facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

देसी फार्मा कंपनियों पर अमेरिका का 100% टैरिफ असर नहीं करेगा

Advertisement

ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर टैरिफ की घोषणा की जिसके बाद शुक्रवार को निफ्टी फार्मा सूचकांक 2.14 प्रतिशत गिर गया।

Last Updated- September 27, 2025 | 10:32 AM IST
Medicine
Representative Image

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के आयातित ब्रांडेड या पेटेंट वाली दवाओं पर 100 फीसदी आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने के फैसले से भारतीय दवा कंपनियों पर असर पड़ने की संभावना कम है क्योंकि वे ज्यादातर जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति ही अमेरिका को करती हैं। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका के ब्रांडेड दवाओं के बाजार में सन फार्मा, बायोकॉन, अरबिंदो फार्मा और अन्य भारतीय कंपनियों को थोड़ा नुकसान हो सकता है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर टैरिफ की घोषणा की जिसके बाद शुक्रवार को निफ्टी फार्मा सूचकांक 2.14 प्रतिशत गिर गया। उन्होंने कहा कि जिन फार्मास्यूटिकल कंपनियों ने अमेरिका में अपने संयंत्र का निर्माण शुरू कर दिया है या जो बनाने की तैयारी में हैं उन पर शायद यह टैरिफ न लगे। कुछ हफ्ते पहले ही ट्रंप ने यूरोप में बनने वाली ब्रांडेड दवाओं पर भी 15 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी।

जानकारों का कहना है कि उनकी नई घोषणा से ब्रांडेड दवाइयों पर लगने वाले टैरिफ को लेकर काफी भ्रम की स्थिति बन गई है। नुवामा के विश्लेषकों के एक नोट में उन भारतीय कंपनियों के नाम की सूची है जिनकी अमेरिका के ब्रांडेड दवा बाजार में मौजूदगी है। इनमें सन फार्मा (इनोवेटिव मेडिसिंस डिविजन, वित्त वर्ष 2025 में 1.1 अरब डॉलर), बायोकोन (ब्रांडेड बायोसिमिलर 45 करोड़ डॉलर से कम) और अरबिंदो (कैंसर की ब्रांडेड दवाएं, 10 करोड़ डॉलर का राजस्व) शामिल हैं।

बंबई स्टॉक एक्सचेंज में सन फार्मा के शेयरों में 2.5 फीसदी की गिरावट आई वहीं बायोकॉन के शेयर लगभग 5 फीसदी और अरबिंदो के शेयर 0.72 फीसदी तक गिर गए।

क्रिसिल के वरिष्ठ निदेशक अनुज सेठी ने कहा, ‘कुछ घरेलू दवा बनाने वाली कंपनियों की ब्रांडेड और पेटेंटे वाली दवाओं के क्षेत्र में अच्छी पकड़ है लेकिन इन दवाइयों का उनकी कमाई में योगदान कम है। इसके अलावा, दवाएं एकदम जरूरी चीजों की श्रेणी में आती हैं ऐसे में टैरिफ का अधिकांश बोझ ग्राहकों पर डाला जा सकता है। कुछ घरेलू कंपनियों के अमेरिका में विनिर्माण संयंत्र भी हैं, जिससे उन्हें नए कर से छूट मिल जाएगी।’

नुवामा के विश्लेषकों का कहना है कि जुबिलैंट फार्मा को इससे फायदा हो सकता है, क्योंकि वॉशिंगटन के पास स्पोकेन में उसकी एक सीडीएमओ इकाई है। एक और भारतीय दवा कंपनी एल्केम भी अमेरिका में एक छोटी सीडीएमओ इकाई लगा रही है ऐसे में उसे भी ट्रंप के टैरिफ से राहत मिल सकती है।

दवा निर्यात करने वाली बड़ी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले इंडियन फार्मास्यूटिकल अलायंस (आईपीए) का कहना है कि उसे घरेलू कंपनियों पर ज्यादा असर नहीं दिख रहा है।

Advertisement
First Published - September 27, 2025 | 10:32 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement