊन, कोयला और लकड़ी से जुड़े 95 प्रतिशत से ज्यादा उत्पादों को भारत में शुल्क मुक्त प्रवेश मिलेगा।

कुछ अन्य उत्पादों जैसे वाइन, समुद्री खाद्य पदार्थ, चेरी, एवोकाडो, पर्सिमन, बल्क इंफेंट फॉर्मूला, मनुका शहद और मिल्क एल्ब्यूमिन पर भी शुल्क में छूट दी जाएगी।

हालांकि भारत ने अपने किसानों और छोटे उद्योगों के हितों को ध्यान में रखते हुए डेयरी सेक्टर को इस समझौते से बाहर रखा है। दूध, क्रीम, व्हे, दही और पनीर जैसे उत्पादों पर कोई छूट नहीं दी जाएगी।

इसके अलावा कुछ अन्य संवेदनशील उत्पादों को भी इस समझौते में शामिल नहीं किया गया है। इनमें प्याज, चना, मटर, मक्का, बादाम, चीनी, कृत्रिम शहद, तेल, हथियार, रत्न और आभूषण, तांबा और एल्युमिनियम जैसे उत्पाद शामिल हैं।

भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए नए समझौते से सेवाओं, कृषि और व्यापार के कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की उम्मीद है। इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड भारतीय पेशेवरों के लिए हर साल 5,000 वीजा का एक विशेष रास्ता खोलेगा। इन वीजा के जरिए लोग अधिकतम तीन साल तक वहां काम कर सकेंगे।

इस योजना में आयुष विशेषज्ञ, योग प्रशिक्षक, भारतीय शेफ और संगीत शिक्षक जैसे पारंपरिक पेशों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा आईटी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, शिक्षा और निर्माण जैसे क्षेत्रों के पेशेवरों को भी अवसर मिलेगा। इससे दोनों देशों के बीच रोजगार और सेवाओं का आदान-प्रदान मजबूत होगा।

कृषि क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। न्यूजीलैंड की ओर से कीवी, सेब और शहद को लेकर एक विशेष एग्री-टेक एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा। इसका मकसद भारतीय किसानों को बेहतर तकनीक, अच्छी पौध सामग्री और प्रशिक्षण देकर उनकी उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाना है। इसके साथ ही फसल के बाद की प्रक्रिया, सप्लाई चेन और खाद्य सुरक्षा को भी बेहतर बनाया जाएगा।

समझौते में भौगोलिक संकेत यानी जीआई उत्पादों को लेकर भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। न्यूजीलैंड ने अपने कानून में बदलाव कर भारतीय वाइन और स्पिरिट्स के पंजीकरण को आसान बनाने का भरोसा दिया है।

व्यापार को आसान बनाने के लिए गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने पर भी सहमति बनी है। इसमें कस्टम प्रक्रिया को सरल करना, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े नियमों में सहयोग बढ़ाना और तकनीकी मानकों को बेहतर बनाना शामिल है।

फार्मा और मेडिकल डिवाइस सेक्टर को भी इस समझौते से फायदा मिलेगा। न्यूजीलैंड अब अमेरिका, यूरोप और ब्रिटेन जैसे देशों के मानकों को मान्यता देगा, जिससे भारतीय दवाओं और उपकरणों को वहां तेजी से मंजूरी मिल सकेगी। इससे भारतीय कंपनियों के लिए बाजार के नए रास्ते खुलेंगे।

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से दवा और मेडिकल डिवाइस सेक्टर को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। इस समझौते के बाद एक ही तरह की जांच बार-बार नहीं करनी पड़ेगी, जिससे कंपनियों का खर्च कम होगा और उत्पादों को मंजूरी जल्दी मिल सकेगी। इससे भारत से न्यूज़ीलैंड को दवाओं और मेडिकल उपकरणों का निर्यात बढ़ने की संभावना है।

सरकार अब तक कई देशों के साथ ऐसे समझौते कर चुकी है। यूएई के साथ मई 2022 में, ऑस्ट्रेलिया के साथ दिसंबर 2022 में और ब्रिटेन के साथ जुलाई 2025 में समझौता हुआ। इसके अलावा ईएफटीए समूह के साथ अक्टूबर 2025 में, ओमान के साथ दिसंबर 2025 में और यूरोपीय संघ के साथ जनवरी 2026 में बातचीत पूरी होने की घोषणा की गई। मॉरीशस के साथ समझौता अप्रैल 2021 से लागू है।

भारत ने अब तक फाइव आईज समूह के तीन देशों ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और न्यूज़ीलैंड के साथ व्यापार समझौते पूरे कर लिए हैं। इस समूह में अमेरिका और कनाडा भी शामिल हैं, जिनके साथ भारत की बातचीत अभी जारी है।

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच व्यापार की बात करें तो 2024-25 में दोनों देशों के बीच सामान का व्यापार करीब 1.3 अरब डॉलर रहा। वहीं 2024 में कुल व्यापार, जिसमें सेवाएं भी शामिल हैं, लगभग 2.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया। सेवाओं के क्षेत्र में यात्रा, आईटी और बिजनेस सेवाओं का सबसे ज्यादा योगदान रहा।

-पीटीआई इनपुट के साथ

Advertisement
First Published - April 26, 2026 | 11:21 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement