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US-Iran War: ट्रंप का बड़ा बयान- ईरान का शांति प्रस्ताव ‘कचरा’, सीजफायर को बताया बेहद कमजोर

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अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे और शांति प्रस्ताव को लेकर तनाव बढ़ गया है, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के रुख को सख्ती से खारिज किया है।

Last Updated- May 12, 2026 | 1:30 PM IST
US-Iran war
US President Donald Trump

US-Iran War: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोमवार (स्थानीय समय) को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में मीडिया से बातचीत के दौरान ईरान के शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मौजूदा सीजफायर बेहद कमजोर स्थिति में है और वह “लाइफ सपोर्ट” पर टिका हुआ है।

यह बयान एक मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़े आयोजन के दौरान मीडिया से बातचीत में दिया गया।

ईरान के प्रस्ताव को बताया ‘कचरा’

ट्रंप ने कहा कि ईरान की ओर से भेजा गया शांति प्रस्ताव उन्हें पूरी तरह अस्वीकार्य लगा। उन्होंने तीखे शब्दों में इसे “कचरा” बताया और कहा कि वह इसे पढ़कर आगे नहीं बढ़ पाए।

ट्रंप के अनुसार, “उस कचरे को पढ़ने के बाद मैंने उसे पूरा भी नहीं पढ़ा। ईरान की स्थिति लाइफ सपोर्ट पर है और सीजफायर भी पूरी तरह कमजोर स्थिति में है।”

सैन्य ताकत पर ट्रंप का दावा

ट्रंप ने दावा किया कि ईरान इस समय पहले से काफी कमजोर स्थिति में है और उसकी सैन्य क्षमता को लेकर उन्होंने कहा कि जो भी थोड़ा बहुत उन्होंने सीजफायर के दौरान फिर से तैयार किया है, उसे अमेरिका बहुत जल्दी खत्म कर सकता है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर ईरान की किसी भी सैन्य तैयारी को “एक दिन के भीतर खत्म करने” में सक्षम है।

ट्रंप ने कहा कि ईरान परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता क्योंकि वह “बहुत खतरनाक और अस्थिर” देश है। ट्रंप के मुताबिक, इस तरह के देश के पास परमाणु शक्ति होना पूरी दुनिया के लिए खतरा बन सकता है।

सैन्य कार्रवाई को बताया रणनीतिक सफलता

ट्रंप ने अमेरिका की हालिया सैन्य कार्रवाई और नाकेबंदी की तारीफ करते हुए इसे “सैन्य रणनीति की बेहतरीन मिसाल” बताया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के पास अब पहले से बेहतर और अधिक गोला-बारूद मौजूद है, जो कुछ महीने पहले की तुलना में कहीं ज्यादा उन्नत है। उनके अनुसार, यह तैयारी भविष्य की किसी भी चुनौती के लिए अमेरिका को मजबूत बनाती है।

अपने बयान में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका जो कर रहा है, वह सिर्फ एक देश की नहीं बल्कि पूरी दुनिया की सेवा है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कई दशकों में 47 सालों से इस मुद्दे पर कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन पहले के अमेरिकी राष्ट्रपति और अन्य देशों के नेताओं ने ऐसा नहीं किया।

ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि ईरान के कई स्तरों पर नेतृत्व कमजोर हुआ है और इसके बावजूद वे बातचीत के लिए आगे आए हैं। उनके अनुसार, ईरान की ओर से जो समझौते का प्रस्ताव दिया गया है, वह “अस्वीकार्य और अव्यावहारिक” है।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर पहले के अमेरिकी राष्ट्रपति जैसे बराक ओबामा या जो बाइडन होते तो शायद ऐसा प्रस्ताव स्वीकार कर लेते, लेकिन मौजूदा स्थिति में ऐसा संभव नहीं है।

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई के बाद उनसे परमाणु साइट को लेकर कदम उठाने का अनुरोध किया था, क्योंकि वह क्षेत्र “पूरी तरह नष्ट” हो चुका था।

ट्रंप ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ईरान ने उनसे कहा कि हालिया हमलों के बाद वहां एक बेहद खतरनाक “न्यूक्लियर डस्ट” जैसी स्थिति बनी हुई है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान का कहना है कि यह स्थल इतना गहराई तक और गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुका है कि उसे साफ करना उनके लिए संभव नहीं है।

ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने उन्हें बताया कि इस मलबे और सामग्री को हटाने की जिम्मेदारी अमेरिका को लेनी होगी। उनके अनुसार, केवल अमेरिका और चीन ही ऐसे देश हैं जिनके पास इतनी क्षमता और तकनीक है कि वे इस स्तर की जटिल स्थिति को संभाल सकते हैं।

ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान ने स्वीकार किया है कि उनके पास इस काम के लिए आवश्यक उपकरण और तकनीक मौजूद नहीं है, इसलिए यह कार्य बाहरी सहायता के बिना संभव नहीं होगा।

ईरान का रुख: 14-सूत्रीय प्रस्ताव को स्वीकार करने की बात

इस बीच ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद-बघेर ग़ालिबाफ ने मंगलवार को बयान देते हुए कहा कि 14-सूत्रीय प्रस्ताव को स्वीकार करने के अलावा कोई वास्तविक विकल्प नहीं बचता।

उन्होंने कहा कि किसी भी अन्य रास्ते पर चलना असफलता की ओर ले जाएगा और यह प्रक्रिया अंततः बेनतीजा साबित होगी।

ग़ालिबाफ ने यह भी चेतावनी दी कि यदि इस मुद्दे को लंबा खींचा गया तो इसका आर्थिक बोझ अमेरिका के करदाताओं पर पड़ेगा।

उनके अनुसार, “ईरानी जनता के अधिकारों को 14-सूत्रीय प्रस्ताव के तहत स्वीकार करना ही एकमात्र व्यवहारिक समाधान है। इससे अलग हर कोशिश असफलता ही देगी और देरी करने पर इसका खामियाजा अमेरिका को भुगतना होगा।”

इन बयानों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। दोनों पक्षों के दावों ने स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है, हालांकि अभी तक किसी आधिकारिक समझौते या पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है।

ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन (AEOI) के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने साफ किया है कि अमेरिका के साथ किसी भी संभावित बातचीत में परमाणु तकनीक या यूरेनियम संवर्धन का मुद्दा शामिल नहीं होगा। उन्होंने दोहराया कि ईरान इस विषय पर कोई समझौता करने के लिए तैयार नहीं है।

यह जानकारी ईरान की सरकारी मीडिया प्रेस टीवी ने सोमवार को दी।

रिपोर्ट के अनुसार, मोहम्मद इस्लामी ने संसद की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा समिति को इस बारे में विस्तृत जानकारी दी। समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेज़ाई ने बैठक के बाद बताया कि ईरान का स्पष्ट रुख है कि संवर्धन से जुड़ा मुद्दा किसी भी वार्ता का हिस्सा नहीं बनेगा।

ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अगर अमेरिका के साथ कोई बातचीत होती है, तो उसका केंद्र केवल क्षेत्र में जारी संघर्ष और युद्ध को समाप्त करने पर होना चाहिए। तेहरान का कहना है कि वह बातचीत को राजनीतिक और सुरक्षा स्थिरता तक सीमित रखना चाहता है।

इस बयान को ईरान की परमाणु नीति पर उसके सख्त और अपरिवर्तित रुख के रूप में देखा जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों के साथ तनाव फिलहाल कम होने की संभावना नहीं है।

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First Published - May 12, 2026 | 12:36 PM IST

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