facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

US-Iran War: ट्रंप का सख्त रुख, सीजफायर बढ़ाया पर नाकेबंदी कायम; बातचीत पर अब भी सस्पेंस

Advertisement

अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ा युद्धविराम, लेकिन तनाव और अनिश्चितता बरकरार

Last Updated- April 22, 2026 | 8:53 AM IST
Donald Trump on US-Iran War
US President Donald Trump (File Photo)

US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच युद्धविराम को लेकर स्थिति अब भी अनिश्चित बनी हुई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि वह ईरान के साथ चल रहे सीजफायर को फिलहाल बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह फैसला पाकिस्तान के अनुरोध पर लिया गया है और अब वह तेहरान की ओर से एक साझा प्रस्ताव का इंतजार कर रहे हैं।

हालांकि, एक तरफ जहां युद्धविराम को बढ़ाया गया है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी सेना ने ईरान के बंदरगाहों पर अपनी नाकेबंदी जारी रखी है। इससे साफ संकेत मिलता है कि जमीन पर तनाव अभी कम नहीं हुआ है।

इस बीच, व्हाइट हाउस ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पाकिस्तान यात्रा को भी फिलहाल टाल दिया है। यह दौरा ईरान के साथ बातचीत के अगले दौर के लिए प्रस्तावित था, लेकिन ईरान ने आगे की बातचीत को लेकर अभी सहमति नहीं दी है।

ट्रंप ने कहा कि सीजफायर तब तक जारी रहेगा जब तक ईरान अपनी तरफ से प्रस्ताव पेश नहीं करता और बातचीत किसी नतीजे तक नहीं पहुंच जाती। वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने संकेत दिया कि तेहरान तभी वार्ता में शामिल होगा जब उसे लगेगा कि इससे कोई ठोस परिणाम निकल सकता है।

दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम बुधवार को खत्म होने वाला है। ऐसे में आशंका बनी हुई है कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो संघर्ष फिर से शुरू हो सकता है। दोनों पक्ष पहले ही कह चुके हैं कि बातचीत नाकाम रहने पर वे फिर से सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार हैं।

इस संघर्ष में अब तक भारी जानमाल का नुकसान हो चुका है। ईरान में 3,300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लेबनान में 2,200 से अधिक लोगों ने जान गंवाई है। इसके अलावा इजराइल में 23 लोगों की मौत हुई है और खाड़ी देशों में भी कई लोग मारे गए हैं। क्षेत्र में तैनात 13 अमेरिकी सैनिक और लेबनान में 15 इजराइली सैनिक भी इस संघर्ष में मारे जा चुके हैं।

सीजफायर बढ़ाने पर आईएईए प्रमुख की प्रतिक्रिया, बोले शांति के लिए जरूरी है निरंतर बातचीत

संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था के प्रमुख ने ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष में युद्धविराम की अवधि बढ़ाए जाने का स्वागत किया है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रोसी ने मंगलवार देर रात कहा कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच तनाव खत्म करने की कोशिश आसान नहीं है और यह एक जटिल प्रक्रिया है, जिसे आगे बढ़ने के लिए समय और निरंतरता की जरूरत है।

ग्रोसी ने जोर देकर कहा कि शांति के लिए जो भी मौका बन रहा है, उसे गंवाना नहीं चाहिए। उन्होंने दोनों देशों को यह भी आगाह किया कि किसी भी संभावित समझौते में आईएईए की शुरुआत से ही भूमिका तय होनी चाहिए, ताकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर निगरानी प्रभावी ढंग से की जा सके।

उन्होंने साफ कहा कि अगर समझौते में एजेंसी को शामिल नहीं किया गया, तो ऐसा समझौता केवल दिखावटी साबित हो सकता है और उस पर भरोसा करना मुश्किल होगा।

US-Iran War: बातचीत की मेज पर एकता की परीक्षा, सत्ता संतुलन पर सवाल

ईरान में जंग खत्म करने की बातचीत उसके नेतृत्व के लिए नई परीक्षा बनती दिख रही है। अमेरिका और इजराइल के हमलों में देश के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei और कई शीर्ष अधिकारियों की मौत के बाद भी सत्ता ढहती नजर नहीं आई, लेकिन अब असली चुनौती सामने है।

