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US-Iran War: ईरान का बड़ा वार, होर्मुज फिर बंद; जहाजों पर फायरिंग से बढ़ा युद्ध का खतरा

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US-Iran Talks: ईरान-अमेरिका टकराव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव बढ़ा, फायरिंग और नाकेबंदी से वैश्विक तेल सप्लाई पर खतरा गहराया।

Last Updated- April 19, 2026 | 8:51 AM IST
Iran fully closes Strait of Hormuz again
Representative image

US-Iran War: ईरान और अमेरिका के बीच टकराव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। शनिवार को ईरान ने अहम जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा बंद करने का ऐलान कर दिया और वहां से गुजरने की कोशिश कर रहे जहाजों पर फायरिंग भी की।

ईरान का कहना है कि यह कदम उसने अमेरिका द्वारा उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखने के जवाब में उठाया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिकी नाकेबंदी खत्म नहीं होती, तब तक इस रास्ते को बंद रखा जाएगा।

गार्ड की ओर से यह भी कहा गया है कि फारस की खाड़ी और ओमान सागर में खड़े किसी भी जहाज को अपनी जगह से हिलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अगर कोई जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के करीब जाता है, तो उसे दुश्मन का साथ देने जैसा माना जाएगा और उस पर कार्रवाई की जाएगी।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुजदुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से करीब 20 फीसदी वैश्विक तेल आपूर्ति गुजरती है। ऐसे में इसके बंद होने से पहले से चल रहे वैश्विक ऊर्जा संकट के और गहराने का खतरा बढ़ गया है। साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के आठवें हफ्ते में हालात और बिगड़ने की आशंका भी बढ़ गई है।

मध्य पूर्व में हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा नाजुक युद्धविराम बुधवार तक खत्म होने वाला है। इस बीच ईरान ने कहा है कि उसे अमेरिका की ओर से नए प्रस्ताव मिले हैं और पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच एक और दौर की सीधी बातचीत कराने की कोशिश की जा रही है।

ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने दावा किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अब फिर से उसका नियंत्रण पहले जैसा हो गया है और वहां सेना की कड़ी निगरानी में संचालन किया जा रहा है।

उधर, समुद्र में तनाव की स्थिति भी बनी हुई है। ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी के मुताबिक रिवोल्यूशनरी गार्ड की गनबोट्स ने एक तेल टैंकर पर फायरिंग की, जबकि एक कंटेनर जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ, जिससे उसके कुछ कंटेनर क्षतिग्रस्त हो गए।

भारत ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने ईरान के राजदूत को तलब किया और भारत के झंडे वाले दो व्यापारिक जहाजों पर फायरिंग को गंभीर मामला बताया। खास बात यह है कि इससे पहले ईरान ने भारत आने वाले कई जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया था।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करना ईरान के लिए एक बड़ा रणनीतिक हथियार है। यह कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है और अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ा सकता है। वहीं अमेरिका के लिए यह नाकेबंदी ईरान की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर और दबाव बनाने का जरिया है।

इस बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने सख्त रुख दिखाते हुए कहा है कि देश की नौसेना अपने दुश्मनों को करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। गौरतलब है कि अपने पिता की मौत के बाद पद संभालने के बाद से वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं।

ईरान ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह वाणिज्यिक जहाजों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल रहा है। यह फैसला इजरायल और लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच 10 दिन के युद्धविराम के बाद लिया गया। जलडमरूमध्य खुलने की खबर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली।

हालांकि, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक तेहरान अमेरिका के साथ किसी समझौते पर नहीं पहुंचता। पाकिस्तान में दोनों देशों के बीच हुई आमने-सामने की अहम बातचीत बिना नतीजे के खत्म होने के बाद ट्रंप ने यह सख्त कदम उठाया था।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, नाकेबंदी शुरू होने के बाद से अब तक 23 जहाजों को ईरान की ओर वापस भेजा जा चुका है। ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतिबजादेह ने कहा कि अमेरिका के ये कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे युद्धविराम की पूरी प्रक्रिया भी कमजोर पड़ सकती है।

वहीं, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने अमेरिकी नाकेबंदी को युद्धविराम का उल्लंघन बताया है। परिषद ने कहा है कि वह जलडमरूमध्य को किसी भी तरह के आंशिक या शर्तों के साथ खोलने की कोशिशों को रोकने के लिए तैयार है। हाल के समय में यह परिषद देश के प्रमुख फैसले लेने वाली संस्था के रूप में उभरी है।

खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपना रुख और सख्त कर लिया है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने साफ कहा है कि जब तक युद्ध पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तब तक इस अहम समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर उसकी नजर और नियंत्रण बना रहेगा। इसके तहत ईरान ने अपने तय किए गए समुद्री मार्गों का पालन, शुल्क भुगतान और ट्रांजिट सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य करने का संकेत दिया है।

वहीं, रिवोल्यूशनरी गार्ड की नौसेना के बयान ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इसमें कहा गया है कि फिलहाल किसी भी जहाज को इस जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

यह तनातनी ऐसे समय बढ़ी है जब पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश में जुटा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा है कि उनका देश अमेरिका और ईरान के बीच मतभेद कम करने की कोशिश कर रहा है। अगले हफ्ते पाकिस्तान में बातचीत का दूसरा दौर हो सकता है।

ईरान की ओर से यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख की हालिया यात्रा के दौरान अमेरिका की तरफ से कुछ नए प्रस्ताव दिए गए हैं, जिन पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, ईरान फिलहाल सीधे बातचीत के लिए तैयार नहीं है। उसका कहना है कि अमेरिका अपने सख्त रुख से पीछे नहीं हटा है।

इस बीच, ईरान ने अपने समृद्ध यूरेनियम के जखीरे को अमेरिका को सौंपने से भी साफ इनकार कर दिया है। करीब 440 किलो समृद्ध यूरेनियम को लेकर ईरान ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है और इसे चर्चा के लायक भी नहीं माना है। हालांकि, ईरान ने यह जरूर कहा है कि वह अन्य मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है।

ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर सख्त बयान दिया है। शनिवार को उन्होंने कहा कि ईरान ने “थोड़ी चालाकी दिखाने की कोशिश की”, लेकिन अमेरिका के साथ बातचीत “काफी अच्छी” चल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि दिन के अंत तक और जानकारी सामने आएगी। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि “ईरान हमें ब्लैकमेल नहीं कर सकता।”

इससे एक दिन पहले शुक्रवार को ट्रंप ने और भी कड़ा रुख दिखाया था। उन्होंने कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ी तो ईरान के भीतर जाकर उसके परमाणु ठिकानों में छिपे समृद्ध यूरेनियम को अपने कब्जे में ले लेगा। ट्रंप का इशारा उन परमाणु साइट्स की ओर था, जिन्हें पिछले साल अमेरिकी सैन्य हमलों में भारी नुकसान पहुंचा था और जिनके मलबे के नीचे यूरेनियम दबा होने की आशंका जताई जाती है।

ट्रंप के इन बयानों से साफ है कि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अब भी बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है, भले ही बातचीत जारी होने की बात कही जा रही हो।

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First Published - April 19, 2026 | 8:48 AM IST

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