facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

चीन के झटके के बाद भारत का बड़ा कदम- अब खुद बनाएगा बिना रेयर अर्थ वाली EV मोटर

Advertisement

चीन द्वारा रेयर अर्थ मैग्नेट के निर्यात प्रतिबंध के बाद सरकार सक्रिय; भारी उद्योग मंत्रालय वाहन निर्माताओं संग शोध परियोजना पर करेगा चर्चा, स्वदेशी विकल्पों की तलाश तेज

Last Updated- November 03, 2025 | 9:11 AM IST
rare earth
Representational Image

भारत में फेराइट और रिलक्टेंस मोटर विकसित करने के लिए शोध परियोजना पर विचार किया जा रहा है। बिज़नेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) इस परियोजना पर चर्चा करने के लिए वाहन निर्माताओं और अन्य हितधारकों की जल्द बैठक बुलाने जा रहा है। फेराइट और रिलक्टेंस मोटरों में हैवी रेयर अर्थ स्थाई मैग्नेट का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘दरअसल हम इन नए तरह के मोटरों की संभावना तलाश रहे हैं। यह एक शोध परियोजना है। भारी उद्योग मंत्रालय उनके उपयोग के मामलों का अध्ययन कर रहा है। साथ ही देख रहा है कि क्या इसके लिए किसी नीतिगत समर्थन की आवश्यकता है।’ इस समय दुनिया के रेयर अर्थ स्थाई मैग्नेट (आरईपीएम) का करीब 90 प्रतिशत उत्पादन चीन करता है।

चीन के प्रतिबंध से प्रभावित हुआ घरेलू उद्योग

इन मैग्नेट का इस्तेमाल कुछ ऑटोमोबाइल कल पुर्जों में होता है। खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों के ट्रैक्शन मोटर में इसका इस्तेमाल होता है। अप्रैल से चीन ने भारत को आरईपीएम निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे घरेलू ऑटोमोबाइल उद्योग प्रभावित हो रहा है।

एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हालांकि यह स्पष्ट है कि अभी आरईपीएम का कोई विकल्प नहीं है, जिसमें इसी तरह की दक्षता हो। लेकिन हमें अन्य देशों पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए विकल्प देखने की जरूरत है। इसलिए हम हितधारकों के साथ एक बैठक बुलाएंगे और आकलन करेंगे कि भारी उद्योग मंत्रालय क्या कर सकता है।’

बिना स्थाई मैग्नेट के काम करती है रिलक्टेंस मोटर

रिलक्टेंस मोटर बिना किसी स्थाई मैग्नेट के काम करती है। इसके आयरन रोटर को इस तरह आकार दिया जाता है कि चुंबकीय प्रवाह लगातार इसे कम प्रतिरोध की स्थिति में खींचता है, जिससे टॉर्क उत्पन्न होता है। चूंकि यह केवल स्टेटर क्षेत्र और आयरन रोटर के बीच चुंबकीय खिंचाव पर निर्भर है, इसलिए इसे दुर्लभ धातु की आवश्यकता नहीं होती है।

ये मोटर सस्ते और बनाने में सरल होते हैं, लेकिन आमतौर पर कम टॉर्क डेंसिटी प्रदान करते हैं और मैग्नेट आधारित मोटरों की तुलना में अधिक शोर कर सकते हैं। वहीं फेराइट मोटर में मैग्नेट का इस्तेमाल होता है, लेकिन इसमें नियोडियम जैसी दुर्लभ धातु का इस्तेमाल किया जाता है।

Advertisement
First Published - November 3, 2025 | 9:11 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement