Strait of Hormuz: भारत के लिए एलपीजी, कच्चे तेल और एलएनजी ला रहे 19 जहाज होर्मुज स्ट्रेट में फंसे हुए हैं। इनमें 6 जहाजों में एलपीजी, 8 में कच्चा तेल, जबकि 4 में एलएनजी है। एक टैंकर खाली है, जिसमें एलपीजी भरी जा रही है। सरकार की प्राथमिकता पहले इन जहाजों को निकाल कर लाने की है। उसके बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी। अब तक, भारतीय ध्वज वाले 8 जहाज सुरक्षित रूप से निकल चुके हैं।
पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभावों के बारे में जानकारी देने के लिए विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारियों के संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट में इस समय दुनियाभर के लगभग 500 जहाज रुके हुए हैं।
सिन्हा ने बताया कि भारत के लिए ऊर्जा सामग्री ला रहे 10 विदेशी झंडे वाले जहाज हैं, जिनमें एलपीजी ला रहे तीन जहाज, कच्चे तेल के चार टैंकर और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के तीन जहाज शामिल हैं। भारतीय ध्वज वाले जहाजों में एलपीजी के तीन टैंकर, एलएनजी का एक और कच्चे तेल के चार टैंकर शामिल हैं। एक खाली टैंकर में एलपीजी भरी जा रही है। भारतीय ध्वज वाले जो 8 जहाज आ चुके हैं, उनमें दो एलपीजी वाले बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम शामिल हैं। इनमें लगभग 94,000 टन एलपीजी आई है।
सिन्हा ने बताया कि बीडब्ल्यू टीवाईआर मुंबई की ओर बढ़ रहा है और इसके 31 मार्च को पहुंचने की उम्मीद है, जबकि बीडब्ल्यू ईएलएम न्यू मंगलूर के रास्ते में है और इसके एक अप्रैल को पहुंचने का अनुमान है। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले और ईरान की व्यापक जवाबी कार्रवाई ने होर्मुज से जहाजों के आवागमन को लगभग ठप कर दिया है, लेकिन ईरान ने पिछले सप्ताह मित्र देशों के जहाजों को यहां से गुजरने की इजाजत दे दी थी।
सिन्हा ने कहा, ‘हमारी पहली प्राथमिकता भारतीय ध्वज वाले पोतों को बाहर निकालना है। हम अभी उस स्थिति में नहीं हैं, जहां हम पोतों को दोबारा सामान लाने के लिए वापस भेजना शुरू कर सकें।’ उनसे पूछा गया था कि क्या भारत घरेलू बंदरगाहों पर माल उतार चुके जहाजों को अतिरिक्त आपूर्ति लाने के लिए खाड़ी देशों में वापस भेजने पर विचार कर रहा है।
सिन्हा ने कहा कि उनका मंत्रालय पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर विशेष रूप से भारतीय नाविकों की सुरक्षा, जहाजों की आवाजाही और बंदरगाह संचालन के संबंध में, करीबी नजर रख रहा है।
विदेश मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान अब तक विभिन्न घटनाओं में 8 भारतीय नागरिकों की जान गई है, जबकि एक अभी भी लापता है। संवाददाता सम्मेलन में मौजूद विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (खाड़ी), असीम आर महाजन ने यह भी कहा, ‘रविवार को कुवैत में एक हमले में एक भारतीय नागरिक की जान चली गई।’
उन्होंने कहा, ‘हम मृतक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं। कुवैत स्थित हमारा दूतावास मृतक के परिवार के संपर्क में है और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर हर संभव सहायता प्रदान करने एवं पार्थिव शरीर को शीघ्र भारत लाने के लिए समन्वय कर रहा है।’ सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास ने हाल ही में कहा था कि 18 मार्च की घटनाओं के कारण रियाद में एक भारतीय नागरिक की मृत्यु हो गई।
मंत्रालय ने यह भी बताया था कि 28 फरवरी से अब तक लगभग 55 लाख यात्री इस क्षेत्र से भारत लौट चुके हैं। विदेश मंत्रालय ने सोमवार को दोहराया कि वह खाड़ी और पश्चिम एशिया क्षेत्र में बदलती स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘हम संयम बरते जाने और तनाव कम करने का आह्वान करते हैं और साथ ही संघर्ष को जल्द समाप्त करने के साधन के रूप में संवाद और कूटनीति पर जोर देते हैं।’
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मार्च को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान के साथ पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर चर्चा की थी तथा नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर सहमति जतायी थी।
महाजन ने कहा कि भारत और यूएई के बीच सीमित गैर-निर्धारित उड़ानें संचालित हो रही हैं। सऊदी अरब और ओमान के विभिन्न हवाई अड्डों से भारत के विभिन्न गंतव्यों के लिए उड़ानें आ-जा रही हैं।
(साथ में एजेंसियां)