अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ छेड़ी गई जंग के बीच राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का गुस्सा अब अपने ही पुराने सहयोगियों पर फूट पड़ा है। ट्रंप ने नाटो (NATO) देशों को कड़े शब्दों में फटकार लगाते हुए उन्हें ‘डरपोक’ करार दिया है। ट्रंप इस बात से नाराज हैं कि नाटो के सदस्य देश ईरान के साथ चल रहे इस संघर्ष में अमेरिका का खुलकर साथ नहीं दे रहे हैं।
सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में ट्रंप ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, “अमेरिका के बिना नाटो सिर्फ एक कागजी शेर है।” दरअसल, ट्रंप चाहते हैं कि उनके प्रमुख सहयोगी देश ईरान के नियंत्रण वाली ‘होर्मुज स्ट्रेट’ से होने वाली जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाने के लिए सैन्य मदद दें। गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से इस पूरे क्षेत्र में युद्ध छिड़ा हुआ है, जिससे वैश्विक बाजार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और लाखों लोग बेघर हो चुके हैं।
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में इस बात पर खास तौर पर नाराजगी जताई कि नाटो देश एक तरफ तो जंग में शामिल होने से बच रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ तेल की बढ़ती कीमतों का रोना रो रहे हैं।
उन्होंने लिखा, “अब जबकि सैन्य रूप से यह लड़ाई जीती जा चुकी है और उनके लिए खतरा बेहद कम है, तब भी वे तेल की ऊंची कीमतों की शिकायत कर रहे हैं। वे ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को खोलने में मदद नहीं करना चाहते, जो कि एक आसान सैन्य अभियान है। यह उनके लिए बहुत आसान है और इसमें जोखिम भी कम है, लेकिन वे डरपोक हैं। हम इसे याद रखेंगे!”
हालांकि, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस और जापान जैसे देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर समुद्री रास्तों को सुरक्षित बनाने के प्रयासों में शामिल होने की बात कही है, लेकिन उनकी अपनी शर्तें हैं। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने साफ कर दिया है कि किसी भी तरह का सहयोग तभी संभव है जब युद्ध पूरी तरह समाप्त हो जाए। वहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दो टूक कहा कि इस समय अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा और तनाव को कम करना ही सबसे बेहतर विकल्प है। मैक्रों के मुताबिक, यूरोपीय संघ का कोई भी देश इस युद्ध में सीधे तौर पर कूदने को तैयार नहीं है।