भारत की तेल रिफाइनिंग कंपनियां ईरान से खरीदे गए तेल का भुगतान अब चीनी मुद्रा युआन में कर रही हैं। जानकारी के अनुसार, यह भुगतान मुंबई स्थित आईसीआईसीआई बैंक के जरिए किया जा रहा है, जो अपनी शंघाई शाखा के माध्यम से युआन में पैसे ट्रांसफर कर रहा है। इस पूरे मामले की जानकारी रखने वाले चार सूत्रों ने यह बात कही है।
पिछले महीने अमेरिका ने रूस और ईरान से समुद्र के रास्ते तेल खरीदने पर 30 दिन की अस्थायी छूट दी थी। इसका मकसद युद्ध के कारण बढ़ती तेल कीमतों को नियंत्रित करना था। हालांकि, अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने साफ कर दिया है कि यह छूट आगे नहीं बढ़ाई जाएगी और ईरानी तेल पर यह राहत रविवार को खत्म हो जाएगी।
इसी छूट के तहत भारत की सबसे बड़ी सरकारी रिफाइनरी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने करीब 20 लाख बैरल ईरानी तेल खरीदा। यह खरीद करीब 200 मिलियन डॉलर की थी और पिछले सात साल में पहली बार भारत ने ईरान से तेल खरीदा है। इसके अलावा, रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए भी चार जहाजों को भारत में आने की अनुमति दी गई, जिनमें से एक जहाज एमटी फेलिसिटी अपना तेल उतार चुका है।
सूत्रों के मुताबिक, IOC और रिलायंस दोनों ने इस तेल का भुगतान आईसीआईसीआई बैंक के जरिए किया है, जिसमें युआन का इस्तेमाल किया गया। बैंक अपनी शंघाई शाखा से सीधे विक्रेताओं के खातों में युआन भेज रहा है। हालांकि, विक्रेताओं की पहचान सामने नहीं आई है।
IOC ने इस सौदे में करीब 95 प्रतिशत भुगतान तब कर दिया जब तेल से भरा जहाज भारतीय जल क्षेत्र में पहुंचा। इसे ‘नोटिस ऑफ रेडीनेस’ कहा जाता है। आमतौर पर भारतीय कंपनियां तेल का भुगतान डिलीवरी या माल उतारने के बाद करती हैं, लेकिन इस बार व्यवस्था अलग रही।
बहरहाल, ईरान पर लंबे समय से लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भुगतान करना हमेशा मुश्किल रहा है। इसी वजह से कई खरीदार इस छूट के बावजूद ईरानी तेल खरीदने से बच रहे हैं।
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रॉयटर्स के सूत्रों के अनुसार, इंडियन ऑयल फिलहाल आगे ईरानी तेल खरीदने की योजना नहीं बना रहा है। भारत ने 2019 के बाद से अमेरिकी दबाव के चलते ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था। तब से चीन की छोटी रिफाइनिंग कंपनियां, जिन्हें “टीपॉट” कहा जाता है, ईरानी तेल की मुख्य खरीदार बनी हुई हैं। (रॉयटर्स के इनपुट के साथ)