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US Iran War: ईरान को ट्रंप की चेतावनी, डेडलाइन से पहले समझौता नहीं हुआ तो ‘भारी बमबारी’ का संकेत

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Donald Trump के सख्त बयान और सैन्य चेतावनी के बीच United States और Iran के रिश्तों में तनाव बढ़ा, शांति वार्ता पर अनिश्चितता गहराई।

Last Updated- April 21, 2026 | 10:07 AM IST
Donald Trump
US President Donald Trump (File Photo)

US Iran War: अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कहा कि तय समय सीमा तक समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि अगर बातचीत नाकाम रहती है, तो अमेरिका “बहुत बड़ी मात्रा में बम गिरा सकता है।”

ट्रंप ने यह बयान मीडिया से बातचीत और अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट के जरिए दिया। उन्होंने साथ ही यह भी संकेत दिया कि कूटनीतिक बातचीत का रास्ता अभी बंद नहीं हुआ है और आने वाले दिनों में स्थिति तेजी से बदल सकती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि युद्ध खत्म करने को लेकर उन पर कोई दबाव नहीं है, लेकिन घटनाक्रम जल्द आगे बढ़ सकता है। उनके इस बयान से साफ है कि एक ओर जहां अमेरिका दबाव की रणनीति अपना रहा है, वहीं बातचीत की संभावनाएं भी खुली रखी गई हैं।

इस बीच अमेरिका एक और दौर की बातचीत की तैयारी में है। उपराष्ट्रपति JD Vance के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल भेजने की योजना है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि ईरान इस वार्ता में शामिल होगा या नहीं।

ईरान पहले ही संकेत दे चुका है कि वह तभी आगे बढ़ेगा जब अमेरिका अपने रुख में नरमी दिखाएगा, खासकर उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर। ऐसे में तय समय सीमा के करीब आते-आते स्थिति और संवेदनशील होती जा रही है।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है, जिससे शांति वार्ता पर अनिश्चितता गहरा गई है। ताजा घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र में हालात को और संवेदनशील बना दिया है।

अमेरिकी कार्रवाई से बढ़ा विवाद

हाल ही में US Navy ने ईरान के झंडे वाले एक मालवाहक जहाज को जब्त कर लिया। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब United States पहले ही ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी लागू कर चुका है। Iran ने इस कार्रवाई को युद्धविराम का उल्लंघन बताया है और कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए गंभीर परिणामों की चेतावनी दी है।

तनाव का असर Strait of Hormuz पर भी साफ दिख रहा है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है। ईरान ने पहले इस रास्ते को थोड़े समय के लिए खोला, लेकिन बाद में फिर से यातायात रोक दिया। उसका कहना है कि अमेरिका ने युद्धविराम की शर्तों का पालन नहीं किया। इस मार्ग से दुनिया का करीब पांचवां हिस्सा तेल गुजरता है, ऐसे में यहां किसी भी बाधा से वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

तनाव के बीच Pakistan शांति वार्ता की तैयारियां जारी रखे हुए है। हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए किसी बड़े नतीजे की उम्मीद कम मानी जा रही है।

ट्रंप के बयान से बढ़ी अनिश्चितता

इस बीच Donald Trump ने संकेत दिया है कि वह युद्धविराम को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। इससे एक बार फिर टकराव बढ़ने की आशंका गहरा गई है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान फिलहाल कमजोर स्थिति में है। साथ ही ट्रंप ने बाजारों को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि अगर समझौता होता है तो तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है।

यह पढ़ें: US Iran War: धमकियों के साए में नहीं झुकेगा ईरान! अमेरिका को खुली चुनौती, क्या बढ़ेगा टकराव?

US Iran War: ईरान ने धमकियों में बातचीत से किया इनकार

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच तेहरान से कड़ा संदेश सामने आया है। Mohammad Bagher Ghalibaf ने साफ कहा है कि उनका देश किसी भी तरह के दबाव या धमकी के माहौल में बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह ईरान को झुकाने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान अपने विकल्प मजबूत करने में लगा है।

कालीबाफ के बयान से यह संकेत मिला है कि Iran फिलहाल अपने रुख से पीछे हटने के मूड में नहीं है। उन्होंने कहा कि बातचीत तभी संभव है जब माहौल बराबरी और सम्मान का हो।

अमेरिका की ओर से भी सख्ती

वहीं United States की तरफ से भी सख्त संकेत मिल रहे हैं। राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ कर दिया है कि वह युद्धविराम की समय सीमा बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल की पाकिस्तान यात्रा की योजना थी, लेकिन ईरान की ओर से बातचीत को लेकर स्पष्ट रुख नहीं मिलने के कारण स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।

US Iran War: लंबे टकराव का बढ़ता असर

करीब दो महीने से जारी इस तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखने लगा है। ईरान के अधिकारियों के मुताबिक, इस संघर्ष में हजारों लोगों की जान जा चुकी है, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं।

इस बीच Israel और Lebanon ने संकेत दिए हैं कि वे वॉशिंगटन में होने वाली अगली वार्ता में हिस्सा ले सकते हैं। माना जा रहा है कि यह पहल दोनों देशों के बीच दशकों बाद सीधे संवाद की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है।

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First Published - April 21, 2026 | 10:07 AM IST

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