प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी स्थित हैदराबाद हाउस में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं को एक साथ पौधारोपण करते हुए भी देखा गया। इससे पहले दिन में, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली अपनी पत्नी किम हे- क्युंग के साथ राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान राष्ट्रपति और प्रथम महिला ने महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की।
राजघाट जाने से पहले, दक्षिण कोरियाई नेता को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में औपचारिक स्वागत दिया गया, जो उनके उच्च-स्तरीय भारत दौरे के दूसरे दिन की अहम शुरुआत रही। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति का स्वागत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। इस स्वागत समारोह में पारंपरिक पोशाक पहने बच्चों ने भारत और दक्षिण कोरिया के झंडे लहराते हुए रंगारंग प्रस्तुति दी।
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति अपनी पत्नी किम हे- क्युंग के साथ रविवार को तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर भारत पहुंचे। एयरपोर्ट पर उनका स्वागत केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने किया।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस दौरे के कूटनीतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह दोनों देशों के बीच “विशेष रणनीतिक साझेदारी” को आगे बढ़ाने की दिशा में एक “महत्वपूर्ण मील का पत्थर” है। MEA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “राष्ट्रपति ली का स्वागत राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने किया। यह यात्रा भारत-दक्षिण कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।”
इस बीच, द टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक लिखित साक्षात्कार में (प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बैठक से पहले हुआ) दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे संघर्ष के कारण महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग प्रभावित हुआ है, जिससे वैश्विक तेल कीमतें बढ़ रही हैं और औद्योगिक सामग्री की सप्लाई चेन भी बाधित हो रही है।
उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया और भारत दोनों अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मध्य पूर्व पर काफी निर्भर हैं, जिसमें कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस शामिल है। इसलिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा हमारे लोगों की सुरक्षा और हमारे देशों के अस्तित्व के लिए जरूरी है।
राष्ट्रपति ली और प्रधानमंत्री मोदी दिन में बाद में द्विपक्षीय शिखर वार्ता करेंगे, जो ली के पद संभालने के बाद उनकी तीसरी आमने-सामने की बैठक होगी।
ली ने कहा कि दक्षिण कोरिया भारत के साथ मिलकर बहुपक्षीय प्रयासों में सहयोग करेगा, ताकि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके और वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितताओं से निपटने के लिए ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाई जा सके। उन्होंने कहा कि कोरिया भारत के साथ लगातार संपर्क बनाए रखेगा, ताकि सभी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और स्वतंत्र रूप से गुजर सकें।
उन्होंने आगे कहा कि हम इस साझा प्रतिबद्धता को बनाए रखने के लिए संबंधित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी साथ मिलकर काम करते रहेंगे। यातित ऊर्जा और कच्चे माल पर भारी निर्भरता कम करने के प्रयासों के तहत, राष्ट्रपति ली ने क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ाने की उम्मीद जताई।
उन्होंने कहा, “पारंपरिक मॉडल से आगे बढ़ते हुए, जहां हम केवल कच्चा माल आयात करते हैं, यदि कोरिया की तकनीक और भारत के खनन व रिफाइनिंग उद्योग को जोड़ा जाए, तो हम मिलकर स्थिर क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन बना सकते हैं।”
ली ने यह भी कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा, शिपिंग और शिपबिल्डिंग जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना चाहिए, ताकि आर्थिक संबंध और मजबूत हों और दोनों देशों के बीच बेहतर तालमेल बन सके।
राजनयिक गतिविधियों की शुरुआत को दर्शाते हुए, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को राष्ट्रपति ली से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की। जयशंकर ने X पर लिखा कि वह भारत दौरे की शुरुआत पर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग से मिलकर सम्मानित महसूस कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वह भारत-कोरिया संबंधों को कई क्षेत्रों में गहरा करने की उनकी प्रतिबद्धता की सराहना करते हैं और उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ होने वाली बातचीत विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी। इन शुरुआती बैठकों के बाद, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति आज प्रधानमंत्री मोदी के साथ विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
इस बैठक में शिपबिल्डिंग, व्यापार, निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण और उभरती तकनीकों के साथ-साथ सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों जैसे कई क्षेत्रों पर चर्चा होने की उम्मीद है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा करेंगे। वार्ता के बाद प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति ली के सम्मान में लंच का आयोजन करेंगे। इसके अलावा, राष्ट्रपति ली, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात करेंगे, जो उनके सम्मान में राष्ट्रपति भवन में राजकीय भोज का आयोजन करेंगी।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बहुआयामी साझेदारी है, जो प्राचीन सभ्यतागत संबंधों और लोकतंत्र तथा कानून के शासन जैसे साझा मूल्यों पर आधारित है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ली का यह दौरा दोनों देशों की उस साझा इच्छा को दर्शाता है, जिसमें वे मौजूदा सहयोग को और मजबूत करना और नए क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाना चाहते हैं।
यह दौरा पिछले एक साल में दोनों देशों के बीच लगातार उच्च स्तरीय संपर्क का हिस्सा है। इससे पहले 2025 में जी20 शिखर सम्मेलन (जोहान्सबर्ग) और जी7 शिखर सम्मेलन (कनाडा) के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ली की दो मुलाकातें हो चुकी हैं।