पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि दोनों देश सीधे बड़े युद्ध से बचना चाहते हैं, लेकिन टकराव लगातार जारी है। इस टकराव का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर दिख रहा है, जो दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच बयानबाजी और सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। एक तरफ ईरान ने संकेत दिए कि उसके लड़ाके समुद्र के किनारे तैयार बैठे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नौसेना को आदेश दिया कि अगर कोई जहाज समुद्र में माइन बिछाने की कोशिश करे, तो उसे तुरंत निशाना बनाया जाए।
रिपोर्ट में बताया गया है कि अप्रैल में हुए सीजफायर के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हुई है। दोनों देश सीधे युद्ध से बचना चाहते हैं, लेकिन कोई भी अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं है। इसके चलते लगातार धमकियां, बयान और समुद्र में छोटी-छोटी घटनाएं हो रही हैं, जिससे माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।
इस टकराव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। अमेरिका द्वारा ईरानी जहाजों पर दबाव और ईरान की तरफ से जवाबी कदमों के कारण तेल और अन्य जरूरी सामान की सप्लाई प्रभावित हो रही है। इससे कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा बना हुआ है, खासकर अमेरिका में, जहां पहले से महंगाई एक बड़ा मुद्दा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय अमेरिका और ईरान दोनों के सामने आसान रास्ता नहीं है। अगर अमेरिका सैन्य कार्रवाई बढ़ाता है, तो उसे बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। वहीं ईरान भी ज्यादा आगे बढ़कर फायदा नहीं उठा सकता, क्योंकि उस पर पहले से आर्थिक दबाव है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस संकट का सबसे बेहतर समाधान बातचीत ही हो सकता है। लेकिन फिलहाल हालात ऐसे हैं कि दोनों देश एक-दूसरे पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे यह स्थिति एक तरह के “टकराव के खेल” में बदल गई है, जहां दोनों अपनी ताकत दिखाना चाहते हैं, लेकिन सीधा युद्ध नहीं चाहते।
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस गुजरता है। अगर यह रास्ता लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, जितना ज्यादा यह संकट लंबा चलेगा, उतना ही वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।