अमेरिका के फ्लोरिडा से बुधवार को आर्टेमिस 2 अंतरिक्ष मिशन का प्रक्षेपण (लॉन्च) किया गया। आर्टेमिस 2 मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के चारों ओर एक ऐतिहासिक 10 दिनों की उड़ान यात्रा पर रवाना हुए। यह अभियान पांच दशकों से भी अधिक समय में पृथ्वी की निचली कक्षा की जद से आगे मानव पहली बार दस्तक देगा। राष्ट्रीय वैमानिकी और अंतरिक्ष प्रशासन (नासा) ने बाद में बताया कि यह चंद्रमा पर एक पड़ाव या आधार स्थापित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
इस अभियान में पृथ्वी की कक्षा और चंद्रमा के बीच के क्षेत्र सिसलूनर स्पेस में उड़ान भरने वाली पहली महिला और पहली अश्वेत व्यक्ति भी शामिल हैं। इन चार अंतरिक्ष यात्रियों में अमेरिका से रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टीना कोच और कनाडा की अंतरिक्ष एजेंसी से जेरेमी हैनसेन शामिल हैं।
अंतिम बार मानव ने धरती की निचली कक्षा से बाहर यात्रा दिसंबर 1972 में अपोलो 17 के माध्यम से की थी। नासा का एसएलएस (स्पेस लॉन्च सिस्टम) रॉकेट फ्लोरिडा में एजेंसी के कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड 39बी से शाम 6 बजकर 35 मिनट पर रवाना हुआ। बुधवार को चार अंतरिक्ष यात्रियों को ओरियन अंतरिक्ष यान में बैठा कर चंद्रमा के चारों ओर एक नियोजित परीक्षण उड़ान पर भेजा गया। सूत्रों के अनुसार इससे 2040 तक चंद्र अर्थव्यवस्था का और अधिक विस्तार होगा और भारत जैसे देशों में स्टार्टअप और निजी कंपनियों के लिए नए व्यावसायिक अवसर पैदा होंगे।
पीडब्ल्यूसी के अनुमान के अनुसार 2026 से 2050 के बीच चंद्र सतह पर गतिविधियों से अपेक्षित कुल राजस्व लगभग 93.9 अरब डॉलर से 127 अरब डॉलर के बीच रहने का अनुमान है जिनमें 2040 के दशक में वाणिज्यिक बाजारों के परिपक्व होने और अभियानों की संख्या बढ़ने के साथ राजस्व में तेजी से वृद्धि होगी।
यह अभियान भविष्य के आर्टेमिस मिशनों (जिनमें 2028 में आर्टेमिस 4 के लिए नियोजित चंद्रमा लैंडिंग भी शामिल है) से पहले ओरियन क्रू कैप्सूल और आवश्यक जीवन रक्षक प्रणालियों का परीक्षण करने के लिए तैयार किया गया है।
नासा प्रशासक जेरेड इसाकमान ने कहा,‘आर्टेमिस 2 एक अभियान से कहीं अधिक बड़ी चीज की शुरुआत है। यह चंद्रमा पर हमारी वापसी का प्रतीक है। यह न केवल यात्रा करने के लिए बल्कि चंद्र बेस पर स्थायी रूप से रहने के लिए और आगे आने वाले बड़ी प्रगति की नींव रखेगा।’
परीक्षण उड़ान के लगभग 49 मिनट बाद एसएलएस रॉकेट के ऊपरी चरण ने विस्फोट किया और ओरियन को पृथ्वी के चारों ओर एक अंडाकार कक्षा में स्थापित कर दिया। चरण द्वारा किए जाने वाले दूसरे नियोजित विस्फोट से ओरियन (जिसे चालक दल ने ‘इंटीग्रिटी’ नाम दिया है) पृथ्वी से लगभग 46,000 मील दूर एक उच्च पृथ्वी कक्षा में प्रवेश करेगा। विस्फोट के बाद ओरियन चरण से अलग हो जाएगा और स्वतंत्र रूप से उड़ान भरेगा।
