US-Iran Tensions: अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू करने का ऐलान किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि यह कार्रवाई सोमवार सुबह 10 बजे ईस्टर्न टाइम के अनुसार लागू होगी।
सेंटकॉम के मुताबिक, यह नाकेबंदी किसी एक देश के खिलाफ नहीं बल्कि ईरान के बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों पर समान रूप से लागू होगी। यानी जो भी जहाज ईरानी पोर्ट या तटीय इलाकों में प्रवेश करेगा या वहां से निकलेगा, उसे इस प्रतिबंध का सामना करना पड़ेगा।
हालांकि, अमेरिका ने साफ किया है कि जो जहाज ईरान के अलावा अन्य देशों के बीच आवाजाही कर रहे हैं, उन्हें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति रहेगी।
सीजफायर के बाद भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। मरीन ट्रैकिंग एजेंसियों के अनुसार, युद्धविराम के बाद अब तक करीब 40 से ज्यादा व्यापारिक जहाज इस रास्ते से गुजर चुके हैं, लेकिन ट्रैफिक अभी भी सीमित बना हुआ है।
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अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने रविवार को बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अमेरिकी नौसेना अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी शुरू करेगी। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब ईरान के साथ लंबी बातचीत के बावजूद युद्ध खत्म करने को लेकर कोई सहमति नहीं बन सकी है और दो हफ्ते का नाजुक संघर्षविराम भी खतरे में पड़ गया है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि अमेरिकी नौसेना अब उन सभी जहाजों पर कार्रवाई करेगी जो अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में ईरान को किसी तरह का शुल्क देकर गुजर रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को नष्ट करने का काम शुरू किया जाएगा, जिनके बारे में उनका दावा है कि इन्हें ईरान ने लगाया है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब कोई भी जहाज अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में प्रवेश करने या वहां से बाहर निकलने की कोशिश करेगा, तो उसे अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी जहाज ईरान को अवैध भुगतान करेगा, उसे सुरक्षित रास्ता नहीं मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी भी अमेरिकी जहाज या शांतिपूर्ण जहाजों पर हमला किया गया, तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है और यहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है।