करीब तीन महीने तक चली जंग के बाद अमेरिका और ईरान के बीच आखिरकार समझौता हो गया है। इस समझौते के तहत हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाएगा, जिससे दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए इसे बड़ी राहत माना जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर समझौते की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की मंजूरी दे दी है। ट्रंप ने लिखा, “दुनिया के जहाज अपने इंजन चालू करें, तेल को बहने दें।” हालांकि समझौते की पूरी शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं। दोनों देशों के बीच आधिकारिक हस्ताक्षर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने की उम्मीद है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरक इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचते हैं। युद्ध के दौरान इस मार्ग पर असर पड़ने से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई थी और तेल की कीमतों में भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। अब इसके खुलने से तेल, गैस और उर्वरकों की सप्लाई आसान हो सकती है।
ईरान के सरकारी टीवी ने समझौते को अपनी जीत बताया और कहा कि अमेरिका को युद्ध खत्म करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर होना पड़ा। हालांकि ईरान सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इस समझौते में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। पाकिस्तान ने कहा कि दोनों पक्षों ने सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत और स्थायी रूप से बंद करने पर सहमति जताई है।
हालांकि समझौता हो गया है, लेकिन इससे जुड़े कई अहम सवाल अब भी बने हुए हैं। अमेरिका और इजराइल ने फरवरी में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। उस दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। अब उनके बेटे को नया सर्वोच्च नेता माना जा रहा है। युद्ध के बावजूद ईरान का मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय सहयोगी संगठन और उसका परमाणु कार्यक्रम अब भी चर्चा के केंद्र में हैं।
ईरान के पास फिलहाल करीब 441 किलोग्राम उच्च स्तर का समृद्ध यूरेनियम मौजूद है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह हथियार बनाने के स्तर के काफी करीब है। ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है। वहीं अमेरिका चाहता है कि इस यूरेनियम को या तो नष्ट किया जाए या फिर ईरान से बाहर भेजा जाए। रूस ने इसे अपने यहां रखने की पेशकश भी की है। हालांकि इस समझौते में परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा पूरी तरह हल नहीं हुआ है। दोनों पक्षों ने फिलहाल युद्ध खत्म करने को प्राथमिकता दी है और परमाणु मुद्दे पर आगे अलग से बातचीत होने की संभावना है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल इस समझौते से पूरी तरह खुश नहीं है। अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी के कुछ नेताओं ने भी इसकी आलोचना की है। उनका कहना है कि यह समझौता 2015 के परमाणु समझौते से बहुत अलग नहीं दिखता, जिसे ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में खत्म कर चुके थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समझौता सफल रहता है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला रहता है, तो तेल और गैस की सप्लाई सुधर सकती है। इससे ऊर्जा कीमतों पर दबाव कम होगा और वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है। फिलहाल दुनिया भर के बाजारों की नजर इस बात पर है कि शुक्रवार को होने वाले आधिकारिक समझौते के बाद हालात किस दिशा में बढ़ते हैं। (AP के इनपुट के साथ)