प्रधानमंत्री के यूरोप दौरे का मुख्य उद्देश्य तकनीकी साझेदारी को गहरा करना होगा। विशेषकर हरित ऊर्जा में ऐसा किया जाना है। इससे पहले प्रधानमंत्री 2017 में नीदरलैंड गए थे, जो यूरोप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र है और द्विपक्षीय व्यापार 27.8 अरब डॉलर है। यह चौथा सबसे बड़ा निवेशक है, जिसका संचयी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई 55.6 अरब डॉलर है। टाटा समूह का धोलेरा सेमीकंडक्टर निर्माण संयंत्र डच सेमीकंडक्टर कंपनी एएसएमएल के उपकरणों का उपयोग करेगा।
17-18 मई को प्रधानमंत्री स्वीडन में होंगे। उन्होंने 2018 में पहली बार भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के लिए स्वीडन का दौरा किया था। मोदी और स्वीडिश प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन यूरोपीय उद्योग के लिए गोलमेज सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे, जिसमें यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी शामिल होंगी। नॉर्वे में 18-19 मई को प्रधानमंत्री तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन और द्विपक्षीय बैठकों में भाग लेंगे। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की 43 वर्षों में नॉर्वे की पहली यात्रा होगी।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री का नॉर्वे दौरा द्विपक्षीय व्यापार (लगभग 2.73 अरब डॉलर) और नॉर्वे के सरकारी पेंशन फंड द्वारा भारतीय पूंजी बाजार में लगभग 28 अरब डॉलर के निवेश को गति देने का भी अवसर होगा।
तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन 19 मई को ओस्लो में होगा, जिसमें मोदी नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन, फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ऑरपो, आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रुन फ्रॉस्टाडॉटिर और स्वीडन के प्रधानमंत्री क्रिस्टरसन के साथ शामिल होंगे। मोदी 19-20 मई को इटली में होंगे, जहां वे प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर जाएंगे।
मोदी ने जून 2024 में जी7 शिखर सम्मेलन के लिए इटली का दौरा किया था। भारत-इटली द्विपक्षीय व्यापार 2025 में 16.77 अरब डॉलर तक पहुंच गया और इटली से कुल एफडीआई 3.66 अरब डॉलर (अप्रैल 2000-सितंबर 2025) रहा। प्रधानमंत्री रोम में खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) के मुख्यालय का भी दौरा करेंगे।