कई दशकों तक खामेनेई ने अलग-अलग ताकतवर गुटों को संतुलित रखकर अपना नियंत्रण बनाए रखा था। अब सवाल यह है कि वही पकड़ किसके पास है, खासकर तब जब सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व अलग-अलग हाथों में दिख रहा है।

जानकारी के मुताबिक, जंग के पहले ही दिन हुए हमलों के बाद खामेनेई के बेटे Ayatollah Mojtaba Khamenei ने उनकी जगह ली। हालांकि उनकी भूमिका को लेकर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि हमले में उनके घायल होने की खबरें हैं और वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं।

फिलहाल सत्ता का केंद्र ‘सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ माना जा रहा है, जिसमें सरकार और सेना के शीर्ष अधिकारी शामिल हैं। यही समूह अभी फैसले ले रहा है।

अभी तक सभी गुट सख्त रुख अपनाकर एकजुट दिख रहे हैं, लेकिन अमेरिका के साथ बातचीत में कितनी रियायत दी जाए, इस मुद्दे पर मतभेद सामने आ सकते हैं। पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत की कोशिशें जारी हैं और यही आगे चलकर ईरान के अंदरूनी संतुलन की असली परीक्षा बन सकती हैं।

अब मंगलवार को पाकिस्तान नहीं जाएंगे JD Vance

व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance अब मंगलवार को पाकिस्तान नहीं जाएंगे। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब राष्ट्रपति Donald Trump ने युद्धविराम को आगे बढ़ाने का ऐलान किया है और ईरान से प्रस्ताव का इंतजार किया जा रहा है।

व्हाइट हाउस की ओर से यह भी कहा गया कि फिलहाल आमने-सामने की बातचीत को लेकर कोई नई जानकारी नहीं है। यानी आगे की रणनीति पूरी तरह ईरान के अगले कदम पर निर्भर करेगी।

इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने ट्रंप के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अमेरिकी राष्ट्रपति का आभार जताया। शहबाज शरीफ ने कहा कि यह फैसला शांति की दिशा में चल रही कोशिशों को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों पक्ष युद्धविराम का पालन करते हुए इस्लामाबाद में होने वाली अगली वार्ता में किसी ठोस समझौते तक पहुंचेंगे।

दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखा। अमेरिकी शेयर बाजार में शुरुआत की तेजी टिक नहीं पाई और दिन के अंत तक गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ने से बाजार दबाव में आ गया।

तेल बाजार भी उतार-चढ़ाव से गुजरता रहा। दिन के दौरान कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं और ब्रेंट क्रूड करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। आखिर में यह करीब 98.48 डॉलर पर बंद हुआ, जो पहले से ज्यादा था।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि युद्धविराम को बढ़ाने की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि ईरान की नेतृत्व व्यवस्था इस समय काफी बंटी हुई है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इशारा किया कि ईरान के अंदर मतभेद कोई नई बात नहीं है, लेकिन मौजूदा हालात में यह ज्यादा साफ नजर आ रहे हैं।

ट्रंप ने यह भी कहा कि उनकी टीम ऐसे ईरानी अधिकारियों से बातचीत कर रही है जो समझौता करना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने माना कि ईरान के कुछ शीर्ष नेताओं को हटाने के फैसले से हालात थोड़े जटिल भी हुए हैं। उनके मुताबिक, नए नेतृत्व के साथ बातचीत करना एक तरह से आसान भी है क्योंकि वे ज्यादा व्यावहारिक हैं।

इधर ईरान ने संयुक्त राष्ट्र से अमेरिका के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की मांग की है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने उसके झंडे वाले एक मालवाहक जहाज पर हमला कर उसे कब्जे में लिया, जो अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है। ईरान ने इसे युद्धविराम का उल्लंघन और समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।

वहीं अमेरिका का कहना है कि यह जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पास उसकी नौसैनिक घेराबंदी से बचने की कोशिश कर रहा था, जिसके चलते कार्रवाई की गई।

Advertisement
First Published - April 22, 2026 | 7:55 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement