भारतीय ध्वज वाले तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) पोत ने 4 अप्रैल को होर्मुज स्ट्रेट सुरक्षित रूप से पार कर लिया। इससे फारस की खाड़ी में फंसे भारतीय जहाजों की संख्या घटकर 17 रह गई है। भारत सरकार के अनुसार 4,665 करोड़ टन एलपीजी और 25 नाविकों को ले जा रहा विशाल गैस वाहक पोत (वीएलजीसी), ग्रीन सानवी इस तनावपूर्ण जलक्षेत्र को पार करने वाला नवीनतम पोत था।
अब तक,कच्चे तेल और एलपीजी वाले सात अन्य भारतीय ध्वज वाले पोत भारत के बंदरगाहों पर पहुंच चुके हैं। भारत पहुंचने वाले इन पोतों में जग लाड़की, शिवालिक, नंदा देवी, जग वसंत, पाइन गैस, बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम हैं। कच्चे तेल से लदा एक भारतीय पोत जग प्रकाश भी इस संकरे स्ट्रेट को पार करके तंजानिया की ओर रवाना हो गया है।
भारत फारस की खाड़ी में फंसे अपने टैंकरों के होर्मुज स्ट्रेट के सुरक्षित मार्ग के लिए ईरान के साथ लगातार बातचीत कर रहा है। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद से ईरान ने महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्ग से यातायात को प्रभावी ढंग से अवरुद्ध कर दिया है। ईरान ने केवल कुछ देशों के चुनिंदा जहाजों को ही गुजरने की अनुमति दी है।
बहरहाल, सरकार ने पुष्टि की है कि भारतीय रिफाइनर ईरान से कच्चा तेल और एलपीजी खरीद रहे हैं। सरकार ने लेन-देन में भुगतान संबंधी किसी भी समस्या की खबरों को खारिज कर दिया है। बिजनेस स्टैंडर्ड ने पहले बताया था कि अमेरिका द्वारा ईरान से पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने की अनुमति देने वाली 30 दिन की अस्थायी छूट की घोषणा के बाद भारत सरकार की एक रिफाइनर ने ईरान से एलपीजी की खेप प्राप्त की थी।
भारत सरकार ने बताया कि लगभग 44,000 मीट्रिक टन ईरानी एलपीजी ले जा रहा एलपीजी पोत सी बर्ड, 2 अप्रैल को भारत के मंगलौर में पहुंचा और एलपीजी को उतारा जा रहा है।
भारत ने आखिरी बार 2019 में ईरान से कच्चा तेल खरीदा था। इसके बाद अमेरिकी प्रतिबंधों के उल्लंघन से बचने के लिए भारतीय रिफाइनरों ने ईरान से ऊर्जा खरीद बंद कर दी है। मैरीटाइम इंटेलिेजेंस फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार भारत के कुल तेल आयात में ईरान की सर्वाधिक हिस्सेदारी 11.5 प्रतिशत थी। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण भारत को ऊर्जा आपूर्ति में विशेष रूप से एलपीजी हासिल करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने देश पर दबाव बढ़ा दिया है। भारत कच्चे तेल की अपनी करीब 90 प्रतिशत जरूरत के लिए आयात पर निर्भर है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक+) और उसके सहयोगी देशों ने आपूर्ति में कमी के बीच मई के लिए अपने उत्पादन कोटा बढ़ाने की योजना बनाई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सऊदी अरब और रूस के नेतृत्व में प्रमुख उत्पादकों ने लगभग 2,06,000 बैरल प्रति दिन (बीपीडी) तक लक्ष्य बढ़ाने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमति व्यक्त की है।