अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी मीडिया संस्थान ‘एक्सियोस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ईरान पर एक बार फिर नए और बड़े हमले करने पर “गंभीरता से विचार” कर रहे हैं। ट्रंप ने साफ किया है कि अगर आखिरी समय में चल रही शांति वार्ता से कोई समाधान नहीं निकला, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुनेगा। तनाव की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस वीकेंड होने वाली अपने बेटे जूनियर डॉनल्ड ट्रंप की शादी में जाने का कार्यक्रम भी रद्द कर दिया है, ताकि वे व्हाइट हाउस में रहकर स्थिति पर नजर रख सकें।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि सरकार से जुड़े हालातों और देश के प्रति अपने कर्तव्य के कारण वह इस वीकेंड वाशिंगटन डीसी में व्हाइट हाउस में ही रुकेंगे और अपने बेटे की शादी में शामिल नहीं हो पाएंगे। पहले वे न्यू जर्सी के बेडमिंस्टर गोल्फ क्लब में वीकेंड बिताने वाले थे, लेकिन शुक्रवार शाम को वे वापस व्हाइट हाउस लौट आए।
शुक्रवार सुबह राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में अपनी सीनियर नेशनल सिक्योरिटी टीम के साथ एक बेहद अहम बैठक की। दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि इस बैठक में ईरान के साथ जारी युद्ध और भविष्य की रणनीति पर गहन चर्चा हुई। बैठक में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, सीआईए डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ और व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूजी वाइल्स समेत कई बड़े अधिकारी मौजूद थे।
व्हाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा, “ईरान समझौता करने के लिए बेताब है। देखते हैं आगे क्या होता है। लेकिन हमने उन पर कड़ा प्रहार किया है और हमारे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था, क्योंकि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते।”
दूसरी तरफ, युद्ध को रोकने के लिए आखिरी दौर की राजनयिक कोशिशें भी तेज हो गई हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर इस वक्त तेहरान (ईरान) के दौरे पर हैं, जहां उनके साथ कतर का एक प्रतिनिधिमंडल भी शांति समझौता कराने की कोशिशों में जुटा है।
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मुनीर शनिवार को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर जनरल अहमद वाहिदी से मुलाकात कर सकते हैं, जो ईरान के नीतिगत फैसलों में बड़ी भूमिका निभाते हैं। हालांकि, बातचीत से जुड़े एक अमेरिकी अधिकारी ने इन वार्ताओं को “बेहद कष्टदायक” बताया है। उन्होंने कहा कि हर दिन मसौदे (ड्राफ्ट्स) का आदान-प्रदान तो हो रहा है, लेकिन कोई बड़ी प्रगति नहीं दिख रही है।
स्वीडन में नाटो के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा कि बातचीत में “मामूली प्रगति” हुई है, लेकिन वे इसे बढ़ा-चढ़ाकर नहीं पेश करना चाहते।
सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से शांति वार्ता में कोई ठोस प्रगति न होने के कारण राष्ट्रपति ट्रंप काफी निराश हो चुके हैं। मंगलवार को उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत में डिप्लोमेसी को एक और मौका देने की बात कही थी, लेकिन गुरुवार रात तक उनका रुख बदल गया और वे हमले का आदेश देने की ओर झुके हुए नजर आए।
ट्रंप के करीबी सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति अब एक आखिरी और “निर्णायक” बड़े सैन्य ऑपरेशन की संभावना पर विचार कर रहे हैं। उनकी योजना है कि इस अंतिम हमले के बाद वे अपनी जीत की घोषणा कर सकें और इस युद्ध को हमेशा के लिए खत्म कर सकें। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें आखिरी समय में हो रही इस कूटनीति पर टिकी हैं, क्योंकि बातचीत विफल होने की सूरत में मिडिल ईस्ट में एक और विनाशकारी सैन्य टकराव शुरू हो सकता है।
(PTI के इनपुट के साथ)