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US-Iran War: ईरान पर अमेरिका का तगड़ा वार, ट्रंप बोले- अब कीमत चुकानी होगी; मिडिल ईस्ट में हड़कंप

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अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है, अमेरिकी हमलों और जवाबी कार्रवाई ने क्षेत्र में हालात बेहद गंभीर बना दिए हैं।

Last Updated- June 11, 2026 | 8:11 AM IST
US-Iran Deal
Representative image

US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने बुधवार को ईरान के खिलाफ नए हवाई हमले शुरू किए। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर बातचीत आगे नहीं बढ़ी तो तेहरान को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। बढ़ते हमलों ने युद्ध समाप्त करने की कोशिशों पर भी असर डालने की आशंका पैदा कर दी है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि उसकी सेना ईरान में कई ठिकानों को निशाना बना रही है। सेंटकॉम के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान की लगातार और अनुचित आक्रामक गतिविधियों के जवाब में की जा रही है।

अमेरिका की ओर से यह लगातार दूसरे दिन की सैन्य कार्रवाई है। इससे कुछ घंटे पहले बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में ईरानी हमलों की खबरें सामने आई थीं। इन तीनों देशों में अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। इस सप्ताह दोनों पक्षों के बीच जवाबी हमलों का यह तीसरा दौर है, जिससे पिछले दो महीनों से लागू संघर्षविराम पर दबाव बढ़ गया है।

यह घटनाक्रम उस हमले के एक दिन बाद सामने आया है, जब अमेरिका ने होरमुज जलडमरूमध्य के पास सेना के एक हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद ईरान पर कार्रवाई की थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने उस घटना के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था।

ट्रंप का सख्त रुख और कूटनीतिक प्रयास

इस बीच ट्रंप ने ईरान से युद्ध समाप्त करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर करने की अपील भी की है। उन्होंने हाल ही में कहा था कि दोनों देशों के बीच कुछ ही दिनों में समझौता होने की संभावना है।

वहीं, ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार देश के दक्षिणी हिस्सों में स्थित बंदर अब्बास, सिरिक और मिनाब शहरों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। हालांकि इन धमाकों को लेकर अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

ईरान ने लगातार कई हफ्तों की बमबारी के बावजूद अपनी मजबूती दिखाई है। माना जा रहा है कि तेहरान को भरोसा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रभाव डालने की अपनी क्षमता के जरिए बातचीत में मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है। यह जलमार्ग दुनिया में तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के उन दावों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर दिया गया है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि व्यावसायिक जहाज अब भी सामान्य रूप से इस मार्ग से आ-जा रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र में ईरान का सख्त संदेश

संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने अमेरिका को चेतावनी भरे लहजे से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि वाशिंगटन किसी समझौते की उम्मीद करता है, तो उसे बल प्रयोग की धमकियां बंद करनी होंगी।

इरावानी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा, “ईरान ने कभी भी धमकियों और दबाव के बीच बातचीत नहीं की है और न ही भविष्य में किसी दबाव के आगे झुकेगा।”

तनाव और सैन्य कार्रवाई के बावजूद संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका और ईरान दोनों ही इस संघर्ष का कोई समाधान तलाशना चाहते हैं। हालांकि, दोनों देशों के लिए ऐसा रास्ता चुनना चुनौतीपूर्ण है जिसे वे अपने-अपने देश में राजनीतिक जीत के रूप में पेश कर सकें।

नेतन्याहू के रुख से समझौते की राह मुश्किल

इस बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ऐसे लक्ष्यों पर जोर देते दिख रहे हैं, जिनसे किसी समझौते की संभावना और जटिल हो सकती है। इनमें ईरान की धार्मिक सरकार को कमजोर करना, उसके परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करना और लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह संगठन की ताकत को समाप्त करना शामिल है।

ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना पिछले महीने से एक गुप्त अभियान चला रही है, जिसके जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल के जहाजों को सुरक्षित निकाला जा रहा है। ट्रंप के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य ईरान के प्रभाव और संभावित अवरोधों के बावजूद वैश्विक तेल आपूर्ति को बनाए रखना है।

अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ शुरू की गई सैन्य कार्रवाई के बाद से क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ा है। इस संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। ऊर्जा कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है, जबकि खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के दाम भी बढ़े हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बुधवार को 93 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। युद्ध शुरू होने के बाद से इसमें 25 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने तेल बाजार को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैन्य अभियान की मदद से तेल से लदे जहाज रात के समय होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि ईरान के रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचाए जाने के कारण इन जहाजों की आवाजाही आसान हो गई है।

