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दिल्ली में जुटेगा क्वाड: मार्को रुबियो और जयशंकर करेंगे पश्चिम एशिया के होर्मुज संकट पर बड़ी चर्चा

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नई दिल्ली में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में पश्चिम एशिया संकट और ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा होगी, जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री की इस यात्रा पर एफसीआरए विवाद भी छाया रहेगा

Last Updated- May 22, 2026 | 10:42 PM IST
S. Jaishankar
विदेश मंत्री एस. जयशंकर | फाइल फोटो

आगामी मंगलवार को नई दिल्ली में होने वाली बैठक में क्वाड (क्वाडिलैटरल सिक्योरिटी डायलॉग) देशों के विदेश मंत्री पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा करेंगे। इसमें होर्मुज संकट और उससे उत्पन्न चुनौतियां शामिल हैं। भारत में होने वाली क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक इसी वर्ष आगे चलकर भारत द्वारा क्वाड शिखर सम्मेलन की मेजबानी का मार्ग प्रशस्त कर सकती है, जिसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के अलावा जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री शामिल होंगे।

नई दिल्ली में होने वाली इस बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मेजबानी करेंगे। उधर, गुरुवार को, स्वीडन में नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) की बैठक में शामिल होने से पहले, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मियामी में पत्रकारों से कहा कि अमेरिका उतनी ऊर्जा बेचने के लिए तैयार है जितनी भारत खरीदना चाहे। स्वीडन से भारत की ओर रवाना हो रहे रुबियो ने भारत को ‘महान साझेदार’बताया।

रुबियो ने कहा, ‘वे जितनी ऊर्जा खरीदना चाहें, हम उन्हें बेचने को तैयार हैं। और जाहिर है आपने देखा होगा कि अमेरिका उत्पादन और निर्यात के ऐतिहासिक स्तर पर है।’ 23 से 26 मई तक भारत की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के दौरान, रुबियो कोलकाता, जयपुर और आगरा भी जाएंगे। कोलकाता में रुबियो मदर टेरेसा द्वारा स्थापित मिशनरीज ऑफ चैरिटी के मुख्यालय और अमेरिकी वाणिज्य दूतावास का दौरा करेंगे।

गुरुवार को वॉशिंगटन एग्जामिनर में प्रकाशित एक लेख में अमेरिकी सांसद क्रिस स्मिथ ने अमेरिकी विदेश मंत्री से आग्रह किया कि वह संसद के मॉनसून सत्र के दौरान भारत सरकार के विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) में संशोधन के प्रस्तावित विधेयक पर ध्यान दें। स्मिथ ने कहा कि यदि यह संशोधन लागू होता है तो ‘यह हमारे दोनों देशों के संबंधों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन यदि भारतीय नेता इस विधेयक को अलग रख दें, तो यह दोनों देशों के लिए लाभकारी होगा।’

स्मिथ ने कहा कि यह विधेयक विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले समूहों की संपत्ति और परिसंपत्तियों को जब्त करने की सरकार की क्षमता को बढ़ा देगा। इनमें से अधिकांश ईसाई चर्च और अस्पताल और स्कूल जैसे चैरिटी संस्थाएं हैं। उन्होंने कहा कि 2022 में मिशनरीज ऑफ चैरिटी का एफसीआरए लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित किया गया था जो इस जोखिम को दर्शाता है।

अमेरिकी सांसद ने कहा कि भारत सरकार द्वारा धार्मिक स्वतंत्रता के सम्मान को लेकर चिंताएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी की सरकार से पहले की हैं। उन्होंने कहा, ‘पिछली भारतीय सरकारें जिनका नेतृत्व कांग्रेस पार्टी ने किया वे भी धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करने में विफल रही थीं।’ स्मिथ ने कहा कि भारत का स्वयं को एक सभ्यतागत राज्य और एक हिंदू सांस्कृतिक महाशक्ति के रूप में देखना उचित है। उन्होंने कहा कि रुबियो को अपने भारतीय समकक्षों के साथ मिलकर एफसीआरए संशोधनों को वापस लेने की दिशा में काम करना चाहिए। 

मियामी में अपने वक्तव्य में रुबियो ने भारत-अमेरिका संबंधों के बारे में कहा, ‘हम पहले ही उनके साथ और अधिक करने के लिए बातचीत कर रहे थे। हम चाहते हैं कि वे हमारे पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा बनें। हमें यह भी लगता है कि वेनेजुएला के तेल के साथ अवसर मौजूद हैं।’

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज अगले सप्ताह भारत का दौरा करेंगी। हालांकि, नई दिल्ली में आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि रोड्रिगेज भारत में 1 जून को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले पहले इंटरनैशनल बिग कैट अलायंस (आईबीसीए) शिखर सम्मेलन में प्रतिभागी के रूप में आने वाली थीं, जिसे चौथे भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन के साथ आयोजित किया जाना था। लेकिन कुछ अफ्रीकी देशों में इबोला वायरस के फैलाव की चिंताओं के कारण भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन और आईबीसीए  दोनों को स्थगित कर दिया गया है।  मियामी में अपने वक्तव्य में रुबियो ने भारत को एक महान सहयोगी और महान साझेदार बताया।

उन्होंने कहा, ‘हम उनके साथ बहुत अच्छा काम करते हैं। इसलिए यह एक महत्त्वपूर्ण यात्रा है। मुझे खुशी है कि हम इसे कर पा रहे हैं क्योंकि मुझे लगता है कि हमारे पास बात करने के लिए बहुत कुछ होगा।’

रुबियो ने आगे कहा, ‘हम वहां क्वाड से भी मिलेंगे जो महत्त्वपूर्ण है। मुझे लगता है कि विदेश मंत्री के रूप में मेरी पहली बैठक क्वाड के साथ थी। मुझे खुशी है कि हम अब इसे भारत में कर रहे हैं और इस वर्ष बाद में भी एक करेंगे।’

कोलकाता की उनकी यात्रा 2012 में हिलेरी क्लिंटन के बाद किसी अमेरिकी विदेश मंत्री की पहली यात्रा होगी। कोलकाता में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास अमेरिका का दुनिया में दूसरा सबसे पुराना दूतावास है। 19 नवंबर, 1792 को अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन ने न्यूबरीपोर्ट के बेंजामिन जॉय को कोलकाता में पहले अमेरिकी वाणिज्य दूत के रूप में नियुक्त किया था।

मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत के लिए क्वाड की दृष्टि के अनुरूप मंत्रीगण 1 जुलाई, 2025 को वॉशिंगटन में हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाएंगे। वे द्विपक्षीय वार्ताएं भी करेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। चारों मंत्री क्षेत्रीय सुरक्षा का समर्थन करने पर चर्चा करेंगे, जहां हर देश की संप्रभुता का सम्मान हो और व्यापार स्वतंत्र रूप से चल सके। वे अहम खनिज आपूर्ति श्रृंखला का विविधीकरण, बेहतर साइबर सुरक्षा और विश्वसनीय नेटवर्क, मानवीय सहायता प्रदान करना, अवैध समुद्री गतिविधियों जैसे समुद्री डकैती और मादक पदार्थों की तस्करी को तकनीक साझा करके और व्यापार मार्गों को सुरक्षित करके रोकने पर भी विचार करेंगे।

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First Published - May 22, 2026 | 10:33 PM IST

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