भारतीय अंतरिक्ष संघ (आईएसपीए) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) ए के भट्ट ने कहा,‘यह भारत के लिए उत्साह बढ़ाने वाला होगा। जो जल्द ही अंतरिक्ष में अपना मानव मिशन भेजने और 2040 तक चंद्रमा की सतह पर एक भारतीय को उतारने की योजना बना रहा है। इससे हमारे स्टार्टअप और निजी कंपनियों को नए बाजार खोजने में मदद मिलेगी।’
हालांकि, ओरियन अंतरिक्ष यान के शौचालय में कुछ खामियां पाई गईं जिन्हें ह्यूस्टन स्थित मिशन कंट्रोल के साथ मिलकर काम कर रहे आर्टेमिस 2 के दल ने तुरंत ठीक कर लिया। 1 अप्रैल को अपोजी रेज बर्न से पहले आर्टेमिस 2 के दल ने एक टिमटिमाती हुई खराबी की सूचना दी और अभियान नियंत्रण दलों ने डेटा का सफलतापूर्वक आकलन किया और दल के साथ मिलकर समस्या का निवारण किया।
पहली बार किसी मानवयुक्त चंद्र अभियान से भारत का संबंध होने की बात सामने आई है। हालांकि, आर्टेमिस के मुख्य कॉन्ट्रैक्टर (ठेकेदारों) की सूची में कोई भारतीय स्वामित्व वाली अंतरिक्ष कंपनी नहीं है मगर कई भारतीय मूल के वैज्ञानिक विभिन्न चरणों में इस मिशन का हिस्सा रहे होंगे। इनमें हैदराबाद की काव्या के मन्यापु भी शामिल हैं जिनके बारे में कहा जा रहा है कि वह ह्यूस्टन टेक्सास में नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर के फ्लाइट ऑपरेशंस डायरेक्टोरेट के अंतर्गत आर्टेमिस कार्यक्रम के लिए एक्सप्लोरेशन स्पेससूट्स के विकास का नेतृत्व कर रही हैं।
नासा के एक बयान के अनुसार इसके प्रमुख कॉन्ट्रैक्टर एयरोजेट रॉकेटडाइन, एक्सिओम स्पेस, बेचटेल, ब्लू ओरिजिन, बोइंग, अमेंटम, जैकब्स, लॉकहीड मार्टिन, मैक्सार स्पेस सिस्टम्स, नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन और स्पेसएक्स के साथ वर्तमान में 47 राज्यों में फैले 2,700 से अधिक आपूर्तिकर्ता नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर में चंद्र अंतरिक्ष बंदरगाह के निर्माण में योगदान दे रहे हैं।
सोमवार 6 अप्रैल को पूर्व निर्धारित कई घंटों तक चंद्रमा के निकट से गुजरने के दौरान अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की सतह की तस्वीरें लेंगे और अवलोकन प्रदान करेंगे। वे चंद्रमा के सुदूर भाग के कुछ क्षेत्रों को देखने वाले पहले व्यक्ति होंगे। हालांकि, गुजरने के दौरान चंद्रमा का सुदूर भाग केवल आंशिक रूप से चमकेगा मगर परिस्थितियां ऐसी छाया बनाएगी जिनसे गहराई, लकीरें, ढलान और गड्ढों के किनारे दिखाई देंगे जिन्हें पूर्ण प्रकाश में देखना अक्सर मुश्किल होता है। अभियान के दौरान चालक दल के अवलोकन और अन्य मानव स्वास्थ्य वैज्ञानिक जांच जैसे ‘अवतार’ भविष्य के चंद्र मिशनों के दौरान विशिष्ट जानकारी प्रदान करेंगे। चंद्रमा के निकट से गुजरने के बाद अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर लौटेंगे और प्रशांत महासागर में उतरेंगे।