10 करोड़ बैरल तेल बचाने का दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक, इस अभियान की बदौलत 10 करोड़ बैरल से अधिक तेल को ईरान की कथित पकड़ से बाहर निकालने में सफलता मिली है। हालांकि इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। यह मात्रा युद्ध शुरू होने से पहले जलडमरूमध्य से लगभग पांच दिनों में गुजरने वाले तेल के बराबर बताई जा रही है।

इस पूरे अभियान में अमेरिकी सेना की प्रत्यक्ष भूमिका क्या है, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने कहा कि क्षेत्र में तैनात अमेरिकी बल वाणिज्यिक जहाजों के साथ लगातार संपर्क और समन्वय बनाए रखते हैं। हालांकि उन्होंने किसी विशेष सैन्य सहायता या अभियान के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी।

वेस्ट एशिया में हालात फिर हुए तनावपूर्ण

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने पूरे पश्चिम एशिया में चिंता बढ़ा दी है। बुधवार को अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उसने ईरानी तेल लेकर जा रहे एक व्यापारी जहाज को निशाना बनाया। वहीं, ईरान ने अमेरिका पर अपनी संप्रभुता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। दोनों देशों के बीच लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई से युद्धविराम और कूटनीतिक प्रयासों पर भी असर पड़ता दिख रहा है।

अमेरिकी सेना के अनुसार, पलाऊ के झंडे वाले एम/टी सेटेबेलो नामक जहाज को उस समय निशाना बनाया गया जब वह ईरानी तेल की खेप लेकर नौसैनिक नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहा था। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने कहा कि जहाज के इंजन रूम पर सटीक हमला किया गया, जिससे वह निष्क्रिय हो गया। बताया गया कि ईरानी जलक्षेत्र के आसपास यह आठवां व्यापारी जहाज है जिसे अमेरिकी बलों ने कार्रवाई कर रोक दिया है।

तीन भारतीय नाविक लापता

भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि जहाज पर सवार तीन भारतीय नाविक लापता हैं, जबकि 21 अन्य को सुरक्षित बचा लिया गया है। मंत्रालय ने अपने बयान में अमेरिकी कार्रवाई या नौसैनिक नाकेबंदी का उल्लेख नहीं किया।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई से पहले जहाज के चालक दल को चेतावनी दी गई थी। इसके बाद ही जहाज को निशाना बनाया गया।

ईरान में कई सैन्य ठिकानों पर हमले

अमेरिकी सेना ने यह भी बताया कि बुधवार को किए गए अन्य हमलों में वायु रक्षा प्रणाली, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और निगरानी रडार केंद्रों को निशाना बनाया गया।

ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी हमलों में दक्षिणी शहर सिरिक के दो जलाशय क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे हजारों लोगों की पानी की आपूर्ति अस्थायी रूप से प्रभावित हुई। हालांकि इस दावे पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

तेहरान ने बाद में दावा किया कि उसने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में हमले किए हैं। जॉर्डन ने कहा कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर रही पांच मिसाइलों को मार गिराया। ईरान का कहना है कि इनका निशाना वह एयरबेस था जहां अमेरिकी सैन्य विमान तैनात हैं। वहीं, बहरीन और कुवैत ने भी आने वाले हमलों को रोकने का दावा किया है।

ईरान ने वार्ता पर पुनर्विचार के दिए संकेत

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिकी हमलों की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन बताया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने कहा कि हालिया घटनाक्रम के बाद ईरान युद्ध समाप्त करने संबंधी वार्ताओं पर अपने रुख की समीक्षा करेगा।

तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। अमेरिका के साथ चर्चा के बाद कतर का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को तेहरान पहुंचा। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच युद्ध समाप्त करने के संभावित रास्तों पर बातचीत की जा रही है।

हेलीकॉप्टर दुर्घटना के बाद बढ़ा विवाद

यह घटनाक्रम उस अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टर दुर्घटना के एक दिन बाद सामने आया है, जो Strait of Hormuz के पास हुई थी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार हेलीकॉप्टर की टक्कर एक ईरानी ड्रोन से हुई थी। फिलहाल जांच जारी है और यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि टक्कर जानबूझकर की गई थी या नहीं।

दुर्घटना के बाद एक ड्रोन नौका की मदद से हेलीकॉप्टर में सवार दोनों सैन्यकर्मियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि दोनों को कोई चोट नहीं आई है।

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First Published - June 11, 2026 | 8:11 AM IST

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