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हमलों से ईरान कमजोर हुआ, लेकिन शासन परिवर्तन की गारंटी नहीं: नेतन्याहू

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इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका-इजरायल हमलों से ईरान कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन बिना आंतरिक विद्रोह के वहां शासन परिवर्तन संभव नहीं है।

Last Updated- March 13, 2026 | 11:06 AM IST
benjamin netanyahu on Iran Israel War
Representational Image

Israel Iran War: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के हमलों से ईरान और उसका धार्मिक नेतृत्व काफी कमजोर हुआ है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि सिर्फ सैन्य हमलों से वहां शासन परिवर्तन की गारंटी नहीं दी जा सकती, जब तक देश के भीतर से विद्रोह न हो।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद पहली प्रेस ब्रीफिंग में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पत्रकारों से बात करते हुए नेतन्याहू ने कहा, “हम ऐसी परिस्थितियां बना रहे हैं जिससे शासन परिवर्तन संभव हो सके।” उन्होंने कहा कि ईरान के विरोधी समूहों को मदद देने के लिए इजरायल ने तेहरान में बसीज बल के ठिकानों और सैनिकों पर हवाई हमले भी किए हैं।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा, “मैं यह नहीं कह सकता कि ईरानी जनता निश्चित रूप से इस शासन को गिरा देगी। आखिरकार किसी भी शासन को भीतर से ही गिराया जाता है।”

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई दोनों ने गुरुवार को कड़े बयान दिए, जिससे संकेत मिलता है कि युद्ध जल्दी खत्म होने वाला नहीं है। सत्ता संभालने के बाद अपने पहले बयान में मोजतबा खामेनेई ने कहा कि अगर अमेरिका और इजरायल हमले जारी रखते हैं तो ईरान युद्ध को दूसरे मोर्चों तक भी फैला सकता है।

जब नेतन्याहू से पूछा गया कि अगर ईरान में शासन परिवर्तन नहीं हुआ तो क्या इसे असफलता माना जाएगा, तो उन्होंने सीधे जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि इजरायल के अस्तित्व और समृद्धि को सुनिश्चित करने का एक ही तरीका है- मजबूत बने रहना।

नेतन्याहू ने दावा किया कि जून 2025 के संघर्ष के बाद ईरान ने अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को फिर से तेज कर दिया था और कई गतिविधियों को जमीन के नीचे छिपाने लगा था। उनके अनुसार अगर इजरायल ने समय रहते कार्रवाई नहीं की होती तो कुछ ही महीनों में ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमता पर हमला करना मुश्किल हो जाता।

जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान के नए नेता को भी निशाना बनाया जाएगा, तो उन्होंने कहा कि वह “किसी भी आतंकी संगठन के नेताओं के लिए जीवन बीमा लेने की सलाह नहीं देंगे।”

इस बीच ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह के साथ इजरायल का तनाव भी बढ़ गया है। 1 मार्च को जब हिज्बुल्लाह ईरान के समर्थन में युद्ध में शामिल हुआ, उसके बाद से दोनों पक्षों के बीच लगातार हमले हो रहे हैं। बुधवार को हिज्बुल्लाह ने इजरायल के शहरों और बस्तियों पर 200 से ज्यादा रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन दागे।

इसके जवाब में इजरायल ने पिछले एक सप्ताह में बेरूत में 70 से ज्यादा ठिकानों पर हवाई और समुद्री हमले किए हैं। इससे पहले दक्षिणी बेरूत के निवासियों को क्षेत्र खाली करने की चेतावनी दी गई थी।

नेतन्याहू ने कहा कि ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह को इन हमलों की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने कहा, “मैंने लेबनान सरकार से कहा है कि वे आग से खेल रहे हैं। अगर उन्होंने हालात पर नियंत्रण नहीं किया तो हमें कार्रवाई करनी पड़ेगी।”

अमेरिका और इजरायल के रणनीतिक लक्ष्यों में मतभेद की खबरों पर नेतन्याहू ने कहा कि दोनों देशों के बीच “अभूतपूर्व गठबंधन” है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के साथ उनका रिश्ता पिछले सभी अमेरिकी और इजरायली नेताओं के मुकाबले ज्यादा मजबूत है।

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First Published - March 13, 2026 | 10:47 AM IST

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