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वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच बढ़ती तल्खी! चीन की चेतावनी: बातचीत टूटी तो भुगतना होगा गंभीर परिणाम

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ईरान युद्ध और ट्रंप की 'डोनरो डॉक्ट्रिन' के बीच चीन ने अमेरिका को बातचीत की चेतावनी दी है, ताकि वैश्विक गलतफहमियों और संभावित बड़े सैन्य टकराव को रोका जा सके

Last Updated- March 08, 2026 | 6:55 PM IST
Trump Xi jinping
राष्ट्रपति ट्रंप के साथ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग | फाइल फोटो

दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता तनाव अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। शनिवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी कि अगर दोनों देशों के बीच बातचीत का सिलसिला रुकता है, तो इसके गंभीर वैश्विक परिणाम होंगे। बीजिंग में आयोजित वार्षिक संसदीय बैठक के दौरान वांग यी ने कहा कि बातचीत की कमी से गलतफहमियां बढ़ेंगी, जो आगे चलकर सीधे टकराव का रूप ले सकती हैं।

युद्ध और कूटनीति की दोहरी चुनौती

यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप कई मोर्चों पर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई ने खाड़ी क्षेत्र में खलबली मचा दी है। तेहरान के मुताबिक, महज हफ्ते में इस युद्ध में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत 1300 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।

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इस युद्ध के बीच ही ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली प्रस्तावित शिखर वार्ता पर दुनिया की नजरें टिकी हैं। हालांकि, चीन ने अब तक आधिकारिक तौर पर इस बैठक की पुष्टि नहीं की है, लेकिन वांग यी के संकेतों से साफ है कि उच्च स्तरीय बातचीत का एजेंडा मेज पर है।

‘डोनरो डॉक्ट्रिन’ और बीजिंग की चिंता

चीनी विदेश मंत्री का इशारा ट्रंप की नई ‘डोनरो डॉक्ट्रिन’ (Donroe Doctrine) की तरफ भी था। इस नीति के तहत अमेरिका अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों (विशेषकर लैटिन अमेरिका) में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करने की बात कर रहा है। ट्रंप प्रशासन ने जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के आदेश देकर और कोलंबिया-मेक्सिको के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की धमकी देकर अपनी मंशा साफ कर दी है।

वांग यी ने बिना नाम लिए अमेरिका पर तंज कसते हुए कहा कि अगर चीन भी अन्य पारंपरिक ताकतों की तरह अपने प्रभाव क्षेत्र (Spheres of influence) बनाने या गुटबाजी करने में लग जाता, तो क्या एशिया आज इतना स्थिर होता? दरअसल, ट्रंप की ये नीतियां चीन के ‘बेल्ट एंड रोड’ प्रोजेक्ट और वैश्विक सुरक्षा पहल के लिए सीधी चुनौती मानी जा रही हैं। क्यूबा जैसे देशों में बढ़ते संकट के बीच अब दुनिया यह देख रही है कि क्या चीन के साथ मजबूत रिश्ते इन देशों को अमेरिकी दबाव से बचा पाएंगे।

(रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

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First Published - March 8, 2026 | 6:49 PM IST

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